04/12/2020
खाना बाट कर अभी अभी घर आना हुआ ।आज सोयाबीन आलू और रोटी का प्रबंध था। वहीं रोज की तरह किसी का दुख सुना किसी की बीमारियों का पता चला कोई ठंड होने के चलते चाय मांग रहा था या उसके लिए पैसे तो कोई स्वेटर कम्बल की मांग करता दिखा।हम करना तो सब कुछ चाहते है पर एक सरकारी कार्मिक एक सीमित तनख्वाह पता है ओर अन्य कोई आय का जरिया नहीं होता है तो वहा पर कदम पीछे खींचने पड़ते है परन्तु फिर भी अपनी हद से बेहद बाहर जाकर मै ओर हमारी टीम के अन्य सदस्य मदद करते है । बहुत बड़ी जिम्मेदारी लेना ओर उसे निभाना आसान काम नहीं आज पचवा दिन हो गया। लेकिन 3 दिन से कोई जन सहयोग नहीं मिल पा रहा है इसके लिए हम किसी को कुछ नहीं कह सकते सबकी अपनी अपनी मजबूरी हो सकती है।लेकिन बिना जन सहयोग कुछ भी बड़ा कर पाना शायद हम जैसे सीमित आय वाले लोगों के लिए बहुत दिनों तक संभव नहीं। हम अपने समय, तन ,मन ओर धन सब से गरीबों की सेवा कर रहे है ओर करते रहेंगे भले ही किसी भी रूप में करे। मै हमारी टीम के सभी मेरे नौजवान साथियों ओर दान दाताओं को उनके साथ के लिए जितना धन्यवाद कहूं कम होगा।
हमको ऊर्जा मिलती है उस गरीब बूढ़े आदमी के इन शब्दो से की
"साहब आप हम जैसों की सेवा करते रहो उपर वाला आप लोगों की करेगा"
जय हिन्द जय इंसानियत