08/03/2023
श्री हरिवंश
यदि आप भी श्री प्रेमानंद महाराज जी के सत्संग में वृंदावन जाना चाहते हैं निम्न बातों का ध्यान रखें ।
1:- श्री प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम पर परिक्रमा मार्ग होते हुए आने का समय सुबह 3:00 से 3:15 है , महाराज जी का आश्रम वृंदावन में भक्ति वेदांत हॉस्पिटल के ठीक सामने है। यदि आप जाना चाहते हैं तो गूगल मैप पर भक्ति वेदांत हॉस्पिटल वृंदावन लिखकर पहुंच सकते हैं ।
2:- सुबह का प्रवचन 4:30 बजे प्रारंभ होता है जिसके पश्चात मंगला आरती तुलसी आरती सत्संग इत्यादि कार्यक्रम लगभग 9:30 बजे तक चलते हैं ।
3:- यदि आप महाराज जी के केवल दर्शन करना चाहते हैं अब आप परिक्रमा मार्ग अथवा भक्ति वेदांत हॉस्पिटल वाले मार्ग पर 2:30 रात्रि में पहुंच जाएं आपको दर्शन हो जाएंगे ।
4:- यदि आप महाराज जी का सत्संग सुनना चाहते हैं वह भी साक्षात सामने बैठकर ऐसी स्थिति में आपके सामने दो विकल्प हैं
एक- सुबह का सत्संग समाप्त होने अर्थात लगभग 9:30 बजे सुबह के बाद यह बताया जाता है की टोकन कितने बजे मिलेंगे उस समय आप वहां पहुंच जाइए और टोकन प्राप्त कर लीजिए जिससे आपका स्थान रात्रि हेतु निश्चित हो जाएगा । (टोकन पूर्णतया निशुल्क है इसमें किसी प्रकार का कोई रुपया पैसा नहीं लिया जाता है।)
दूसरा:- आप रात्रि में लगभग 9:00 बजे भक्ति वेदांत हॉस्पिटल के सामने पहुंच जाइए वहां लाइन लगती है उस लाइन में आप खड़े हो जाइए लगभग लाइन में लगे 50 से 60 पुरुष आश्रम में अंदर चले जाते हैं यदि आप महिला हैं ऐसी स्थिति में यदि आप टोकन नहीं भी लेती हैं और आप लगभग रात्रि 1:30 से 2:00 बजे के आसपास पहुंच जाती हैं और लाइन में लगभग 100-150 वें नंबर पर भी है तब भी आपके प्रवेश करने की संभावना प्रबल रहेगी ।
5 :- शेष लोग जो लाइन में लगे रह जाते हैं और आश्रम में प्रवेश नहीं कर पाते हैं उन्हें ससम्मान आश्रम के बाहर स्क्रीन पर महाराज जी का प्रवचन व सत्संग सुनाया व दिखाया जाता है ।
6:- प्रवचन लगभग 5:30 बजे समाप्त होता है इसमें यह भी संभावना बनती है कि जो लोग बाहर रह गए हैं उनमें से कुछ लोग अंदर जा सके क्योंकि बहुत से लोग प्रवचन के बाद जाने लगते हैं ।
7:- यह भी सुनिश्चित करें कि जब आप जाएं तब पूर्ण समय बैठे क्योंकि बीच में से उठने की अनुमति विशेष रूप में ही दी जाती है ।
नोट :- उक्त जानकारी आपकी सुविधा के लिए है बताए गए हैं , बताया गया समय एवं व्यवस्था वर्तमान में प्रचलित है तथा संस्था इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने के लिए स्वतंत्र है ।