Comrade T. Lalita

Comrade T. Lalita Comrade T. Lalita is the Revolutionary Workers' Party of India (RWPI) candidate for Parvati (Pune) Assembly Constituency.

RWPI is a communist party which works for the socialist transformation of the society! ✊

22/11/2025

करोड़ों मज़दूरों-कर्मचारियों पर क़हर बरपाने वाले चार लेबर कोड को मोदी सरकार ने किया लागू!

इन काले क़ानूनों के विरुद्ध मज़दूरों को ख़ुद ही लम्बी लड़ाई की तैयारी करनी होगी! ✊✊

देश के करोड़ों मेहनतकशों की बदहाल ज़िन्दगी को और भी तबाह करने वाले चार ख़तरनाक क़ानून यानी चार लेबर कोड को बीते 21 नवम्बर को मोदी सरकार सरकार ने लागू कर दिया है। इन चार लेबर कोड के लागू होने के बाद मज़दूरों के बचे-खुचे अधिकारों को भी छीन लिया गया है, जिन्हें दशकों के संघर्ष के बाद हासिल किया गया था, ताकि पूँजीपति वर्ग मनमाने तरीक़े से मज़दूरों की हड्डी-हड्डी निचोड़ सकें। यही कारण है कि चुनाव में हज़ारों-करोड़ का ख़र्च उठा कर अम्बानी-अडानी आदि ने मोदी को तीसरी बार सत्ता में पहुँचाया है ताकि मुनाफ़े के रास्ते में आने वाले हर स्पीडब्रेकर को पूरी तरह से हटाया जा सके और मोदी सरकार इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है। ज्ञात हो कि मोदी सरकार ने 2019 और सितम्बर 2020 में ही इन क़ानूनों को संसद में पारित किया था, जब जनता कोरोना और मोदी सरकार द्वारा अनियोजित रूप से थोपे गये लॉकडाउन की मार झेल रही थी। संसद में पारित होने के बाद से ही मोदी सरकार इसे लागू करने के लिए उतावली थी, जिससे देश में 60 करोड़ मज़दूरों-मेहनतकशों की लूट को बेहिसाब बढ़ाया जा सके, उनके यूनियन बनाने के अधिकार यानी उनके सामूहिक मोलभाव की क्षमता को कमज़ोर कर सके और उनके संघर्ष को कुचला जा सके। मोदी सरकार के इस क़ानून को लागू करने के लिए तमाम राज्य सरकारों की भी सहमति है। गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में चार लेबर कोड को लागू करने के प्रयोग पहले ही किये जा चुके हैं, जहाँ श्रम क़ानूनों को निष्प्रभावी बनाया जा चुका है। साथ ही चार लेबर कोड पर कांग्रेस व अन्य किसी भी चुनावबाज़ पार्टियों को भी कोई आपत्ति नहीं है। यह भी दर्शाता है कि मज़दूरों के अधिकारों को ख़त्म करने के लिए सभी पार्टियाँ कैसे एकसाथ हो जाती हैं।

