23/09/2021
ना तोड़ किसी के आशियाने को, बहुत वक्त लगता है उसे बनाने में…
मैं इस विषय पर राजनीति नहीं करना चाहता हूँ और ना ही यह राजनीति का विषय है. लेकिन अब मैं सरकार के नुमाइंदों की सफाई देख रहा हूँ तो मन में कई तरह के सवाल आ रहे है. अभी कुछ दिनों पहले भी इस प्रकरण में हाट के गाँववासी आत्मदाह की धमकी दे चुके थे, 20 अगस्त को लोगों ने आत्मदाह का प्रयास भी किया, तब से अब तक लंबा समय गुजरा, लेकिन सरकार के नुमाइंदों ने कोई खबर नहीं ली.. और जब हमारे अपने, अपने घरों से बेघर हो गए तो ये लोग PMO तक पहुँच गए. सवाल तो यह को आप पहले क्यूँ नहीं पहुँचे PMO? सवाल तो यह की क्या हाट गाँव के लोग आपके सम्पर्क में नहीं थे? क्या हटवाल परिवार के लोगों ने आपसे बात नहीं की ? या फिर उनकी बातों को नज़रंदाज कर दिया क्यूँकि हमेशा की तरह भाजपा को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना आता है चाहे वो खुद के कार्यकर्ता के साथ ही ये खेल खेलना पड़े, या फिर इतना घमण्ड है की हम कुछ भी करें मोदी जी के नाम पर वोट मिल ही जाएगा..
जब कल अपने साथियों से पुलिस थाने गोपेश्वर में मिला तो सबको देख कर उनसे बात करके मन को बहुत दुख हुआ. मैं हर कदम आपके साथ खड़ा हूँ. सरकार-प्रशासन के लिए किसी के घर को तोड़ना बहुत आसान होता है. लेकिन वो सिर्फ़ एक चार दीवारी नहीं होती किसी के जीवन की पूरी पूँजी होती है. अपने पुरखों की संजोयी हुई यादें होती हैं. लेकिन विकास की आँधी में यह सब बहुत कमजोर होता नज़र आता है. सही मायने में देखूँ तो विकास सिर्फ़ नाम के लिए हो रहा है. धरातल में हम उत्तराखंड के लोग बद से बदत्तर हालात में आ गये हैं। लेकिन मैं और हमारी पूरी आप पार्टी हाट गाँव के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है..