22/08/2020
#झारखण्ड राज्य में जब भी #स्थानीयता और #आरक्षण की सीमा बढ़ाने की बात होती है, गैर-झारखंडी/दिकू लोग संविधान की दुहाई देने लगते हैं l वहीं दुसरे राज्यों में सरकारें धड़ल्ले से मूलवासियों के लिए 100% आरक्षण लागू कर रहीं है, उसपर किसी को आपति नहीं है l
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य की सरकारी नौकिरयों में स्थानीय लोगों को 100 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है। इससे पहले 9 जुलाई 2019 को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी मध्य प्रदेश के स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 70 फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी।
आंध्र प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने मूलवासियों को सरकरी और निजी नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण की घोषणा की। इसके लिए मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने 22 जुलाई 2019 को विधानसभा सदन में 'आंध्र प्रदेश एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट इन इंडस्ट्रीज/फैक्ट्रीज एक्ट 2019' पारित कराया। आन्ध्र प्रदेश के बाद तेलंगाना सरकार ने भी इस नीति को अपनाया l
छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासी बाहुल बस्तर संभाव के सात जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियों में मूलवासियों को शत-प्रतिशत आरक्षण दिया है। राज्य में 1 नवंबर 2019 से 31 अक्टूबर 2024 तक नई औद्योगिक नीति के तहत प्रदेश में खुलने वाले सभी उद्योगों में स्थानीय लोगों को मजदूर श्रेणी में 100 फीसदी कुशल श्रेणी में 70 फीसदी और प्रबंधकीय व प्रशासनिक श्रेणी में 40 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।
हरियाणा सरकार ने जुलाई 2020 को मूलवासियों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 70 फीसदी आरक्षण लागू किया है। इसके लिए हरियाणा ने स्टेट इंप्लाइमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट्स ऑर्डिनेंस 2020 लागू किया है।
हिमाचल सरकार ने जुलाई 2020 को राज्य के मूलवासियों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 80 फीसदी आरक्षण देने का एक कानून बनाया है। इसके लिए हिमाचल सरकार ने "स्टेट इंप्लाइमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट्स ऑर्डिनेंस 2020" लागू किया है। इसका मकसद कोरोना काल में दूसरे राज्य से वापस लौटे स्थानीय कामगारों को राज्य के अंदर ही रोजगार के अवसर देना है।
गुजरात में विजय रूपाणी सरकार ने निजी विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में राज्य के लोगों को नौकरी देने के लिए 80 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया है। गुजरात में पहले से ही स्थानीय लोगों को राज्य की सरकारी नौकरियों में 85 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।
कर्नाटक सरकार दिसंबर 2016 से इन्फोटेक और बॉयोटेक को छोड़ निजी क्षेत्र के अन्य उद्योगों में स्थानीय कन्नड़ भाषी लोगों को 100 फीसदी आरक्षण देने पर विचार कर रही है l
सिर्फ स्थानीयता ही नहीं, विभिन्न राज्यों ने जनसँख्या के अनुपात में कोटिवार आरक्षण भी लागू किया है l पूर्वोतर राज्यों, यथा अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम में अनुसूचित जनजाति के लिए 80 फीसदी आरक्षण है।
हरियाणा में 70%, तमिलनाडु में 68%, महाराष्ट्र में 68%, राजस्थान में 54% कोटिवार आरक्षण की व्यवस्था है l
👉 क्या संविधान सिर्फ झारखण्ड के लिए बना है ?
👉या फिर गैर-झारखंडी मानसिकता वाले लोग सरकारी और निजी क्षेत्रों में झारखंडियो की भागीदारी को बढ़ने देना नहीं चाहते ताकि वे हमारी जमीनों और खनिज संसाधनों का मनमाने ढंग से दोहन कर सके ?
👉भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियाँ झारखण्ड में स्थानीयों को आरक्षण का विरोध करती हैं पर दुसरे राज्यों में आरक्षण का राग अलापती है l झारखंडियों के साथ ऐसी दोहरी नीति क्यूँ ?
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