20/02/2026
2800 करोड़ से अधिक का बजट पार हो चुका है और योजनाएं कागज़ों पर प्रभावशाली दिखती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं।
हल्की बारिश में ही मोहल्लों में जलजमाव हो जाता है। 1100 करोड़ की पाइपलाइन योजना के बावजूद कई जगहों पर नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। 58,000 स्ट्रीट लाइट में से लगभग 19,000 खराब पड़ी हैं। सवाल यह है कि इतना पैसा आखिर जा कहाँ रहा है?
विकास के बड़े-बड़े दावे और विज्ञापनों की चमक जनता की रोजमर्रा की परेशानियों को नहीं छुपा सकती। जब बुनियादी सुविधाएं ही ठप हों, तो यह बजट नहीं बल्कि व्यवस्थागत विफलता की कहानी बन जाती है। जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।