31/12/2025
धन्यवाद 2025,
गलतियों के लिए क्षमा,
और सीख के लिए नमन। 🙏🏻
साल 2025 :
यह अंतिम दिन… यह वर्ष सिर्फ़ समय का नहीं,
विचारों, प्रश्नों और सामाजिक सरोकारों का वर्ष रहा, जाने-अनजाने में यदि मेरे किसी शब्द, किसी विचार या किसी तीखे वाक्य से किसी के मन को ठेस पहुँची हो, तो मैं दिल से क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मेरा उद्देश्य कभी किसी का अपमान नहीं रहा,
बल्कि जागृति का रहा है। 2025 ने सिखाया कि सवाल जवाबों से अधिक ज़रूरी होते हैं लेकिन उनसे भी ज़रूरी है संवेदनशीलता बनाए रखना। अगर मेरे शब्दों ने कभीकिसी को आहत किया हो तो वह मेरी मंशा नहीं, मेरी सीख बने।
जाते हुए साल से मैं यह संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा हूँ कि —
नाराज़गी भले शब्दों में हो,
पर दिल हमेशा साफ़ रहे।✍️🙏🏻