I Support Rashtriya Swayamsevak Sangh : RSS - Sonepat

I Support Rashtriya Swayamsevak Sangh : RSS - Sonepat The ideal of the Sangh is to carry the nation to the pinnacle of glory, through organizing the entir Uninhibited joy fills the air.

To Know the RSS come to Shakha:
A saffron flag (called the Bhagawa Dhwaj) flutters in the midst of an open playground. Youths and boys of all ages engage in varieties of indigenous games. There are exercises, Suryanamaskar, sometimes training in skillfully wielding the 'Danda'. All activities arc totally disciplined. The physical-fitness programmes are followed by group singing of patriotic songs.

Also forming part of the routine is exposition and discussion of national events and problems. The day's activity culminates in the participants' assembling in orderly rows in front of the flag at a single whistle of the group leader, and reverentially reciting the prayer "Namaste Sada Vatsale Matrubhoome" (My salutation to you, loving Motherland). The prayer verses, even as the group leader's various commands are all in Samskrit. The prayer concludes with a heart-felt utterance of the inspiring incantation "Bharatmata Ki Jai". This, in outline, is the Shakha of RSS. The participants are the 'Sangh Swayamsevaks'. The Shakha is the most effective and time-tested instrument for the moulding of men on patriotic lines - outreaching by far its physical dimension. The Shakha process is further strengthened by graded training-camps celled 'Sangha Shiksha Varga' at provincial and all-Bharat level, at regular intervals. The Sangh has popularised the observance of six national festivals of social significance: Varsha Pratipada or Hindu New Year; Hindu Samrajya Dinotsav on Jyeshtha Shuddha Trayodashi, commemorating the coronation of Chatrapati Shivaji; Gurupooja on Ashadha Poornima; Raksha Bandhan on Shravana Poornima; Vijayadashami on Ashwayuja Shuddha Dashami; and Makara Sankranti.

19/05/2021

अखंड भारत के प्रणेता , गांधी वध करने वाले
महान स्वतंत्रता सेनानी नाथूराम गोडसे जी की आज जन्मजयंती है
ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं बारम्बार नमनः करता हूँ
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हुतात्मा को शत शत नमनः

06/04/2020
17/02/2016
देशद्रोहियों को बता दो कि देशभक्त क्या क्या कर सकतें हैं .... आओ शुरुआत करें इनका बहिष्कार करके
07/08/2015

देशद्रोहियों को बता दो कि देशभक्त क्या क्या कर सकतें हैं .... आओ शुरुआत करें इनका बहिष्कार करके

एक ओर बकवास न्यूज़ कल से फेसबुक पर कुछ लोग पोस्ट कर रहे है जिस मे लिखा है कि टॉप नाम की कंपनी मुस्लिम को नौकरी नही देती| ...
23/05/2015

एक ओर बकवास न्यूज़ कल से फेसबुक पर कुछ लोग पोस्ट कर रहे है जिस मे लिखा है कि टॉप नाम की कंपनी मुस्लिम को नौकरी नही देती| मैं भी मानता हूँ कि भारत जैसे देश मे ऐसा नही होना चाहिए परंतु लोग

- उस समय क्यू चुप थे जब एक गाँव के बाहर बोर्ड लगा दिया जाता है कि कुत्ते और हिन्दू गाँव से दूर रहे।- http://www.dailypioneer.com/todays-newspaper/fatwas-ban-outsiders-entry-into-rameswaram-villages.html

- उस समय क्यू चुप रहते है जब नोएडा का बिल्डर बोलता है कि हम सिर्फ मुस्लिम को घर देंगे - http://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/Muslims-only-apartments-coming-up-in-Greater-Noida/articleshow/41896330.cms

- उस समय क्यू चुप रहते है जब बंगाल मे सिर्फ मुस्लिम लोगो के लिए अस्पताल बनाया जाता है - http://www.organiser.org/Encyc/2012/9/11/-b-Hospital-too-for-Muslims-only--b-.aspx

- उस समय क्यू चुप रहते है जब नौकरी मे आरक्षण बंगाल मे सिर्फ मुस्लिम को दी जाती है| http://timesofindia.indiatimes.com/india/West-Bengal-announces-reservation-for-Muslims-in-govt-jobs/articleshow/5548428.cms

- उस समय क्यू चुप रहते है जब बोर्ड के एक्जाम शुक्रवार होने की बजे से हटा दिया जाता है| - http://timesofindia.indiatimes.com/city/kochi/Kerala-Friday-prayers-shouldnt-be-affected-due-to-exams/articleshow/18519474.cms

