Suraj Singh सूरज सिंह रीवा

  • Home
  • India
  • Rewa
  • Suraj Singh सूरज सिंह रीवा

Suraj Singh सूरज सिंह रीवा Suraj Singh
Kuthila Teonthar,Rewa M.P
Company.Krishna Construction
Onwer.MD/CEO
DPWORLD
Ex.Employee

23/08/2026
22/08/2026
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने वर्षा से प्रभावित गांवों का किया दौराकलेक्टर ने आम जनता से सजग और सुरक्षित रहने की अपील की _...
18/08/2026

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने वर्षा से प्रभावित गांवों का किया दौरा

कलेक्टर ने आम जनता से सजग और सुरक्षित रहने की अपील की
____________________________

जिले के त्योंथर क्षेत्र में टमस नदी, बेलन नदी तथा नैना नदी के जल स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले 48 घंटों में हुई तेज बारिश के कारण नदियों का जल स्तर बढ़ रहा है। तराई अंचल में नदियों के जल स्तर में वृद्धि की सूचना मिलते ही कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी तथा पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरूकरण सिंह ने अधिकारियों के साथ वर्षा से प्रभावित गांवों का दौरा किया। बेलन नदी के जल स्तर में वृद्धि के कारण डीह सहित सात गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। नैना और गुरमा का जल स्तर धीरे-धीरे घट रहा है जिससे पानी पुल से नीचे उतर गया है। कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक ने गाड़रपुर्वा, सोनौरी तथा अन्य गांवों का दौरा किया। कलेक्टर ने अधिकारियों को बाढ़ से राहत और बचाव के उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने विभिन्न गांवों में आमजनों से भेंट कर वर्षा और बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि नदी और नालों के जल स्तर में वृद्धि हो रही है। कोई भी व्यक्ति इनके समीप न जाए। आवश्यकता होने पर बाढ़ से सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। राहत केन्द्रों में सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। नाव के द्वारा भी नदियों को पार करने का प्रयास न करें। नदी का जल स्तर बढ़ने पर नाव से भी आवागमन पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। कलेक्टर ने मौके पर उपस्थित जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को नदी के जल स्तर पर नजर रखने तथा ग्रामीणों को वर्षा और नदी के जल स्तर की लगातार जानकारी देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि आम जन किसी भी तरह से घबराहट में न आएं। वर्षा का जोर कम हो गया है। बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव के पूरे प्रबंध किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने पुलिस अधिकारियों को जलमग्न पुल और पुलिया पर आवागमन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी जान खतरे में डालकर गहरे पानी में न जाने दें। होमगार्ड्स और एसडीआरएफ की टीम को सतर्क रखें। आवश्यकता होने पर राहत और बचाव कार्य तत्काल करें। जल स्तर बढ़ने के कारण डीह, कैथा, गंथा, बजरा, सोनौरी कटरा, बसहट तथा कठौली गांव प्रभावित हैं। इनमें अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। नदी का जल स्तर बढ़ने पर बाढ़ का खतरा हो सकता है। रेरूआ और गाड़रपुर्वा गांवों में नैना नदी का जल स्तर बढ़ने से जल भराव हो रहा है। निरीक्षण के समय एसडीएम त्योंथर राकेश चौरसिया, एसडीओपी, मनस्वी शर्मा, तहसीलदार राजेश तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh

#रीवा

वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू के पास 364 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत था और सामने विपक्ष न के बराबर...
18/08/2026

वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू के पास 364 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत था और सामने विपक्ष न के बराबर था। इसके बावजूद नेहरू जी ने देश के पहले मंत्रिमंडल (1947) में विपक्ष के बड़े चेहरे डॉ. बी.आर. अंबेडकर को देश का पहला कानून मंत्री बनाया और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री का पद सौंपा।

यह सत्ता का अहंकार नहीं, बल्कि देश के नवनिर्माण के लिए सभी विचारधाराओं को साथ लेकर चलने की दूरदर्शिता थी।