ये चार लेबर कोड हैं: मज़दूरी संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल स्थिति संहिता, सामाजिक सुरक्षा व पेशागत सुरक्षा संहिता, औद्योगिक सम्बन्ध संहिता।
पहली, 'मज़दूरी श्रम संहिता' के अनुसार मालिक को मज़दूर को न्यूनतम मज़दूरी देने से बचने के तमाम रास्ते दिये गये हैं। यह 8 घण्टे से ज़्यादा काम करवाने के क़ानूनी रास्ते खोलती है और वह भी ओवरटाइम मज़दूरी के भुगतान के बिना।
दूसरी, 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल स्थिति संहिता’ में तो असंगठित मज़दूरों को कोई जगह ही नहीं दी गयी है। केवल 10 से ज़्यादा मज़दूरों को काम पर रखने वाले कारख़ानों पर ही यह लागू होगा, यानी मज़दूरों की बहुत बड़ी आबादी इस क़ानून के दायरे से बाहर होगी। ये संहिताएँ मालिकों को इस बात का मौक़ा देती हैं कि वह अपने मज़दूरों को मानवीय कार्यस्थितियाँ मुहैया न कराये।
तीसरी, 'सामाजिक सुरक्षा व पेशागत सुरक्षा संहिता' के अनुसार ईएसआई, पीएफ़, ग्रैच्युटी, पेंशन, मातृत्व लाभ व अन्य सभी लाभ मज़दूरों को बाध्यताकारी तौर पर देना सरकार व मालिकों की ज़िम्मेदारी नहीं होगी बल्कि यह केन्द्रीय सरकार व राज्य सरकारों द्वारा जारी किये जाने वाले नोटिफिकेशनों पर निर्भर करेगा।
चौथी, 'औद्योगिक सम्बन्ध संहिता' ने रोज़गार की सुरक्षा के प्रति मालिक की सारी क़ानूनी ज़िम्मेदारी को ख़त्म करने का रास्ता खोल दिया है; जब चाहे मज़दूरों को काम पर रखो और जब चाहे उन्हें निकाल बाहर करो! साथ ही जिन कारख़ानों में 300 तक मज़दूर हैं, उन्हें लेऑफ़ या छँटनी करने के लिए सरकार की इजाज़त लेने की अब ज़रूरत नहीं होगी (पहले यह संख्या 100 थी)। मैनेजमेंट को 60 दिन का नोटिस दिये बिना मज़दूर हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। ठेका प्रथा को पूरी तरह से क़ानूनी जामा पहना दिया गया है।

कुल मिलाकर कहें तो, इन श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद मज़दूर वर्ग को ग़ुलामी जैसे हालात में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 90 फ़ीसदी अनौपचारिक मज़दूरों के जीवन व काम के हालात अब और नारकीय हो जायेंगे। पुराने श्रम क़ानून लागू नहीं किये जाते थे, लेकिन कहीं पर अनौपचारिक व औपचारिक, संगठित व असंगठित दोनों ही प्रकार के मज़दूर अगर संगठित होते थे, तो वे लेबर कोर्ट का रुख़ करते थे और कुछ मसलों में आन्दोलन की शक्ति के आधार पर क़ानूनी लड़ाई जीत भी लेते थे। लेकिन अब वे क़ानून ही समाप्त हो चुके हैं और नयी श्रम संहिताओं में वे अधिकार मज़दूरों को हासिल ही नहीं हैं, जो पहले औपचारिक तौर पर हासिल थे। इन चार श्रम संहिताओं का अर्थ है मालिकों और कॉरपोरेट घरानों यानी बड़े पूँजीपति वर्ग को मज़दूरों का भयंकर शोषण करने की खुली छूट देना। मालिकों का वर्ग इस बात के लिये अब पूरी तरह आज़ाद होगा कि वह मज़दूरों को बिना जीवनयापन योग्य मज़दूरी दिये, सामाजिक सुरक्षा और गरिमामय कार्यस्थितियाँ दिये बग़ैर ही काम कराए।

हर मज़दूर अपने अनुभव से जानता है कि काग़ज़ पर मौजूद श्रम क़ानून पहले ही इतने लचीले और निष्प्रभावी थे कि आम तौर पर इनका फ़ायदा मज़दूरों को कम, मालिकों को ही ज़्यादा मिलता था। लेकिन फिर भी ये क़ानून पूँजीपतियों के लिए कभी-कभार सरदर्दी का सबब बन जाते थे, ख़ासकर जब मज़दूर इन्हें लागू कराने के लिए संघर्ष छेड़ देते थे। नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही “कारोबार की आसानी” के नाम पर पूँजीपतियों को मज़दूरों की श्रम-शक्ति लूटने की खुली छूट देने का ऐलान कर दिया था ताकि आर्थिक मन्दी की मार से कराहते पूँजीपति वर्ग के मुनाफ़े को बचाया जा सके। कहने के लिए तो श्रम क़ानूनों को "तर्कसंगत और सरल" बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है लेकिन इसका एक ही मक़सद है, देशी-विदेशी कम्पनियों के लिए मज़दूरों के श्रम को सस्ती से सस्ती दरों पर और मनमानी शर्तों पर निचोड़ना व उनके शोषण को आसान बनाना।