ओह मैं तो भूल गया हिन्दू लोगो को गाली देने से तो सेकुलरिज़्म मजबूत होता है|

🚩सत्यम शिवम सुंदरम🚩

Daily Pioneer: Leading News paper

30/03/2015

संघ का कार्यकर्ता राष्ट्र के प्रति निष्ठावान : बजरंग लाल गुप्त Posted by: admin Posted date: March 27, 2015 In: चित्र दीर्घा, बैनर स्लाइडर, शीर्ष क्षैतिज स्क्रॉल, समाचार, हरियाणा | comment : 0 दीप प्रज्ज्वलित कर तरुणोदय शिविर का उद्घाटन करते माननीय क्संषेत्घर चालक रोहतक (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेव…

श्री गुरूजी की जयंती पर शत् शत् नमन संघ के संस्थापक परमपूजनीय डा. हेडगेवार जी ने अपने देहान्त से पूर्व जिनके समर्थ कन्धो...
19/02/2015

श्री गुरूजी की जयंती पर शत् शत् नमन
संघ के संस्थापक परमपूजनीय डा. हेडगेवार जी ने अपने देहान्त से पूर्व जिनके समर्थ कन्धों पर संघ का भार सौंपा, वे थे श्री माधवराव गोलवलकर, जिन्हें सब प्रेम से श्री गुरुजी कहकर पुकारते हैं। आज उनकी जयंती पर शत् शत् नमन |
श्रीगुरुजी का जन्म 19 फरवरी, 1906 (विजया एकादशी) को नागपुर में अपने मामा के घर हुआ था। उनके पिता श्री सदाशिव गोलवलकर उन दिनों नागपुर से 70 कि.मी. दूर रामटेक में अध्यापक थे।
माधव बचपन से ही अत्यधिक मेधावी छात्र थे। उन्होंने सभी परीक्षाएँ सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। कक्षा में हर प्रश्न का उत्तर वे सबसे पहले दे देते थे। अतः उन पर यह प्रतिबन्ध लगा दिया गया कि जब कोई अन्य छात्र उत्तर नहीं दे पायेगा, तब ही वह
बोलेंगे |
उच्च शिक्षा के लिए काशी जाने पर उनका सम्पर्क संघ से हुआ। वे नियमित रूप से शाखा पर जाने लगे। जब डा. हेडगेवार जी काशी आये, तो उनसे वार्तालाप में माधव का संघ के प्रति विश्वास और दृढ़ हो गया। एम-एस.सी. करने के बाद वे शोधकार्य के लिए मद्रास गये; पर वहाँ का मौसम अनुकूल न आने के कारण वे काशी विश्वविद्यालय में ही प्राध्यापक बन गये।
उनके मधुर व्यवहार तथा पढ़ाने की अद्भुत शैली के कारण सब उन्हें ‘गुरुजी’ कहने लगे और फिर तो यही नाम उनकी पहचान बन गया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक मालवीय जी भी उनसे बहुत प्रेम करते थे। कुछ समय काशी रहकर वे नागपुर आ गये और कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन दिनों उनका सम्पर्क रामकृष्ण मिशन से भी हुआ और वे एक दिन चुपचाप बंगाल के सारगाछी आश्रम चले गये। वहाँ उन्होंने विवेकानन्द के गुरुभाई स्वामी अखंडानन्द जी से दीक्षा ली।
स्वामी जी के देहान्त के बाद वे नागपुर लौट आये तथा फिर पूरी शक्ति से संघ कार्य में लग गये। उनकी योग्यता देखकर डा. हेडगेवार जी ने उन्हें 1939 में सरकार्यवाह का दायित्व दिया। अब पूरे देश में उनका प्रवास होने लगा। 21 जून, 1940 को डा. हेडगेवार के देहान्त के बाद श्री गुरुजी सरसंघचालक बने। उन्होंने संघ कार्य को गति देने के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी।
1947 में देश आजाद हुआ; पर उसे विभाजन का दंश भी झेलना पड़ा। 1948 में गांधी जी हत्या का झूठा आरोप लगाकर संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। श्री गुरुजी को जेल में डाल दिया गया; पर उन्होंने धैर्य से सब समस्याओं को झेला और संघ तथा देश को सही दिशा दी। इससे सब ओर उनकी ख्याति फैल गयी। संघ-कार्य भी देश के हर जिले में पहुँच गया।
श्री गुरुजी का धर्मग्रन्थों एवं हिन्दू दर्शन पर इतना अधिकार था कि एक बार शंकराचार्य पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया गया था; पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक उसे अस्वीकार कर दिया। 1970 में वे कैंसर से पीड़ित हो गये। शल्य चिकित्सा से कुछ लाभ तो हुआ; पर पूरी तरह नहीं। इसके बाद भी वे प्रवास करते रहे; पर शरीर का अपना कुछ धर्म होता है। उसे निभाते हुए श्री गुरुजी ने 5 जून, 1973 को रात्रि में शरीर छोड़ दिया।
श्रीगुरुजी, अपनी विचार शक्ति व कार्यशक्ति से विभिन्न क्षेत्रों एवम् संघटनाओं के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत बनें। श्रीगुरुजी का जीवन अलौकिक था, राष्ट्रजीवन के विभिन्न पहलुओं पर उन्होंने मूलभुत एवम् क्रियाशील मार्गदर्शन किया। “सचमुच ही श्रीगुरूजी का जीवन ऋषि-समान था।

