27/08/2026
युवाओं और GenZ में सत्ता के प्रति गहरा आक्रोश है। इसका प्रमुख कारण है कि पढ़ लिखकर भी सबका भविष्य अंधकार में है।
हमारे यहां कुल रोजगार का 4% भी सरकारी नौकरी नहीं है। जो हैं उनमें 49% तो ठेके पर है। मतलब दो वक्त की रोटी के लिए शोषण और अन्याय का शिकार होने को विवश।
ऊपर से केंद्र सरकार के अधीन जो नौकरियां हैं उनमें भी रिक्तियां दुगुनी हो गई हैं। कुछ वर्ष पहले तक जो 4.2 लाख पद रिक्त थे, वो अब 8.2 लाख हो गई हैं।
यानी केंद्र सरकार चाहे तो 24 घंटे के अंदर विज्ञापन निकाल कर 8.2 लाख परिवारों का भला कर सकती है। न कोई नियम कानून बनाने की जरूरत है, न सदन में चर्चा की। एक झटके में लाखों परिवारों की किस्मत चमक सकती है। लेकिन मोदी जी ऐसा करेंगे नहीं। क्योंकि शिक्षा परीक्षा नौकरी रोजगार जैसे मुद्दे इनकी प्राथमिकता में हैं ही नहीं।
इसलिए देशभर में छात्र आंदोलित हैं। आने वाले समय में इसी विषय पर स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा आंदोलन होने वाला है।
अगले कुछ दशक की राजनीति अब युवाओं के इसी आंदोलन से तय होंगी। कमर कस लीजिए। समर शेष है।