​नेहरू जी विपक्ष के नेताओं के विचारों और उनकी आलोचनाओं को किस कदर सम्मान देते थे, इसका प्रमाण 1952 के बाद की संसदीय बहसों में मिलता है। जब अटल बिहारी वाजपेयी जी नए-नए सांसद बनकर आए थे, तो उनके तीखे और धारदार भाषणों को नेहरू जी पूरी तन्मयता से सुनते थे।

एक बार संसद में वाजपेयी जी ने नेहरू जी की विदेश नीति की कड़वी आलोचना की, जिसके जवाब में नेहरू जी ने न तो उन पर देशद्रोह का थप्पा लगाया और न ही माइक बंद करवाया, बल्कि भाषण के बाद उनसे मिलकर पीठ थपथपाई और कहा कि यह नौजवान एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जब देश संकट में था, तब विपक्ष के पास केवल 20-25 सांसदों का छोटा समूह था। इसके बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की मांग पर पंडित नेहरू ने युद्ध के दौरान ही 8 नवंबर 1962 को संसद का विशेष सत्र बुलाया था।

उस सत्र में 100 से अधिक सांसदों ने सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल दागे, तीखे कटाक्ष किए, लेकिन सरकार ने एक भी सांसद को न तो निलंबित किया और ना ही देशद्रोही ठहराया।

​1963 में जब आचार्य कृपलानी सरकार के खिलाफ देश का पहला अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए, तब कांग्रेस के पास 361 से अधिक सीटें थीं और प्रस्ताव के पक्ष में केवल 62 वोट थे। इसके बावजूद नेहरू जी ने 4 दिनों तक संसद में पूरी चर्चा करवाई और अविश्वास प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि विपक्ष का यह कदम लोकतंत्र को जीवंत और सरकार को सतर्क बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

​वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय, जब देश ने बांग्लादेश को आजाद कराया था, तब अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इंदिरा गांधी के ऐतिहासिक नेतृत्व की सराहना की थी। वहीं दूसरी ओर, इंदिरा गांधी ने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेताओं को विदेशी मंडलों और प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करने भेजा।

​वर्ष 1977 में जब पहली गैर-कांग्रेसी जनता पार्टी सरकार बनी और अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने, तो विदेश मंत्रालय के गलियारे से पंडित नेहरू की तस्वीर हटा दी गई थी। जब वाजपेयी जी ने यह देखा, तो उन्होंने तत्काल अधिकारियों को निर्देश देकर नेहरू जी की वह तस्वीर सम्मानपूर्वक वापस उसी स्थान पर लगवाई।

यह उस दौर के नेताओं के दिल का बड़प्पन और एक-दूसरे के प्रति असीम राजनीतिक सम्मान का प्रत्यक्ष प्रमाण था।

​1984 के चुनावों में कांग्रेस ने इतिहास की सबसे बड़ी जीत हासिल करते हुए 404 सीटें जीती थीं और भाजपा के पास केवल 2 सीटें बची थीं। प्रचंड बहुमत होने के बावजूद राजीव गांधी ने कभी 2 सीटों वाले विपक्ष का उपहास नहीं उड़ाया।

​जब राजीव गांधी को पता चला कि विपक्ष के युवा नेता अटल बिहारी वाजपेयी गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और उनके पास इलाज के लिए न्यूयॉर्क जाने के पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो राजीव गांधी ने एक संवेदनशील और महान मिसाल कायम की।

राजीव गांधी ने अटल जी को अपने कार्यालय में बुलाया और उन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर दिया, ताकि सरकारी खर्चे पर न्यूयॉर्क में उनका सही इलाज हो सके।

अटल जी ने बाद में सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया था कि राजीव गांधी की वजह से ही उनकी जान बच सकी थी।

​इसी तरह वर्ष 1991 से 1996 के दौरान जब डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे और नरसिम्हा राव जी प्रधानमंत्री थे, तब देश अभूतपूर्व आर्थिक संकट से गुजर रहा था। भारत के पास केवल 3 हफ्ते का विदेशी मुद्रा भंडार (लगभग $1.2 बिलियन) बचा हुआ था।