आप सब आमंत्रित है जी
14/02/2015

आप सब आमंत्रित है जी

तरुणोदय सम्बन्धी पूर्ण सुचना27 मार्च  2015 दोपहर 12.00 बजे से 29 मार्च 2015 अपराह्न 2.00 तकबाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, द...
19/01/2015

तरुणोदय सम्बन्धी पूर्ण सुचना

27 मार्च 2015 दोपहर 12.00 बजे से 29 मार्च 2015 अपराह्न 2.00 तक
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, दिल्ली रोड़, रोहतक
12वीं, कॉलेज विद्यार्थी(ITI, DIPLOMA भी) एवं युवा प्राध्यापक
चार व्यायाम, सूर्यनमस्कार, गीत-संगठन गढ़े चलो(कंठस्थ) - इनका अभ्यास हो
शुल्क 200 रुपये, वेष खाकी नेकर सफेद कमीज

Discipline is the foundation of our organisation. When 60,000 RSS Swayamsevaks gather this is how it looks!!! The aerial...
13/01/2015

Discipline is the foundation of our organisation. When 60,000 RSS Swayamsevaks gather this is how it looks!!! The aerial view of Devgiri Prant Mahasangam of Swayamsevaks.

ऊधम सिंह भारत की आज़ादी की लड़ाई में अहम योगदान करने वाले महान क्रान्तिकारी थे। अमर शहीद ऊधम सिंह ने 13 अप्रैल, 1919 ई. ...
26/12/2014

ऊधम सिंह भारत की आज़ादी की लड़ाई में अहम योगदान करने वाले महान क्रान्तिकारी थे। अमर शहीद ऊधम सिंह ने 13 अप्रैल, 1919 ई. को पंजाब में हुए भीषण जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के उत्तरदायी माइकल ओ'डायर की लंदन में गोली मारकर हत्या करके निर्दोष भारतीय लोगों की मौत का बदला लिया था।

जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड ने ऊधमसिंह को हिलाकर रख दिया था और उन्होंने अंग्रेज़ों से इसका बदला लेने की ठान ली थी । सन् 1934 में ऊधमसिंह लंदन गये और वहाँ 9 एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड़ पर रहने लगे। वहाँ उन्होंने यात्रा के उद्देश्य से एक कार ख़रीदी और अपना मिशन पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवाल्वर भी ख़रीद ली। ऊधमसिंह को अपने सैकड़ों भाई बहनों की मौत का बदला लेने का मौक़ा 1940 में मिला। जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को 'रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी' की लंदन के 'कॉक्सटन हॉल' में बैठक थी जहाँ माइकल ओ'डायर भी वक्ताओं में से एक था। बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए ऊधमसिंह ने माइकल ओ'डायर पर गोलियाँ चला दीं। दो गोलियाँ डायर को लगीं, जिससे उसकी तुरन्त मौत हो गई। ऊधमसिंह ने वहाँ से भागने की कोशिश नहीं की और स्वयं को गिरफ़्तार करा दिया। उन पर मुक़दमा चला। अपने बयान में ऊधमसिंह ने कहा- 'मैंने डायर को मारा, क्योंकि वह इसी के लायक़ था। मैंने ब्रिटिश राज्य में अपने देशवासियों की दुर्दशा देखी है। मेरा कर्तव्य था कि मैं देश के लिए कुछ करूं। मुझे मरने का डर नहीं है। देश के लिए कुछ करके जवानी में मरना चाहिए।'

4 जून 1940 को ऊधमसिंह को डायर की हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें 'पेंटनविले जेल' में फाँसी दे दी गयी। इस प्रकार यह क्रांतिकारी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में अमर हो गया। 31 जुलाई 1974 को ब्रिटेन ने उनके अवशेष भारत को सौंप दिए थे। ऊधमसिंह की अस्थियाँ सम्मान सहित भारत लायी गईं। उनके गाँव में उनकी समाधि बनी हुई है।

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