बुर्जुआ और संसदमार्गी वामपन्थी दलों व उनसे जुड़ी यूनियनें मज़दूरों के अतिसीमित आर्थिक हितों की हिफ़ाज़त के लिए भी सड़क पर उतरने की हिम्मत और ताक़त दुअन्नी-चवन्नी की सौदेबाज़ी करते-करते खो चुकी हैं। वैसे भी देश की कुल मज़दूर आबादी में 90 फ़ीसदी से अधिक जो असंगठित मज़दूर हैं, उनमें इनकी मौजूदगी बस दिखावे भर की ही है। अब सफ़ेद कॉलर वाले मज़दूरों, कुलीन मज़दूरों और सर्विस सेक्टर के मध्यवर्गीय कर्मचारियों के बीच ही इन यूनियनों का वास्तविक आधार बचा हुआ है और सच्चाई यह है कि नवउदारवाद की मार जब समाज के इस संस्तर पर भी पड़ रही है, तो ये यूनियनें इनकी माँगों को लेकर भी प्रभावी विरोध दर्ज करा पाने में अक्षम होती जा रही हैं। वैसे तो उनके पास यह मौक़ा और ताक़त दोनों ही थे कि वे तत्काल आम अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान करते और मोदी सरकार को इन श्रम संहिताओं को वापस लेने के लिए मजबूर करते मगर इन नक़ली कम्युनिस्ट पार्टियों और उनकी ट्रेड यूनियनों से इस तरह कि कोई उम्मीद करना भी बेकार है।

आज ज़रूरत है कि संगठित क्षेत्र के मज़दूर ख़ुद ही इस काले क़ानून के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं और अपनी यूनियन नेतृत्व पर यह दवाब डालें कि वह मज़दूर वर्ग पर किये गये इस फ़ासीवादी हमले के ख़िलाफ़ देशव्यापी जुझारु संघर्ष संगठित करें वरना जिस धड़ल्ले से मोदी सरकार निजीकरण और ठेकाकरण लागू कर रही है, वह दिन दूर नहीं जब बची-खुची नौकरियाँ भी ख़त्म कर दी जाएंगी और आने वाली पीढ़ी के लिये संगठित क्षेत्र में भी रोज़गार नहीं बचेगा। प्रतीकात्मक विरोध के झुनझुने से आगे बढ़कर अगर यह यूनियनें अनिश्चितकालीन हड़ताल के रास्ते को नहीं अपनाती हैं तो ये स्पष्ट हो जाएगा कि इनकी वास्तविक मंशा क्या है और इनका सारा विरोध नौटंकी से ज़्यादा कुछ नहीं है। बहरहाल, हमें इनके भरोसे बैठे भी नहीं रहना चाहिए।

हमें अपनी ताक़त पर भरोसा करना होगा और इस बात को भी समझना होगा कि ये हालात हमें एक मौक़ा दे रहे हैं कि हम अपनी स्वतन्त्र क्रान्तिकारी यूनियनों का निर्माण करें। जहाँ कहीं भी ऐसी यूनियनें हैं, उन्हें तत्काल इसके ख़िलाफ़ देशव्यापी अभियान शुरू करना चाहिए और मज़दूरों की संगठित व असंगठित आबादी को इन श्रम संहिताओं की असलियत से वाकिफ़ कराना चाहिए। इसी प्रक्रिया में एक आम अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। यह रास्ता लम्बा ज़रूर है लेकिन यही एकमात्र रास्ता है। आज लाखों-करोड़ों मज़दूरों की व्यापक आबादी को संगठित और गोलबन्द किये बग़ैर यानी मज़दूर वर्ग की फौलादी एकजुटता कायम किये बिना फ़ासीवादी मोदी सरकार द्वारा उठाये गये इन मज़दूर-विरोधी क़दमों को वापस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) यह माँग करती है कि मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड तुरन्त वापस लिया जाये।
मज़दूर वर्ग के शोषण और दमन को खुली छूट देने वाले इस काले क़ानून के विरोध में हम अभी से एकजुट नहीं होते हैं,अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाकर मोदी सरकार को इन श्रम संहिताओं को वापस लेने के लिए एक जुझारु संघर्ष की शुरुआत नहीं करते हैं तो कल बहुत देर हो जायेगी।

