11/16/2022
*मुसलमानों की सोशल इंजीनियरिंग - संघ का मुसलमानों पर अब तक का सबसे खतरनाक हमला*
संघ ने मुस्लिम सोसाइटी में सोशल इंजीनियरिंग के लिए कई टूल डेवलप् कर लिए हैं जो बहुत ही धारदार हैं ये टूल सरकारी भी हैं और ग़ैर सरकारी भी । आरएसएस ने मुस्लिम 2002 राष्ट्रीय मुस्लिम मंच बनाया ।इस वक्त उसके सरसंघचालक के सी सुदर्शन थे ।इसका बुनियादी मक़सद मुसलमानों से डायलॉग बताया गया लेकिन कभी भी यह मोनोलॉग से आगे ना बढ़ सका इसका दूसरा मकसद मुसलमानों में "संघ के राष्ट्रवाद" की बेसिस पर राष्ट्रवादी मुसलमान तैयार करना था लेकिन दर हक़ीक़त मुस्लिम राष्ट्रीय मंच पहले दिन से ही मुस्लिम कमयुनिटी में सोशल इंजीनियरिंग का काम अंजाम दे रहा है इसके दो सेंटर है एक दिल्ली दूसरा लखनऊ जहां इसके प्रोग्राम बाक़ायदगी से होते रहते हैं जिनमें सूफी , सज्जादानशीन, शिया - सुन्नी उलेमा , बरेलवी , देवबंदी , क़ासमी नदवी उलेमा शरीक होते रहे हैं ।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का मुस्लिम सोसाइटी में pe*******on बहुत गहरा है जो ऊपर से नीचे तक है इनका कम्युनिटी में पब्लिक रिलेशन भी बहुत स्ट्रॉन्ग है एम आर एम ने कम्युनिटी में जगह-जगह अपने स्टीरियोटाइप तैयार कर लिए
अभी तक मुस्लिम सोसाइटी में संघ की सोशल इंजीनियरिंग ऊपर की सतह पर थी लेकिन अब यह ग्राउंड पर आ गई है उत्तर प्रदेश में बीजेपी का बुनकर प्रकोष्ठ बनाना । इसी का हिस्सा है राइनी , कुरैशी और मंसूरी बिरादरीयो के लिए भी इसी तरह का इंतेज़ाम ज़ेरे ग़ोर है । दानिश आजाद अंसारी को योगी सरकार में मिनिस्टर बनाना इसी क़वायद का हिस्सा है
16 अक्टूबर को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की विधानसभा से महज़ सो मीटर की दूरी पर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से "पसमांदा बुद्धिजीवी सम्मेलन" रखा गया जिसमें उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक चीफ गेस्ट थे यह एक हाईप्रोफाइल पॉलिटिकल प्रोग्राम था जिसमें बीजेपी के पसमांदा मुस्लिम लीडर और पसमांदा मुसलमान शरीक हुए ।
उत्तर प्रदेश जहां सबसे ज्यादा मुसलमान बसते हैं वहां संघ भाजपा के "सोशल इंजीनियरिंग प्रोग्राम" का हदफ़ मुसलमान हैं। कहा जाता है कि मुसलमानों की कुल तादाद का 80% पसमांदा मुसलमान है कश्मीर में बकरवाल और गूजर मुसलमान क़बीलो के दरमियान भी ये प्रोग्राम जारी है इसी सिलसिले में एक गूजर मुसलमान गुलाम अली खटाना को बीजेपी ने राज्यसभा में भेजा है। बीजेपी की पिछले दिनों हैदराबाद में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम मोदी ने पसमांदा मुसलमानों को क़रीब लाने की बात कही ।
यही अस्सी फ़ीसदी मुसलमान स़घ के निशाने पर हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड भी इसी एजेंडे का हिस्सा है संघ के थिंक टैंक मुसलमानों की "फॉल्ट लाइन" पर मुसलसल स्टडी और रिसर्च का काम कर रहे हैं ये थिंक टैंक मुस्लिम समाज से ऐसे लोगों को ढूंढ -ढूंढ कर ला रहे हैं जो मुसलमानों की सोशल इंजीनियरिंग में उनका mole बनकर इस काम में उनके मददगार बनें । इनमें उलेमा भी हैं और दानिशवर भी । संघ की मुसलमानों से राबता मुहिम का एक मसक़सद ये भी है ।
बायो वर्ड में जो काम जेनेटिक इंजीनियरिंग करती है सोसाइटी में वही काम सोशल इंजीनियरिंग करती है संघ मुसलमानों में सोशली इंजीनियरड मुसलमानों की एक नस्ल तैयार करना चाहता है
मुसलमानों की नूरी क़यादत इन कारवाइयों से बेख़बर नहीं है बल्कि वोह संघ से डायरेक्ट , इन-डायरेक्ट राब्ते में है लेकिन अपनी अकूत दौलत और मदरसों की बादशाहत को बचाने के लिए इन्होंने सौदेबाजी़ कर ली है ये क़यादत अलामती तौर पर तब तक रहेगी जब तक संघ की तैयार करदा मुस्लिम क़यादत मंज़र पर नहीं आ जाती । संघ के माउथ पीस आर्गनाइज़र मैगज़ीन मैं मुस्तक़िल कॉलम लिखने वाले जर्नलिस्ट राजीव तुली भी इसका जिक्र कर चुके हैं हाल ही में bbc हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा "मुज़लमानों में अगर कोई लीडरशिप नहीं है तो वो खड़ी करनी होगी "।
देखना ये है कि मुसलमान अपने समाजी ताने-बाने को किस तरह से बचा कर रखते हैं और संघ की सोशल इंजीनियरिंग पर क्या कोई किकबैक देंगे ।