उस वक्त सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं था, लेकिन नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह ने एलके आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी और वामपंथी नेताओं के साथ लगातार 15 से अधिक बैठकें करके ऐतिहासिक आर्थिक उदारीकरण (LPG reforms) के बिलों को पास करवाया।

​डॉ. मनमोहन सिंह के 10 साल के शासनकाल (2004-2014) में 2008 का भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (Indo-US Nuclear Deal) एक ऐसा दौर था जब सरकार पर संकट मंडरा रहा था। वामपंथियों ने 59 सांसदों का समर्थन वापस ले लिया था, फिर भी संसद में हफ्तों तक तर्कपूर्ण बहस हुई।

डॉ. मनमोहन सिंह ने विपक्ष के हर तीखे सवाल का जवाब तथ्य और आंकड़ों के साथ दिया, लेकिन किसी भी विरोधी नेता को जेल भेजने या केंद्रीय एजेंसियों (CBI/ED) का भय दिखाने की कोशिश नहीं की।

​पहले के दौर में पक्ष और विपक्ष केवल संसद तक सीमित नहीं थे; उनके बीच व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक संबंध बेहद मानवीय थे। विवाह समारोह हो, बीमारी हो या कोई निजी संकट, हर दल के नेता एक-दूसरे के घर आते-जाते थे।

आर्थिक संकट में व्यक्तिगत मदद तक की जाती थी और एक-दूसरे के स्वास्थ्य की चिंता की जाती थी। राजनीति केवल चुनावों की हार-जीत तक सीमित रहती थी, चुनाव खत्म होते ही देश के विकास के लिए सब एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते थे।

​लेकिन वर्ष 2014 के बाद देश की राजनीतिक फिज़ा में ऐसा जहर घोल दिया गया है कि संवाद की जगह प्रतिशोध ने ले ली है। आज लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद में तार्किक बहस की जगह विपक्ष की आवाज दबाने का काम किया जा रहा है।

आंकड़े गवाही देते हैं कि शीतकालीन सत्र 2023 में इतिहास में पहली बार एक ही सत्र में 146 सांसदों को संसद से निलंबित (Suspend) कर दिया गया, क्योंकि वे केवल देश के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे थे।

​आज स्थिति यह हो चुकी है कि विपक्ष यदि संसद में सवाल पूछे तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है; अगर बिना माइक के विरोध दर्ज कराएं तो सीधे निलंबित कर दिया जाता है। यदि विपक्ष सड़क पर उतरकर जनता के हक में धरना-प्रदर्शन करे तो उन्हें जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है।

सत्ता के खिलाफ बोलने वाले, लिखने वाले और सवाल पूछने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को सीधे 'देशद्रोही' या 'पाकिस्तानी' घोषित कर दिया जाता है।

​वर्तमान दौर की भाषा और मर्यादा का स्तर इतना गिर चुका है कि देश के संवैधानिक पदों पर बैठे लोग विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं और महिला नेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करते नहीं हिचकिचाते।

सार्वजनिक मंचों से विपक्ष की राष्ट्रीय अध्यक्षों को 'जर्सी गाय', 'कांग्रेस की विधवा' या 'बार में नाचने वाली' जैसे अत्यंत आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित किया जाता है। यह भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा अपमान है।

​ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) जैसी निष्पक्ष जांच एजेंसियों का जिस बड़े पैमाने पर राजनीतिक इस्तेमाल आज हो रहा है, वैसा इतिहास में कभी नहीं देखा गया। सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2014 के बाद से ईडी द्वारा दर्ज किए गए मामलों में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का आंकड़ा 95% तक पहुंच चुका है, जिनमें से लगभग सभी नेता विपक्षी दलों से ताल्लुक रखते हैं।

