06/11/2023
मानव तस्करी के खिलाफ अन्तरराष्ट्रीय दिवस 2023 मनाया गया
मानव तस्कर सोंचता हैं की आलू प्याज बेचेंगेवतो 10 रु कमाएंगे और लाचार गरीब बालिका बिक गई तो 5 लाख
विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर दिनांक 30.07.2023 को संध्या समय 4 बजे दिन में गुगल मीट का आयोजन किया गया Link: https://meet.google.com/npr-bavv-jvn आयोजक : ग्रामीण समाज कल्याण विकास मंच ने किया कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता और मंच के सचिव मोहम्मद हशमत रब्बानी ने किया इस अवसर पर बिहार झारखंड छत्तीसगढ़ के दर्जनों सामाजिक संगठनों ने भाग लिया
उन्होंने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि 30 जुलाई को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस’ (World Day Against Trafficking in Persons) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) हर साल 30 जुलाई को व्यक्तियों की तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस के रूप में मनाता है। 2013 में, महासभा ने मानव तस्करी (Trafficking in Persons) के शिकार लोगों की स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके अधिकारों के प्रचार और संरक्षण के लिए 30 जुलाई को व्यक्तियों की तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस (World Day against Trafficking in Persons) के रूप में नामित किया।
यह दिवस संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2013 में आरंभ किया गया था जिसे वर्ष 2010 में एक एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पारित किया गया था। विश्व मानव तस्करी रोधी दिवस पर वर्ष 2022 की थीम “प्रौद्योगिकी का उपयोग और दुरुपयोग” था साल 2023 के लिए मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस का थीम “Reach Every Victim of Trafficking, Leave No One Behind” ट्रैफिकिंग के हर शिकार तक पहुंचें, किसी को भी पीछे न छोड़ें है।
, उज्जवला गृह उज्जवला गृह के प्रबंधक स्वर्ण लता रंजन ने बताया कि मानव तस्कर बहुत चालाक होता है वह ऐसी बालिकाओं और बच्चों को शिकार बनाता है जिसके अभिभावक नही होते उन्होने बताया कि अक्टुबर 2020 से लेकर जुलाई 2023 तक हमारे पास कुल 135 केसेज प्राप्त हुए जिसमें से 120 केस को सुलझा कर उन्हें पुनर्वासित किया गया है अभी वर्तमान में 15 बालिकाएं रह रही है, मानव तस्करी एक जघन्य अपराध स्वर्ण लता रंजन ने बताया कि विश्वभर में बड़े स्तर पर मानव तस्करी (World Anti Human Trafficking) का भयावह जाल फैला हुआ है। मानव तस्करी द्वारा मासूम जिंदगियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। पुरुष, महिलाएं और सभी उम्र और सभी पृष्ठभूमि के बच्चे इस अपराध के शिकार हो सकते हैं। उज्जवला गृह के वार्डन श्रीमति निशा रानी ने भी अपने अनुभव शेयर की
क्यों होती है मानव तस्करी?
• गरीबी और अशिक्षा है सबसे बड़ा कारण
• मांग और आपूर्ति का सिद्धांत
• बंधुआ मज़दूरी
• देह व्यापार
• सामाजिक असमानता
• क्षेत्रीय लैंगिक असंतुलन
• बेहतर जीवन की लालसा
• सामाजिक सुरक्षा की चिंता
मानव तस्करी के 4 प्रकार कौन से हैं?
मानव तस्करी के तीन सामान्य प्रकार हैं: देह व्यापार, जबरन श्रम और घरेलू दासता । मानव तस्करी से सबसे अधिक लाभ कमाने वाले आर्थिक क्षेत्र कृषि, रेस्तरां, विनिर्माण, घरेलू कार्य, मनोरंजन, आतिथ्य और वाणिज्यिक सेक्स उद्योग हैं।
मानव तस्करी हर जगह होती है।
कोई महाद्वीप, कोई देश, कोई राज्य अपवाद नहीं है। मानव तस्करी, या आधुनिक गुलामी, घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर होती है। जहां तात्कालिक प्रभाव स्थानीय होता है, वहीं दीर्घकालिक परिणाम व्यापक और दूरगामी होते हैं।
मानव तस्करी का सबसे आम रूप क्या है?
