Madkot Munsyari

Madkot Munsyari Tourist Place This small town is located at the foot of the main Himalayan peaks, which are covered with snow throughout the year.

Madkot

Madkot, 22 km from Munsiyari, has hot water springs which are supposed to cure rheumatism, arthritis and skin ailments


Munsiyari
Munsiyari is situated in the northern part of the Pithoragarh district, distance is 124 km. Munsiyari is in base for the track routes to Milam Glacier, Ralam Glacier, and Namik Glacier, at the base of majestic Himalayan peak Trishuli (7,074 m). This place is al

so famous for Munshiyari Bugyal, an alpine meadow. Alpine lakes of Maheshwari Kund and Thamri Kund are around Munsiyari. The valley from Munsiyari to Milam is known as Johar Valley..

उत्तराखँड के अल्मोडा जिले के धौलाछीना गाँव में रहते है लोकगायक संत राम जी और उनकी धर्म पत्नी आनंदी देवी , दोनों नेत्र ही...
10/10/2020

उत्तराखँड के अल्मोडा जिले के धौलाछीना गाँव में रहते है लोकगायक संत राम जी और उनकी धर्म पत्नी आनंदी देवी , दोनों नेत्र हीन है और वर्तमान में बहुत ही मुश्किल से जीवन यापन कर रहेँ है । इनकी कोई संतान भी नहीं है जो इनकी देखभाल कर सके ।
लोग बोलते हैं कि लोक गायक बनिये फोक गाइये, अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाइये । क्या करना है ऐसे गा करके जो कपड़े तो दूर खाने के एक निवाले को भी मोहताज़ हो जाए । सरकारी कागजी महकमे में अनेक बुद्धिजीवियों के विचार मिल सकते हैं किन्तु गरीब की पीड़ा का वर्णन कहीं नही मिलता । नेत्रों से हीन होने पर भी सुन्दर गायकी की मिशाल ये दम्पत्ति आज भी पेश करती हैं किन्तु ग्लैमर न होने के कारण या यूं कहें कि गरीबी इस कलाकार के जीवन को लील गई । धिक्कार है उन ठेकेदारों को जो संस्कृति की आड़ में अपनी राजनीति को चमकाते हैं और भृष्ट हैं वो सरकारें जो किसी की मजबूरियों को न समझकर अपने चाटुकार चमचों को पालतू जानवरों की तरह पालते हैं ।

Dharchula
27/07/2020

Dharchula

27/07/2020
*मदकोट*मुनस्यारी से २१ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पंचचुली से मदकनिया नदी आती है और मिलम से गोरी नदी ,जो मदकोट पे आ के...
05/04/2018

*मदकोट*
मुनस्यारी से २१ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पंचचुली से मदकनिया नदी आती है और मिलम से गोरी नदी ,जो मदकोट पे आ के मिल जाती है,कई लोगो का तो यह भी मानना भी है की गोरी नदी और मदकनिया नदी दोनों एक ही जगह से निकलती है मदकनिया नदी मिलम से हो के हिमालय के खंडो से हो के पंचचुली के तलहटी से मदकोट तक पहुचती है । मुनस्यारी से मदकोट जाने का मेरा अनुभव भी बड़ा अच्छा रहा,मुनस्यारी से पैदल नंदा देवी मंदिर के रास्ते निकल पड़ा जो की काफी रोमांच भरा था । पापड़ी ,पैकुती होते हुवे में किसी तरह रोड में पहुच गया और में वहां से मदकोट की तरफ निकल पड़ा । गोरी नदी के किनारे किनारे रोड पर में अकेला जा रहा था तभी एक गाड़ी वाला रुका और पूछा भुला योक्ले योक्ले का जानेहे ला (भाई अकेले अकेले कहां जा रहे हो) और मैंने जवाब दिया कि मैं बस मदकोट तक जा रहा हूँ गाड़ी वाले ने मुझे अपनी गाड़ी में आने को कहा लेकिन मैं पैदल ही निकल पड़ा प्राकृतिक नजारो का मज़ा लेते हुए। हमारी दिनचर्या वर्तमान युग में वाहनों से चलती है ,लेकिन हमें पैदल यात्रा भी करनी चाहिये । कछुवे की चाल से में मदकोट के पुल तक पहुंच गया और एक व्यक्ति से पूछने के बाद पुराने रास्ते से मदकोट के बाज़ार में प्रवेश किया । खाना खाने के बाद मैंने लोगो से पूछा की मदकोट में क्या ख़ास है देखेने लायक और उन्होंने बताया की थोडा आगे पे गरम पानी का स्रोत है ,जिसे लोकल वाले गंधक भी कहते है और एक छोटा सा झरना भी है जिसे फुग्गु झरना कहते है । में निकल पड़ा पहले झरने की तरफ और २-३ किलोमीटर पे झरना दिख गया झरना के पास एक मंदिर भी था आस पास जा रहे लोगो से पूछने पर पता चला की वह मंदिर जलदेवी का था। १० मिनट झरने को देखने के बाद में गरम पानी की ओर निकल पड़ा और जो की कुछ ही दुरी पर था गर्म पानी में नहाने के बाद में निकल पड़ा मदकोट की तरफ यह जानने के लिए की मदकोट में और क्या ख़ास है !और लोगो से पता चला की यहाँ मंदाकनी और गोरी नदी के किनारे शिवालय है जहाँ हर साल शिवरात्रि में मेले का आयोजन किया जाता है । लोगो ने यह भी बताया कि *"पंडित नैन सिंह रावत जी " * की पैतृक भूमि भी मदकोट ही है और यहाँ धारचूला मुनस्यारी विधानसभा के *विधायक माननीय हरीश धामी जी* का घर भी यहीं है ।

*मदकोट* मुनस्यारी से २१ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पंचचुली से मंदाकनी नदी आती है और मिलम से गोरी नदी ,जो मदकोट पे आ...

19/03/2016

मुनस्यारी मैं भी होली का त्यौहार धूम धाम से मनाई जाती है , और होली सब के घर घर जाती है ,सब के घरो मे होली का स्वागत किया जाता है ,और खाने मैं कोकल ,आलू के गुटके ,चने ,पापड आदि होल्यारों अर्थात होली के झुण्ड को दिया जाता है साथ ही पीने के लिए ,पहाड़ी ब

02/03/2016

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Madkot
Pithoragarh
262501

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