18/06/2020
चीन के विरूद्व हमारे सहयोगी देश :-
यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है परन्तु इसका सही उत्तर बहुत कठिन है |
१. रूस - अधिकांश भारतीयों को भ्रम है कि रूस हमारा मित्र देश है | ये बात पूर्णतया सत्य नहीं है | रूस हमारी सहायता तभी करता है जब उसमे उसे कोई लाभ हो | १९६२ के युद्ध में रूस ने यह कहकर हमारी सहायता नहीं की थी, कि भारत तो सिर्फ रूस का मित्र है किन्तु चीन रूस का भाई है | सनद रहे दोनों ही कम्युनिस्ट देश हैं और अच्छे पडोसी हैं साथ ही दोनों ही अमेरिका के दुश्मन है | तो आप कभी भी ये आशा मत रखिये की रूस चीन के विरुद्ध भारत की कोई सहायता करेगा | और २०२० में रूस और पाकिस्तान में उसी तरह अच्छे संबंध विकसित हो चुके हैं जैसे भारत व अमेरिका में हैं |
२. नेपाल - नेपाल भले ही एक हिन्दू बहुसंख्यक देश है हमारे देश के लोग उसे छोटा भाई मानते है पर अभी का नेपाल ऐंसी विचारधारा नहीं रखता | वो हमें अत्यंत नापसंद करते हैं | ये पूरी तरह से हमारे ही राजनैतिक वर्ग की गलतियां हैं जो ऐंसा हुआ है , १९६२ के युद्ध में भी नेपाल ने चीन की सहायता की थी और अब और ज्यादा सहायता करेगा | क्यूंकि दोनों ही देशों में कम्युनिस्ट पार्टिया सत्ता में हैं | अगर नेपाल का वश चले तो वो पुरे उत्तरप्रदेश बिहार आदि को अपने में मिला ले |
३. ताईवान - निश्चय ही कोई देश हमारी सहायता करेगा तो वो यही देश है , इस देश का आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ़ चाइना है यह चीन का वह भाग था जिस पर १९४५ में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अधिकार प्राप्त नहीं कर पायी थी | यह एक लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र देश है चीन इसे अपना एक स्वायत्त प्रदेश मानता है | और जो भी अन्य देश इसे मान्यता देते हैं | चीन उनसे अपने संबंध समाप्त करने की धमकी देता है | इस कारण अमेरिका समेत कुछ एक देशो ने ही इसको मान्यता दी हुई है | ये पुनः हमारे राजनैतिक वर्ग की गलती है वो वो इस परमित्र देश को मान्यता न देकर चीन से मित्रता करने हेतु एक पैर पर खड़े रहते |
४. वियतनाम - यह एक ऐंसा देश है जिस पर भारतीयों का ज्यादा ध्यान नहीं जाता | यह वो देश है जिसने अमेरिका तक को युद्ध में नाको चने चबवा दिए थे | एकमात्र देश जिसने अमेरिका को युद्ध में हराया है | यह एक कम्युनिस्ट देश है किन्तु चीन का दुसमन है क्यूंकि भारत ही की तरह चीन ने वियतनाम की हजारो एकड़ भूमि पर बलपूर्वक कब्जा किया हुआ है |
५. अमेरिका - दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है | १९५० हमारे नेताओं ने रूस और अमेरिका बीच रूस को चुना था जिसने हमें अमेरिका का दुश्मन बना दिया था किन्तु अब २०२० में परिस्थिति अलग है, अब भारत और अमेरिका दोनों को ही एक दूसरे की आवश्यकता है |
६. जापान - जापान और चीन की दुश्मनी ऐतिहासिक है | पर द्वितीय विश्वयुद्ध के त्रासद अनुभव के कारण वो यथासंभव युद्ध से दूर रहना ही पसंद करेगा जापान अमेरिका के साथ संधि में हैं जापान वही करेगा जो अमेरिका चाहेगा | फिर भी वह युद्ध में हमारा साथ ही देगा |
७. ब्रिटेन - ब्रिटेन सदियों तक विश्व की महाशक्ति रहा है आज के बड़े देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , न्यूजीलैण्ड आदि ब्रिटेन के ही वंशज हैं | इनका DNA आत्मा एक ही है | ब्रिटेन आज भी विश्व का भूगोल बदलने की शक्ति रखता है | ब्रिटेन ने सदियों तक भारत और चीन का शोषण किया है किन्तु वर्तमान परिस्थति में चीनी ड्रेगन को रोकने के लिये वो भारत का साथ देगा | वैसे भी अभी हॉन्गकॉन्ग के विषय पर दोनों में तनाव है |
८. इजराइल - इजराइल और चीन में कोई सीधी दुश्मनी नहीं है | भारत ने कभी भी अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण इजराइल को वो सम्मान नहीं दिया है जिसका वो अधिकारी था, जबकि इजराइल ने भारत को अपना मित्र बनाने की हरसंभव कोशिश की है और हर मुसीबत में हमारी सहायता की है | इजराइल वो देश है जिसने अकेले ५७ मुस्लिम देशों को हराया था | ये वो देश है जिसने अमेरिका परमाणु बम भी चुरा लिया था | इजऱाइली यहूदियों को उनका देश १४०० साल बाद मिला है उन्होंने सदियों तक अपनी संस्कृति और देश के लिये मुस्लिम, ईसाईयों के साथ संघर्ष किया है वो जानते हैं अपने देश से दूर हो जाना क्या होता है |
९. पाकिस्तान - हमारे ही देश का एक टुकड़ा जो हमारी जान का दुश्मन बना हुआ है | ये हमारा एक ऐंसा बेटा है समझता है इसका बाप कोई और है, एक शैतानी किताब ने इसे इसकी संस्कृति धर्म सब इतिहास सब कुछ भुला दिया हैं | चीन के एक इशारे पैर यह भारत पैर हमला कर देगा |
१०. बर्मा - भारत का यह पडोसी १९३५ से पहले भारत ही भाग था इसकी जमीनी सेना बहुत मजबूत है | अगर हमारे नेता सही विदेश नीति का प्रयोग करें तो यह युद्ध में हमारा साथी होगा |