25/11/2024

भारताचा क्रांतिकारी कामगार पक्ष (RWPI) तर्फे पर्वती मतदार संघातील मतदारांना क्रांतिकारी अभिवादन!

The Times of India, Pune Tuesday, November 19, 2024
19/11/2024

The Times of India, Pune
Tuesday, November 19, 2024

18/11/2024
जगातील कामगारांनो एक व्हा!भांडवलशाहीला फेकून द्या!कामगार कष्टकऱ्यांचा एकच पक्ष!भारताचा क्रांतिकारी कामगार पक्ष!कामगारांच...
17/11/2024

जगातील कामगारांनो एक व्हा!
भांडवलशाहीला फेकून द्या!

कामगार कष्टकऱ्यांचा एकच पक्ष!
भारताचा क्रांतिकारी कामगार पक्ष!

कामगारांच्या एकजुटीला,
आमचं मत थापीला!

निवडणुका अगदी तोंडावर असताना प्रचार आता अंतिम टप्प्यात पोहोचला आहे आणि सर्व भारताचा क्रांतिकारी कामगार पक्षाचे कार्यकर्ते संपूर्ण ताकदीने, उत्साहाने कॉम्रेड ललिता यांना मतदान करण्याचे आवाहन करत पक्षाची भूमिका जनसामान्यांपर्यंत पोहोचवत आहे.

प्रचारादरम्यान काल 16 नोव्हेंबर पानमळा भागातून पदयात्रा काढण्यात आली. क्रांतिकारी घोषणा आणि शिक्षण, रोजगार, महागाई इत्यादी जनतेच्या मुद्द्यांच्या नाऱ्यांसह निघालेल्या ह्या पदयात्रेत कामगार कष्टकरी जनतेने पक्षाच्या भूमिकेला आणि मुद्द्यांना प्रतिसाद देत कॉम्रेड ललिता यांना मत देण्याचा निर्धार केला. तसेच आज 17 नोव्हेंबर रोजी संध्याकाळी अप्पर lभागातून पदयात्रा काढत भारताच्या क्रांतिकारी कामगार पक्षाच्या कार्यालयासमोर कष्टकऱ्यांची सभा आयोजित करण्यात आली.

"हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्‍सा मांगेंगे" ह्या क्रांतिकारी गीताने सभेचे वातावरण दुमदुमून गेले. सभेदरम्यान मंचावर भारताच्या क्रांतिकारी कामगार पक्षाच्या विधानसभा निवडणूकीत पर्वती मतदारसंघाच्या उमेदवार कॉम्रेड टी. ललिता, विद्यार्थी-तरुण चळवळीत काम करणारे साथी सुस्मित आणि अप्पर भागातील कामगारांना संघटित करणाऱ्या साथी अश्विनी उपस्थित होत्या. साथी रवींनी सभेचे सूत्रसंचालन केले.

कामगार कष्टकऱ्यांच्या स्वतंत्र राजकीय पक्षाची गरज का आहे याबद्दल साथी अश्विनी यांनी मांडणी केली. उमेदवार कॉम्रेड ललिता यांनी मांडले की काँग्रेस, भाजप, शिवसेना, राष्ट्रवादी, वंचित हे सर्व पक्ष मोठमोठ्या भांडवलदार, ठेकेदार, बिल्डर यांची सेवा करतात आणि त्यांच्यासाठी संसदेत व विधानसभेत निवडून जातात. उपस्थित कामगारांनी स्वतः मत देण्यासोबतच त्यांच्या नातेवाईकांना, मित्रपरिवाराला सुद्धा कॉम्रेड टी ललिता यांना मत देण्यासाठी आग्रह करण्याचा निर्धार केला. सभेत शेवटी कामगार कष्टकऱ्यांच्या एकजुटीला मजबूत करण्याचे आणि कॉम्रेड ललिता यांना विजयी करण्याचे आवाहन करत सभेचे समापन करण्यात आले.

