23/02/2026
सालों से ICU में पड़ी C कंपनी को UGC नाम का टॉनिक क्या मिला, मानो मरी हुई राजनीति में अचानक करंट लग गया। दशकों बाद उन्हें लगा कि मोदी के कोर वोटर को नाराज करने का कोई हथियार हाथ लग गया है, लेकिन समस्या यह थी कि विरोध करें या समर्थन—क्योंकि जो पार्टी अपने अंतिम दौर में हो, उसके लिए गलत कदम आत्मदाह से कम नहीं होता। इसलिए रणनीति बनी—सीधी नहीं, छुपी हुई, गंदी और डिजिटल। फेसबुक पर भाड़े के टट्टू खरीदे गए, ब्राह्मण-ठाकुर की डीपी लगाकर लाखों अकाउंट एक्टिव हुए, जिनमें बहुत से भारत के बाहर से ऑपरेट हो रहे थे। पहला नेरेटिव चला—राजपूत आईडी से एक पोस्टर, जिसमें ब्रजभूषण, राजा भैया, टाइगर राजा जैसे नाम जोड़कर लिखा गया “सवर्ण समाज बनाम बीजेपी”, ताकि सवर्ण समाज में आग लगे, लेकिन एडिटिंग करने वाले यह भूल गए कि ब्रजभूषण का बेटा खुद UGC समिति का सदस्य था—मतलब थूकने पड़ोसी पर गए लेकिन गिरा अपने ही मुंह पर। हम लोगों की गलती यह है कि कुछ पढ़ते नहीं, इसलिए सच्चाई नहीं जान पाए। फिर बजट के बाद एक पोस्टर वायरल हुआ—“मुसलमानों को 3400 करोड़, OBC को इतना, सवर्ण को दरी”—और वही लोग इसे फैला रहे थे जो मोदी सरकार को बदनाम करना चाहते थे। अब शक यह है कि यह पोस्टर शायद मोदी सरकार के IT सेल से ही निकलवाया गया, ताकि दिखाया जा सके कि तुम्हारे खिलाफ संविधान में कितने घटिया कानून बने हैं, हम तुम्हारे लिए इतना कर रहे हैं, तुम सपोर्ट भी नहीं कर सकते और इनके विरोध में कौन सी ताकतें खड़ी हैं; लेकिन टूलकिट गैंग ने बिना दिमाग लगाए उसे वायरल कर दिया—क्योंकि इन्हें सच से क्या लेना देना, इनका काम सिर्फ दिहाड़ी मजदूरी था। हुआ यह कि जो मोदी को नुकसान पहुंचाना चाहते थे, वही इस बजट वाले पोस्टर से सबसे ज्यादा नुकसान में पड़ गए। क्योंकि आज का युवा अंधभक्त नहीं है, वह गूगल करता है, फैक्ट चेक करता है; उसने देखा कि जिन कानूनों से हिंदू समाज को जकड़ा गया, वे सभी C कंपनी की देन थे, और संविधान के अंदर हिंदुओं को आठवें दर्जे का नागरिक बनाने वाली भी यही कंपनी थी। जो बात पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, अश्वनी उपाध्याय और कुछ मेरे जैसे छोटे-मोटे सामाजिक कार्यकर्ता सालों से चिल्ला रहे थे और हिंदू समाज सुन नहीं रहा था, वह अचानक हिंदू समाज के दिमाग में बैठ गई—कि पहले सिस्टम हमारे कितने खिलाफ था; अब वह एक-एक चीज सर्च कर रहा है और उसे भरोसा हो गया है कि जिस तरीके से धारा 370 जैसे बड़े फैसले लिए गए, उसी तरह इतिहास से लेकर संविधान तक रची गई साजिश को तोड़ने वाली एक ही राजनीतिक ताकत है, और वो मोदी-शाह-योगी की तिकड़ी है। अब हिंदू समाज सिर्फ पेट्रोल और टमाटर नहीं देखता, वह कानून और नीति भी देखता है; उसके खिलाफ संविधान में क्या-क्या पाप किए गए, यह उसके दिमाग से निकलने वाला नहीं है। जो माहौल 11 साल में नहीं बन पाया, वह UGC विवाद ने बना दिया—यानी C कंपनी के चमचों ने खुद उसकी कब्र खोद दी। अब सरकार पर इतना दबाव बनेगा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय, सच्चर आयोग, मदरसा बोर्ड जैसी संरचनाओं पर भी सरकार आसानी से हाथ साफ करेगी और C कंपनी खुलकर विरोध भी नहीं कर पाएगी—क्योंकि उन्हें पता है कि हिंदू समाज जाग चुका है और हिंदुओं के वोट के बिना सरकार नहीं बनेगी, और अगर विरोध नहीं करेंगे तो अल्पसंख्यक वोट चला जाएगा; यानी जो मजा ले रहे थे कि मोदी के आगे कुआँ पीछे खाई है, वही स्थिति अब उनकी होने वाली है। और AI समिट में किया गया नंगा नाच उसी बौखलाहट का नतीजा है, क्योंकि आने वाले समय में बड़े-बड़े कानून खत्म होंगे, UGC तो जाएगा ही और वह अपने साथ बहुत कुछ समेट कर ले जाएगा जो इतिहास में पाप हुआ है। और C कंपनी ? #नंगे_को_खोना_क्या 😂 लेकिन कुछ भी हो, 2027 से पहले नज़ारा देखने लायक होगा—वैसे मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं, लेकिन मेरा अनुमान यही है।
ध्यान से पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙏
@सनातनि अंजलि यादव