यौन शोषण और जबरन श्रम
राष्ट्रीय अधिकारियों द्वारा पता लगाया गया मानव तस्करी का सबसे आम रूप यौन शोषण के उद्देश्य से तस्करी है।
इन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अति संवेदनशील समुदायों के लिए जीविकोपार्जन और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाना, (ii) तस्करी को रोकने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के कार्यान्वयन को आसान बनाना, और (iii) तस्करी के निवारण को सुनिश्चित करने के लिए कानून और व्यवस्था संबंधी फ्रेमवर्क बनाना।
'आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013' के माध्यम से भारतीय दंड संहिता की धारा 370 और 370 (A) में मानव तस्करी से निपटने हेतु उपयुक्त प्रावधान किये गए हैं। इसके तहत यौन शोषण, दासता, सेवा या अंगों के व्यापार हेतु मानव तस्करी आदि को शामिल किया गया है।
स्वर्ण लता रंजन ने बताया की प्रेम जाल में फंसाकर नाच गान और उज्जवल भविष्य का सपना दिखाकर लड़कियों का तस्करी हो रहा है बालिका स्कूल कॉलेज में जागरूकता करते रहें सोशल मीडिया का सदुपयोग करें समझें की शुरुआत है मंजिल दूर है प्रयास करते रहें, रामजीवन ठाकुर ने बताया की नाबालिग बालिकाएं दिखावे के चक्कर में उज्जवल भविष्य की लालसा में दलाल की बातों में फंस जाती हैं पटना की समाज सेविका अनामिका जी ने कहा कि झारखंड और नेपाल की लड़कियों का दिल्ली के माध्यम से तस्करी कर विदेशों में बेचा जा रहा है जिसका मूल्य 3 से 5 लाख तक होता है एनजीओ वाले कोई लड़की को छुड़ाते है तो पुलिस वाले कहते हैं की मूर्ख हो तुम जो तस्करी का केस लाते हो, जब लालची अभिभावक को दलाल से पैसे नहीं मिलते तो एफआईआर करना चाहता है या समाज को बताता है संजय जी को अररिया जिले के नेपाल बॉर्डर पर एनजीओ जागरण कल्याण भारती के द्वारा जागरूकता फैला रहे हैं वे कहते हैं की मानव तस्करी आजादी के पहले से ही व्यापार था परंतु चकाचौंध जिंदगी में और बढ़ी है मानव तस्कर का नेटवर्क मजबूत और समाज का नेटवर्क कमजोर हो गया है जिससे तस्कर आसानी से अपने कामों में सफलता प्राप्त कर लेते हैं, हमारे समाज में पश्चिमी सभ्यता का गुण आ गया है मानव तस्कर सोंचता हैं की आलू प्याज बेचेंगेवतो 10 रु कमाएंगे और लाचार गरीब बालिका बिक गई तो 5 लाख, उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूपी राजिस्थान पंजाब हरियाणा में सेक्स राशियों लिंग अनुपात में अंतर के कारण गरीब मां बाप की बेटी को पैसे देकर शादी कर लेते है और वहां दारोपदी वाली स्थिति हो जाती है अगर उन लोग 5 भाई है तो यह बच्ची पांचों की बीवी बन जाती है जो चिंतनीय विषय है
नई राह सोसायटी के धर्मेंद्र भगत ने बताएं की ट्रैफिकेर स्थानीय लड़की को ही दलाल बनाते हैं, लड़की कुटुंब बनकर पहाड़िया भाषा जानती है ,स्थानीय ट्राइबल बालिकाएं बड़ा मोबाइल जींस शर्ट पैंट देखकर आकर्षित हो जाती है, महिला दलाल और स्थानीय भाषा के वजह से वह जल्द दलाल के चंगुल में फंस जाती हैं ,दलाल उन्हें पाकुड़ लाकर स्पेशल बोलोरो के माध्यम से दिल्ली ले जाता है जहां गोंडा टोकी सिनेमा हॉल के पास रखकर रेड लाइट एरिया या कोठी में बेच देता है स्थानीय दलाल का नेटवर्क पहाड़िया-देवी- सर्विस प्रोवाइडर-कोठी- रेड लाइट रांची के किशोर बताया की झारखंड से तेजी से मानव तस्कर पनपे हैं, जागरुकता करने पर आवाज उठाने पर लोकल ट्रैफिकर दुश्मन बन जाते हैं
विश्व मानव तस्करी निषेध दिवसः भारत को बच्चों के लिए और सुरक्षित बनाना होगा
एक अनुमान के मुताबिक 2016 में करीब 8 हजार मानव तस्करी के मामले सामने आए। करीब 23 हजार पीड़ितों को छुड़ाया गया, जिनमें 61 फीसदी के करीब बच्चे शामिल हैं।
साल 2013 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 30 जुलाई को मानव तस्करी निषेध दिवस घोषित किया ताकि मानव तस्करी के शिकार लोगों के बीच जागरूकता आ सके। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2016 में मानव तस्करी के मामलों में 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। एक अंदाज के मुताबिक करीब 8 हजार मानव तस्करी के मामले सामने आए, वहीं करीब 23 हजार पीड़ितों को छुड़ाया गया, जिनमें 61 फीसदी के करीब बच्चे शामिल हैं। मानव तस्करी भारत के लिए इतनी बड़ी समस्या बन चुकी है कि इस संबंध में अमेरिका की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को टियर-2 में रखा गया है।