04/09/2026
संजय गांधी अस्पताल (रीवा): न्याय के नाम पर सिर्फ तारीख या सच?
कलेक्टर महोदय द्वारा जच्चा-बच्चा हत्या मामले में 30 दिन की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश समझ से परे और अनुचित है!
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए समय सीमा 48 घंटे से अधिकतम एक सप्ताह काफी थी। जब घटना स्पष्ट है, तो 30 दिन का समय किसके लिए? क्या इतने लंबे समय में डॉक्टरों और प्रशासन को लीपापोती का मौका नहीं मिलेगा? अस्पताल की 'चीखती दीवारें' चीख-चीख कर सच बयां कर रही हैं।
संजय गांधी अस्पताल रीवा अब स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि अराजकता का साम्राज्य बन चुका है। यहाँ न तो मरीजों की जान की कीमत है, न ही व्यवस्था बदलने की कोई नीयत। हर बार जांच के नाम पर मामले को ठंडा कर दिया जाता है।
स्पष्ट मांगें:
मजिस्ट्रेट जांच की समय सीमा घटाकर अधिकतम 7 दिन की जाए।
दोषी डॉक्टरों और लापरवाह कर्मचारियों पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो।
जांच निष्पक्ष हो और अस्पताल में पसरी अराजकता पर सख्त कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवार को न्याय मिले, लीपापोती का वक्त नहीं! ✊