17/11/2024

पर्वती मधील कामगार कष्टकऱ्यांच्या सभेला संबोधित करत भारताचा क्रांतिकारी कामगार पक्षाच्या उमेदवार कॉम्रेड टी. ललिता...

17/11/2024

पर्वती विधानसभा मतदारसंघातून RWPI च्या उमेदवार कॉम्रेड टी. ललिता यांना थापी/करनी चिन्हासमोरील बटन दाबून विजयी करा!

🔴 निवडणूक प्रचारफेरी - 212 पर्वती विधानसभा मतदारसंघ 🔴पर्वती विधानसभा मतदारसंघातून RWPI च्या उमेदवार कॉम्रेड टी. ललिता या...
16/11/2024

🔴 निवडणूक प्रचारफेरी - 212 पर्वती विधानसभा मतदारसंघ 🔴

पर्वती विधानसभा मतदारसंघातून RWPI च्या उमेदवार कॉम्रेड टी. ललिता यांना थापी/करनी चिन्हासमोरील बटन दाबून विजयी करा! 📢📢📢

17 नोव्हेंबर • रविवार • संध्याकाळी 6.30 वाजता
📍 संविधान चौक ते अंबिका नगर
📞 80975 61533


संपूर्ण आणि अचूक जाहीरनाम्या करिता खालील लिंक वर जाऊन जाहीरनामा नक्की वाचावा , असंघटितच नव्हे तर संपूर्ण शहरी, ग्रामीण ,...
16/11/2024

संपूर्ण आणि अचूक जाहीरनाम्या करिता खालील लिंक वर जाऊन जाहीरनामा नक्की वाचावा , असंघटितच नव्हे तर संपूर्ण शहरी, ग्रामीण ,असंघटित, आणि संघटित कामगार वर्गाला आणि सोबतच संपूर्ण कष्टकरी वर्गाला संघटित करणे हे आर डब्ल्यू पी यायचे उद्दिष्ट आहे, कामगार रोजगार क्षम आहेतच, त्यांना कायम रोजगाराचा अधिकार मिळावा यासाठी पक्ष संघर्ष करत आहे. फक्त रोजगार, पेन्शन, शिक्षण, आरोग्य हे अधिकारच नव्हे तर संपूर्ण समाजाच्या क्रांतिकारी परिवर्तनाकरता आणि कामगार वर्गाच्या सत्तेकरता, समाजवादी क्रांतिकारी परिवर्तनाकरता, आर डब्ल्यू पी आय सतत संघर्षरत राहील.

कामकाऱ्यांच्या एकजुटीला, आमचं मत थापीला!थांबवा मेहनतीच्या लूटीला, आमचं मत थापीला!15 नोव्हेंबर रोजी खडके वस्ती भागात भारत...
16/11/2024

कामकाऱ्यांच्या एकजुटीला, आमचं मत थापीला!
थांबवा मेहनतीच्या लूटीला, आमचं मत थापीला!

15 नोव्हेंबर रोजी खडके वस्ती भागात भारताचा क्रांतिकारी कामगार पक्षाकडून निवडणूक प्रचारफेरी काढण्यात आली. येथील सांड पाण्याचा प्रश्न आणि पिण्याचा पाण्याचा प्रश्न प्रदीर्घकालापासून प्रलंबित आहे जनतेने स्थानिक लोकप्रतिनिधींच्या विरोधात आपला रोष प्रकट केला. आर डब्ल्यू पी आय गेल्या काही काळापासून या प्रश्नाचा पाठपुरावा करतच आहे आणि यापुढेही करत राहील.

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RWPI Office, Near Swami Samarth Mandir, Supper Indira Nagar, Bibwewadi, Pune 38
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