22/12/2025
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एक बात मुफ़्ती जी ने बिल्कुल सटीक कही, अब भूल-चूक कह दी या सोच समझ के हिंट दिया, ये तो बड़े-बड़े स्कॉलर ही जाने, पर उनका ये कहना कि गज़ा में भूख और दरिद्रता से घिसटते बच्चे असल में एक टेस्ट हैं, डॉक्टर के इन्जेक्शन के समान हैं; बिल्कुल सही आँकलन है।
50 से अधिक देश इस्लामिक हैं, इनमें से 20 तो निश्चित ही ऐसे हैं जो सम्पन्न भी हैं। इसके अलावा योरप, नॉर्थ और साउथ अमेरिका और इंग्लैंड में भी सम्पन्न मुस्लिम्स की कमी नहीं। कमी तो भारत में भी नहीं।
लेकिन कुछ जेनुइन गिनी चुनी संस्थाओं को छोड़ दें तो बाक़ियों का सारा सपोर्ट सिर्फ ट्वीटर और यूट्यूब तक ही सीमित है। आल आइज़ ऑन यहाँ या वहाँ...
ऐसा क्यों है? ये जानना भी कोई रॉकेट साइंस नहीं। उन बच्चों का बुरा हाल कैमरा पर आता है तो संवेदनाएं बढ़ती हैं, इज़राइल को क्रूर साबित करना आसान रहता है। अमेरिका उसकी शै में है, इसलिए चुप रहने का बहाना भी मिल जाता है।
बाक़ी अरब के शेख लोगों के पास ऐसी ऐसी गाड़ियाँ होती हैं कि अगर वो एक बेच दें तो साल भर का राशन आ जाए, पर नहीं।
और ये हाल सिर्फ एक गज़ा का ही नहीं, अभी बांग्लादेश में दनादन मनॉरटीज़ कुचली जा रही हैं, अपने देश के शीर्ष पदों पर बैठे चुप हैं, आग जलती देख रहे हैं, उनको पता है कि ऐसा करने से इंटरनेशनल पटल पर बांग्लादेश और पाक्सतां की इमेज खराब होगी, विक्टिम कार्ड सही से खेला जायेगा।
मुफ़्ती जी एक अन्य ट्वीट में कह रहे थे कि मेकडॉनल्ड्स इजराइल के फौजियों को रोज़ 4000 मील डोनेट कर रहा है, हमें मेकडॉनल्ड्स का बाइकॉट करना चाहिए। ये बात भी वह अमेरिका के यूट्यूब और ट्विटर पर बता रहे हैं।
नीचे कमेंट्स में “McD आज से मेरा दुश्मन” जैसे कमेंट्स हैं।
ये बड़ी निराशाजनक बात है कि हम आप आम व्यक्ति एक कॉलेटरल डैमिज है और कुछ नहीं। कहीं कोई बात हुई नहीं कि डीटीसी की बस की भांति हमें जला दिया जाता है। लप्पा ये दिया जाता है कि मरने के बाद बहुत फ़ायदा मिलेगा!
इस कॉलेटरल डैमिज से बस वही बच पाता है जो मंच पर चढ़ चुका है। दूसरों को समझाने सिखाने वाला बच निकलता है, उसको फॉलो करने वाले दौड़ा-दौड़ा के मारे जाते हैं। शेख हसीना खुद भागकर यहाँ आ गईं, पीछे उनके कार्यकर्ता और सपोर्ट करने वाली जनता रौंद दी गई।
अलगाववादी आए, कश्मीरियों को बढ़काया, पंडितों को खदेड़कर बाहर निकाला, जब अफसपा लगी तो खुद उस भाग लिए पर आम कश्मीरी की ज़िंदगी जहन्नुम हो गई। वो दीन को न मानता तो गद्दार कहलाता, मान गया तो रोज़ हयुमिलेट हो रहा है।
कभी-कभी लगता है दुनिया में कोई हज़ार बारह-सौ लोग हैं बस, जो बाक़ी बची पॉपुलेशन को अपने हिसाब से हांक रहे हैं, ये ही हैं जो मीडिया, सरकारें या गिरिजाओं को कंट्रोल कर रहे हैं। अफगानिस्तान में एक बच्चा मरा तो समझो एक माँ का जिगर कट गया, लेकिन दूर बैठे लोगों के लिए वो एक काउन्ट है, तुमने एक मारा है तो हम 10 मारेंगे। काउन्टिंग में हम ही जीतेंगे।
ये वाकई आम इंसान का टेस्ट चल रहा है, सब्र का इम्तेहान, जिसमें चाहें कितनी कुर्बानियाँ दे दी जाएँ, इंसानियत ने हर हाल में फेल होना है।
#सहर