07/18/2026
🚨 देश की सबसे संवेदनशील परमाणु परियोजना से जुड़ा डेटा डार्क वेब तक कैसे पहुंच गया?
क्या यही है देश की साइबर सुरक्षा?
• लगभग 19,000 फाइलें (14.3 GB) डार्क वेब पर पहुंच गईं।
• वेंटिलेशन, कूलिंग सिस्टम, सप्लायर लिस्ट और इंस्पेक्शन रिकॉर्ड जैसी जानकारी लीक होने की खबर।
• दावा किया जा रहा है कि सेंधमारी एक थर्ड-पार्टी सर्वर के जरिए हुई।
सरकार कह रही है कि मुख्य रिएक्टर और न्यूक्लियर सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है।
लेकिन देश सवाल पूछ रहा है—
❓ इतनी संवेदनशील जानकारी थर्ड-पार्टी सर्वर पर क्यों थी?
❓ अगर आज यह डेटा लीक हो सकता है, तो कल और क्या सुरक्षित रहेगा?
❓ देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
❓ क्या इस घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होगी?
❓ दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई है?
यह राजनीति का नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबदेही का मुद्दा है।
देश जानना चाहता है कि इतनी बड़ी चूक आखिर हुई कैसे और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
स्रोत:
• Reuters
• The Hindu
• NPCIL के आधिकारिक बयान
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