03/03/2026
*उद्धर्तुं चैव संहर्तुं*
*समर्थो ब्राह्मणोत्तमः।*
*तपस्वी सत्यवादी च*
*गृहस्थो गुरुरुच्यते।।*
(शैवाचार प्रदीपिका, आगम संहिता २/१५)
अर्थात् - तपस्वी, सत्यवादी तथा गृहस्थ उत्तम ब्राह्मण ही सभी का उद्धार तथा संहार करने में समर्थ होने के कारण गुरु (श्रेष्ठ) कहा जाता है।
*🙏💐🌷मङ्गलं सुप्रभातम्🌷💐🙏*