29/01/2026
जिला वरीयता — सुप्रीम कोर्ट | सुनवाई अपडेट
आज माननीय सुप्रीम कोर्ट, कोर्ट नं. 3 में आइटम नं. 105 पर जिला वरीयता से संबंधित मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा 12,460 शिक्षक भर्ती में अब तक भरी गई सीटों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके बाद बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली, 1981 के नियम 14 (जिला वरीयता) की वैधानिकता पर विस्तार से बहस हुई।
बहस आगे बढ़ते हुए याची लाभ (Petitioner Benefit) एवं शेष रिक्त सीटों पर भी अपीलकर्ताओं द्वारा तर्क रखे गए।
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि:
सभी अपीलकर्ताओं एवं I.A. दाखिल करने वालों की
जिला-स्तरीय सूची तैयार कर
अगली सुनवाई पर राज्य सरकार उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
मामले को 4 सप्ताह बाद पुनः सूचीबद्ध किया गया है।
यह रही मुकदमे की वास्तविक स्थिति — अब आते हैं उन लोगों पर,
जो इस पूरे संघर्ष में सिर्फ़ भ्रम फैलाने और दूसरों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं।
जिला वरीयता का यह मुकदमा उन्हीं लोगों की वजह से खड़ा हुआ,
जो खुद को हर मंच पर “पाक-साफ़” और दूसरों को दोषी साबित करने में लगे रहते हैं।
कभी कहा गया कि यह मामला सिर्फ़ 12,460 भर्ती का है,
15,000 और 16,448 से इसका कोई लेना-देना नहीं।
लेकिन सच्चाई यह है कि कुछ लोग ऐसे हैं
जिनका न 15,000 भर्ती के इन्क्रीमेंट मुद्दे से कोई सरोकार है,
न 12,460 के मुकदमे से,
फिर भी हर जगह घुसकर खुद को समाजसेवी साबित करने में लगे रहते हैं।
आज यह झूठ भी फैलाया गया कि
15,000 और 16,448 भर्ती के पैरोकार न तो कोर्ट में थे
और न ही उनका कोई अधिवक्ता मौजूद था।
जबकि सच्चाई यह है कि
पहले ही स्पष्ट किया जा चुका था
कि इस सुनवाई में कोई वरिष्ठ अधिवक्ता नहीं किया जाएगा
और हमारे पूर्व अधिवक्ता श्री आर. के. सिंह
कोर्ट में उपस्थित रहेंगे —
जो आज स्पष्ट रूप से डाइस पर मौजूद थे,
और यह बात जारी किए गए वीडियो में सबके सामने है।
सच यह है कि
कुछ लोगों की आदत बन चुकी है
हर मुद्दे में घुसपैठ करने की,
हर संघर्ष में खुद को नायक दिखाने की,
और हर जगह भ्रम फैलाने की।
लेकिन अब बातें बयान से नहीं,
न्यायालय के रिकॉर्ड से तय होंगी।
बाक़ी सच क्या है —
वह आज की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के वीडियो में
सबके सामने मौजूद है।
— आवेश विक्रम सिंह