23/07/2025
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गांव की #सरकार: सेवा का संकल्प, ना कि सत्ता का प्रदर्शन
#गांव-गांव में #लोकतंत्र का उत्सव अपनी पूरी गरिमा के साथ प्रारंभ हो चुका है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया चल रही है और यह समय है गांव की बागडोर उन हाथों में सौंपने का, जो सेवा, सौजन्य और संवेदना के प्रतीक हों।
यह #चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व के चरित्र और दृष्टिकोण की परीक्षा है।
इस बार मतदाताओं की जिम्मेदारी सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करने तक है कि गांव का भविष्य किस सोच, स्वभाव और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा।
अतीत में यह देखा गया है कि कुछ #प्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अपनी भूमिका को गलत समझ बैठते हैं। वे जनप्रतिनिधि के स्थान पर स्वयं को ‘शासक’ मानने लगते हैं, ग्रामीणों से दूरी बना लेते हैं, और जनसंवाद की बजाय आदेशात्मक व्यवहार करने लगते हैं।
ऐसी प्रवृत्तियाँ पंचायत की आत्मा को ठेस पहुंचाती हैं।
एक सरपंच या पंचायत सदस्य का कर्तव्य शासन करना नहीं, सेवा करना है। वह एक माध्यम होता है, एक पुल, जो सरकार की योजनाओं और गांव की जरूरतों के बीच सजग संवाद स्थापित करता है।
मतदाता क्या देखें?
इस बार वोट देने से पहले यह देखना जरूरी है—
क्या प्रत्याशी सिर्फ चुनावी मौसम का पक्षी है या हमेशा समाज के साथ खड़ा रहा है?
क्या उसमें विनम्रता और लोगों से संवाद की सहजता है?
क्या वह सबके लिए समान रूप से सोचने की नीयत रखता है?
क्या उसकी सोच शिक्षा, स्वच्छता, पानी, स्वास्थ्य और पलायन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट है?
आपका #वोट, गांव की दिशा
एक वोट केवल जीत-हार नहीं तय करता, बल्कि गांव की दशा और दिशा को भी आकार देता है। इसलिए इस बार मतदान करते समय यह सुनिश्चित करें कि जिसे चुना जा रहा है, वह केवल जीत के काबिल न हो, बल्कि उस जीत को संभालने की विनम्रता भी रखता हो।
पंचायत सत्ता का नहीं, सेवा का मंच है।
अहंकार नहीं, जवाबदेही का स्थान है।
इस चुनाव में हर मतदाता की भूमिका निर्णायक है।
विचार करें, समझें और ऐसा प्रतिनिधि चुनें जो गांव को आत्मीयता से संभाले, न कि दूरी से चलाए।
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#पंचायत