18/08/2026
JSSC CGL: सिस्टम की गलती की सज़ा छात्रों को क्यों?
अगर JSSC CGL परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, पेपर लीक हुआ है या परीक्षा कराने वाली एजेंसी की व्यवस्था में भ्रष्टाचार था, तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन एक सवाल छात्रों की तरफ से भी पूछा जाना चाहिए—
जिस छात्र ने मेहनत करके परीक्षा दी, चयनित हुआ, नियुक्ति पत्र पाया और सरकारी नौकरी ज्वाइन कर ली… उसका अपराध क्या है?
क्या हर चयनित उम्मीदवार ने पेपर खरीदा था?
क्या हर कर्मचारी ने नकल की थी?
क्या 1,975 के आसपास नियुक्त हुए सभी लोगों के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई सबूत है?
अगर किसी उम्मीदवार ने परीक्षा में धांधली की है, उसे चिन्हित करके नौकरी से निकालिए, कानूनी कार्रवाई कीजिए।
लेकिन अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई व्यक्तिगत सबूत नहीं है, तो सिर्फ सिस्टम की गलती के कारण उसकी नौकरी छीन लेना कितना न्यायसंगत है?
किसी ने इस नौकरी के भरोसे लोन लिया होगा।
किसी के परिवार की जिम्मेदारी होगी।
किसी ने दूसरी नौकरी छोड़ी होगी।
किसी ने वर्षों की मेहनत के बाद यह मुकाम हासिल किया होगा।
भ्रष्ट सिस्टम की कीमत ईमानदार छात्र क्यों चुकाए?
अगर परीक्षा इतनी खराब तरीके से प्रभावित हुई है कि परिणाम पर भरोसा ही नहीं किया जा सकता, तो दोबारा परीक्षा कराइए।
लेकिन तब तक उन कर्मचारियों के साथ भी न्याय होना चाहिए जो बिना किसी सिद्ध अपराध के सरकारी नौकरी में आ चुके हैं।
व्यवस्था को दंडित कीजिए, दोषियों को दंडित कीजिए—लेकिन हर छात्र को दोषी मानकर उसकी जिंदगी बर्बाद मत कीजिए।
क्योंकि—
“सिस्टम की गलती की सज़ा उस छात्र को नहीं मिलनी चाहिए, जिसने सिस्टम के नियमों का पालन किया है।”