Gurukul vidhya niketan

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08/06/2019
गुरुकुल विद्या निकेतन विदाई समारोह
20/02/2016

गुरुकुल विद्या निकेतन विदाई समारोह

~~ त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ~~जीवनदायनि-मोक्षदायनि माँ नर्मदा जी आप सभी कीमनोकामनाओ को पूर्ण करेंगी,इसी आशा और...
14/02/2016

~~ त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ~~
जीवनदायनि-मोक्षदायनि माँ नर्मदा जी आप सभी की
मनोकामनाओ को पूर्ण करेंगी
,इसी आशा और विश्वास के
साथ आप सभी को नर्मदा जयंती की बहुत-बहुत
शुभकामनाये।

11/01/2016
18/10/2015
गुमनामी के अंधेरे में था पहचान बना दियादुनिया के गम से मुझे अनजान बना दियाउनकी ऐसी कृपा हुई गुरु ने मुझे एक अच्छाइंसान ब...
04/09/2015

गुमनामी के अंधेरे में था
पहचान बना दिया
दुनिया के गम से मुझे अनजान बना दिया
उनकी ऐसी कृपा हुई
गुरु ने मुझे एक अच्छाइंसान बना दिया

आज भारत के वैज्ञानिकों ने महत्वाकांक्षी मिसाईल निर्भया का सफल परीक्षण किया | न्यूज में देखा कि इसके प्रक्षेपण से पहले वै...
18/10/2014

आज भारत के वैज्ञानिकों ने महत्वाकांक्षी मिसाईल निर्भया का सफल परीक्षण किया | न्यूज में देखा कि इसके प्रक्षेपण से पहले वैज्ञानिक पंडितों से पूजा करवा रहे थे |अब सवाल यह है कि इन वैज्ञानिकों को विज्ञान पर विश्वास नहीं है या अपनी योग्यता पर ?कितनी अजीब बात है कि जो नास्तिक लोग विज्ञान का क ख भी नहीं जानते होते वो विज्ञान का हवाला देकर ईश्वर की सत्ता को नकारने की कोशिश करते हैं और जो लोग विज्ञान के शिखर पर पहुंचे हुए हैं वो विज्ञान को एक किनारे रख अपना कोई महत्वपूर्ण काम बिना भगवान की पूजा के शुरू नहीं करते |तो असली ढोंगी कौन हुआ भगवान को मानने वाले ये महान वैज्ञानिक या भगवान ना मानने वाले और विज्ञान का आधाअधूरा ज्ञान रखने वाल ये तथाकथित तर्कवादी नास्तिक?दरअसल जो आत्मबल और निश्चचिंतता ईश्वर की शरण में जाने से मिलती है वो दुनिया का दूसरा कोई साधन नही देसकता | यही वजह है कि बड़े बड़े वैज्ञानिक भी उस अद्रश्य शक्ति के आगे नतमस्तक होते हैं |

14/09/2014
आज 'शिक्षक-दिवस' है ! सिकंदर और सम्राट चन्द्रगुप्त के बीच का सँघर्ष इन दो राजाओं का नहीं था ! सँघर्ष था दो महान गुरुओं क...
05/09/2014

आज 'शिक्षक-दिवस' है ! सिकंदर और सम्राट चन्द्रगुप्त के बीच का सँघर्ष इन दो राजाओं का नहीं था ! सँघर्ष था दो महान गुरुओं की प्रज्ञा-चेतना का , दो महान गुरुओं के अस्तित्व का ! एक थे सामान्य किन्तु विलक्षण, भारतीय युवा-गुरु,तक्षशिला-स्नातक 'चाणक्य' और दूसरे थे यूनान के कुल-गुरु,राजवंशियों के गुरु 'अरस्तू' ! परिणाम सामने था ! यहीं से पश्चिम के मन में भारतीय गुरु-परंपरा को लेकर भय और आदर व्यापत हो गया था ! यही कारण है कि मैकाले के मानस-पुत्रों ने भारत को जो भीषण कष्ट दिए हैं उन में से एक यह भी है कि पूरी शिक्षा-पद्धति से षड्यंत्र-पूर्वक'गुरु' को हटा करउस की जगह 'शिक्षक' को बिठा दिया ! चाहे-अनचाहे,समय-असमय आज तक के जीवन में प्रथम-गुरु 'माँ' से लेकर हर उस गुरु के चरणों में सादर-साष्टांग प्रणाम निवेदन है जिन की कृपा से मनुष्यता की यात्रा सहज-सुगम हो सकी ! सभी 'गुरुओं' के सतत् आशीष की अपेक्षा में ..."तुम्हारे होने से किस-किस को आस क्या-क्या है ?तुम्हारी आम सी बातों में ख़ास क्या-क्या है ?ये तुम ने हम को सिखाया है अपने होने से ,भले वो कोई हो इन्सा के पास क्या-क्या है.....? "

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