18/08/2022
*बिलकीस बानो के गुनाहगारों को, वापस जेल मे डालो।*
अपीलकर्दा-आवाहन- सय्यद रईसा राज़फैयाज, कोंढवा, पुणे )
लेख पुन्हा प्रस्तुत-साभार,
जब मैंने बिलकिस बानो के गुनहगारों को जेल से बाहर आते देखा तो मेरे अंदर मानो एख ज्वालामुखी फट पड़ा। मैं जानती हूँ ये ज्वालामुखी भारत के हर नागरिक के दिल में फट रहा है। इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है।
प्लीज़ इस पेटीशन को साइन करें और गुजरात सरकार से मांग करें कि वो बिलकिस के गुनहगारों को वापस जेल में डालें।
आप खुद सोचिए, गैंगरेप और हत्या के दरिंदो का फूलमाला और मिठाई से स्वागत कर के हम हमारे देश की करोड़ों महिलाओं को आखिर क्या संदेश दे रहे हैं? अगर हम इस मुद्दे पर चुप रह गए तो अपने बहन-बेटियों, बच्चों को हम क्या जवाब देंगे?
आप चाहे जो भी विचारधारा रखते हों, एकबार बिलकिस का ये बयान पढ़िए, और तय करिए कि आप किसके साथ खड़े होंगे। पेटीशन साइन करिए और इतना शेयर करिए कि उनके गुनहगार वापस जेल में डाले जाएं।
बिलकिस का बयान जो मीडिया में छपा है:
"दो दिन पहले, 15 अगस्त के दिन जब मैंने सुना कि मेरे परिवार और मेरे जीवन को बर्बाद करने वाले, मुझसे मेरी तीन साल की बेटी को छीनने वाले 11 लोग जेल से रिहा हो गए तब मैं 20 साल पहले हुई घटना के सदमे से मैं एक बार फिर गुजरी हूं. मैं अब भी सदमे में हूं. मेरे पास शब्द नहीं हैं.
आज में केवल पूछ सकती हूं कि किसी औरत के इंसाफ की लड़ाई ऐसे कैसे खत्म हो सकती है? मैंने अपने देश की सबसे ऊंची अदालतों पर भरोसा किया. मैंने सिस्टम पर भरोसा किया और मैं धीरे-धीरे अपने ट्रॉमा के साथ जीना सीख रही थी. इन दोषियों की रिहाई ने मुझसे मेरी शांति छीन ली है और न्याय पर मेरे भरोसे को हिला दिया है. मेरा दुख और मेरा डगमगाता विश्वास केवल मेरे लिए नहीं है, पर हर उस महिला के लिए है जो इंसाफ के लिए अदालतों के चक्कर लगा रही है.
इतना बड़ा और अन्यायपूर्ण फैसला लेने से पहले किसी ने मेरी सुरक्षा की सुध नहीं ली.
मेरी गुजरात सरकार से गुज़ारिश है कि इस फैसले को पलट दें. मुझे डर के बिना और शांति के साथ जीने का अधिकार वापस दें. ये सुनिश्चित करें कि मेरा परिवार और मैं सुरक्षित रहें."
आज का दिन खत्म होने से पहले इस पर 10 हस्ताक्षर जुटाते हैं, क्या आप हस्ताक्षर कर के साथ देंगे?
https://chng.it/bcNND7cb