आश्चर्यजनक रूप से, जैसे ही कोई आरोपी नेता सत्ताधारी दल में शामिल होता है, उसके सारे मुकदमे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। ​आज देश में एक खतरनाक माहौल तैयार किया जा रहा है, जहां मुख्यधारा का मीडिया वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए दिन-रात 'हिंदू खतरे में है' का फर्जी नैरेटिव चलाता है।

जबकि कड़वी सच्चाई यह है कि इस देश में हिंदू या कोई धर्म खतरे में नहीं है, बल्कि देश का 'लोकतंत्र' और 'संविधान' खतरे में है। एक अघोषित आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी गई है, जहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सवाल पूछने की आजादी को छीना जा रहा है।

​जिस देश में विपक्ष को खत्म कर दिया जाता है या जेलों में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है, वहां लोकतंत्र का दम घुट जाता है और तानाशाही का जन्म होता है।

पिछले 70 सालों में इस देश की नींव सत्ता पक्ष और एक मजबूत, सम्मानित विपक्ष ने मिलकर रखी थी।

देश को आगे बढ़ाने के लिए अहंकार नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की उस पुरानी लोकतांत्रिक नीयत और नीति की सख्त जरूरत है।

#बदलती_राजनीति

आज  #मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से निरन्तर कमजोर होती जा रही हैं,जहां मौजूदा सरकार को आए दिन  #कर्ज में कर्ज लेना पड़ रहा हैं...
13/08/2026

आज #मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से निरन्तर कमजोर होती जा रही हैं,जहां मौजूदा सरकार को आए दिन #कर्ज में कर्ज लेना पड़ रहा हैं।अब तो #सरकार इतना भी सक्षम नहीं हैं कि #सरकारी विभाग को स्वयं चला सकें।
मध्यप्रदेश सरकार ने #रीवा और मऊगंज जिले के 8 #सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के संचालन और प्रबंधन को आउटसोर्स करने की मंजूरी दी है। #पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन अस्पतालों की #व्यवस्थाएं निजी एजेंसी संभालेगी और उसका चयन टेंडर प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।
#चयनित एजेंसी को पांच साल तक अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी।रीवा जिले के #चाकघाट,गंगेव,गुढ़, #रायपुर कर्चुलियान,रीठी और #गोविंदगढ़ तथा मऊगंज जिले के हनुमना और नईगढ़ी CHC इस व्यवस्था में शामिल हैं।इन दोनों जिलों के कुल 8 सामुदायिक #स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया है।
सरकार के अनुसार #निजी एजेंसी अस्पताल के प्रशासनिक #संचालन,हाउसकीपिंग,सुरक्षा,साफ_सफाई और रखरखाव जैसी व्यवस्थाएं संभालेगी,जबकि जरूरी सरकारी दवाएं और #टीके सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।30 बेड वाले #सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए कुल 41 कर्मचारियों का मानव संसाधन निर्धारित किया गया है,जिसमें 10 डॉक्टर,10 नर्स सहित विशेषज्ञ #चिकित्सक,मेडिकल #अधिकारी,दंत चिकित्सक,फार्मासिस्ट,रेडियोग्राफर,लैब #टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारी शामिल होंगे।
अस्पताल की सुरक्षा के लिए #तीन शिफ्ट में सुरक्षा कर्मचारियों और #सफाई व्यवस्था के लिए अलग #कर्मचारियों की व्यवस्था भी की जाएगी।सरकार का कहना है कि #आउटसोर्स व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि मरीजों को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं बंद हो जाएंगी। ,IPD और ऑपरेशन के लिए जरूरी दवाएं तथा अन्य आवश्यक मेडिकल सामग्री सरकार #उपलब्ध कराएगी।इस फैसले का उद्देश्य #अस्पतालों की व्यवस्थाओं को बेहतर करना,मरीजों को समय पर #स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और #सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
#मध्यप्रदेशबेहाल

Address

Krishna Palace Jawa Chilla Road Kuthila
Rewa
406223

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Suraj Singh सूरज सिंह रीवा posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Suraj Singh सूरज सिंह रीवा:

Shortcuts

Share