25/03/2026
आदमी के वजूद में दो सांसें चलती हैं एक सांस अंदर आती है और दूसरी बहार निकलती है!
अंदर जाने वाली सांस पर अल्लाह ने एक फ़रिश्ता मुकर्रर किया है, और
फ़रिश्ता अल्लाह से अर्ज करता है की अल्लाह इसकी सांस को अंदर से ही जब्त करलु क्या ?
अल्लाह ताला के हुक्म से फरिश्ता सांस छोड़ देता है, और वही सांस जब वापस बहार आती है तो फरिश्ता पूछता है,
ऐ अल्लाह उसके सांसों को बाहर से जब्त करूं क्या,, अल्लाह कहता की छोड़ दो। तो फरिश्ता छोड़ देता है ,
जो सांस जिस्मे इस्मु अल्लाह की ज़ात के तसव्वर से बाहर निकलती है वो उसका लम्हा एक खास नूरी सूरत
एख्तियार करके अल्लाह की बारगाहे में
पहोच जाती है ,और एक मोती बनती है
अगर चे दोनो जहानो के तमाम आलम और दुनियां बहिश्त की तमाम दौलत जमा करली जाए ! तो भी एक् सांस की कीमत के बराबर न होगी ,
क्योंकि वो एक मोती अनमोल है,
इसीलिए तो फकीरों को अल्लाह रब्बुल इज्जत के खज़ानों का खजांची कहते हैं!
सुल्तान सुब्हानी पीर.
खाक पा- ए- सरकार लसनी पीर बीजापुरी।