Raghav Dham Trust

Raghav Dham Trust गौशाला,वृध्दाश्रम व सनातन संस्कृति रक्षा मंच

29/03/2025
10/10/2024

*🙏🏻🙏🏻जय श्री सिया राम🙏🏻🙏🏻*

श्लोक ४६ - अध्याय - १
कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्‌॥

यदि मुझ शस्त्ररहित एवं सामना न करने वाले को शस्त्र हाथ में लिए हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिए अधिक कल्याणकारक होगा।

व्याख्या:
यह श्लोक भगवद गीता के पहले अध्याय का एक महत्वपूर्ण अंश है। यहाँ पर संजय ने धृतराष्ट्र को बताना शुरू किया कि अर्जुन ने युद्धभूमि पर अपने रथ के पास जाकर विश्राम किया और अपने धनुष को छोड़ दिया।

संजय के अनुसार, अर्जुन ने युद्ध के दौरान अपने मन को शोक और चिंता से भरा हुआ पाया और उसने अपने धनुष को छोड़ दिया। यह संकेत करता है कि अर्जुन इस समय युद्ध के गंभीरता और उसके परिणामों से घबराया हुआ और मानसिक रूप से विचलित था।

यह श्लोक अर्जुन की दुविधा और संघर्ष को दर्शाता है। वह युद्ध की आवश्यकता और उसके नैतिकता को लेकर अंदर ही अंदर एक गंभीर संकट से गुजर रहा था। यह स्थिति युद्ध के आह्वान के बावजूद उसके आत्मिक संकट को दर्शाती है।

राघव धाम ट्रस्ट (पंजीकृत)
(संस्थापक - ब्रह्मलीन आचार्य श्री राम निवास शास्त्री जी)
(प्रबन्धक - पं० कृष्ण विहारी बैंदौल)

09/10/2024

🕉️आज का पंचांग🕉️
(10-10-2024)
सप्तमी, शुक्ल पक्ष, आश्विन

तिथि सप्तमी 12:31:13
पक्ष शुक्ल
नक्षत्र पूर्वाषाढा 29:40:25
योग अतिगंड 28:35:38
करण वणिज 12:31:13
करण विष्टि भद्र 24:24:06
वार गुरूवार
रितु शरद
आयन दक्षिणायण
विक्रम संवत 2081
शक संवत 1946
सूर्योदय 06:16:14
सूर्यास्त 17:52:57
दिन काल 11:36:42
रात्री काल 12:23:48
चंद्रोदय 12:57:10
चंद्रास्त 23:14:50

राघव धाम ट्रस्ट (पंजीकृत)
(संस्थापक - ब्रह्मलीन आचार्य श्री राम निवास शास्त्री जी)
(प्रबन्धक - पं० कृष्ण विहारी बैंदौल)

09/10/2024

*🙏🏻🙏🏻जय श्री सिया राम🙏🏻🙏🏻*

श्लोक ४५ - अध्याय - १
कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्‌।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः॥

हा! शोक! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान पाप करने को तैयार हो गए हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिए उद्यत हो गए हैं ।

व्याख्या:
इस श्लोक में, अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा है कि अगर युद्ध में शस्त्रधारी लोग, यानी सेनापति, मेरी हत्या कर दें और मुझे प्रतिकार का कोई साधन न मिले, तब भी मेरे लिए यह अधिक कल्याणकारी होगा। अर्जुन का यह कहना है कि यदि उसका सामना शस्त्रधारी कौरवों से होता है और उसके पास आत्मरक्षा के लिए कोई भी उपाय नहीं होता, तो भी उसकी मृत्यु उसकी आत्मा की शांति के लिए लाभकारी होगी।

अर्जुन का यह भाव है कि यदि युद्ध में शस्त्रधारी कौरव उसकी रक्षा नहीं कर सकते और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो यह उसके लिए एक सुरक्षित और उचित स्थिति होगी। यह श्लोक उस समय की मानसिक स्थिति को दर्शाता है जब अर्जुन युद्ध के दौरान अत्यंत असहज और निराश महसूस कर रहा है और उसकी स्थिति युद्ध करने के लिए अनुकूल नहीं लगती।

राघव धाम ट्रस्ट (पंजीकृत)
(संस्थापक - ब्रह्मलीन आचार्य श्री राम निवास शास्त्री जी)
(प्रबन्धक - पं० कृष्ण विहारी बैंदौल)

08/10/2024

🕉️आज का पंचांग🕉️
(09-10-2024)
षष्ठी, शुक्ल पक्ष, आश्विन

तिथि षष्ठी 12:13:55
पक्ष शुक्ल
नक्षत्र मूल 29:14:08
योग सौभाग्य 06:35:36
योग शोभन 29:51:55
करण तैतुल 12:13:55
करण गर 24:27:43
वार बुधवार
रितु शरद
आयन दक्षिणायण
विक्रम संवत 2081
शक संवत 1946
सूर्योदय 06:15:43
सूर्यास्त 17:54:00
दिन काल 11:38:17
रात्री काल 12:22:14
चंद्रोदय 12:02:13
चंद्रास्त 22:14:45

राघव धाम ट्रस्ट (पंजीकृत)
(संस्थापक - ब्रह्मलीन आचार्य श्री राम निवास शास्त्री जी)
(प्रबन्धक - पं० कृष्ण विहारी बैंदौल)

07/10/2024

*🙏🏻🙏🏻जय श्री सिया राम🙏🏻🙏🏻*

श्लोक ४३ - अध्याय - १
कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः॥

इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं ।

व्याख्या:
इस श्लोक में धृतराष्ट्र अपने पुत्र दुर्योधन के बारे में जनार्दन (भगवान श्रीकृष्ण) से प्रश्न कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि परिवार और समाज की धार्मिक मर्यादा जो उच्छृंखल हो चुकी है, ऐसे लोग जो धर्म का पालन नहीं करते, वे निश्चित रूप से नरक में निवास करते हैं। 'उत्सन्नकुलधर्माणां' का अर्थ है, धर्महीन कुल या परिवार, और 'नरके नियतं वासो' का अर्थ है, नरक में निश्चित निवास।

इस श्लोक में संदेश है कि जो लोग अपने कर्तव्यों और धार्मिक दायित्वों को त्याग देते हैं, उनके लिए नरक का निवास निश्चित होता है। यह श्लोक समाज और परिवार की धार्मिकता और उसके प्रभाव को स्पष्ट करता है, और यह भी बताता है कि धार्मिक मूल्यों का पतन दंड की ओर ले जाता है।

राघव धाम ट्रस्ट (पंजीकृत)
(संस्थापक - ब्रह्मलीन आचार्य श्री राम निवास शास्त्री जी)
(प्रबन्धक - पं० कृष्ण विहारी बैंदौल)

06/10/2024

🕉️आज का पंचांग🕉️
(07-10-2024)
चतुर्थी, शुक्ल पक्ष, आश्विन

तिथि चतुर्थी 09:46:59
पक्ष शुक्ल
नक्षत्र अनुराधा 26:24:07
योग प्रीति 06:38:37
करण विष्टि भद्र 09:46:59
करण बव 22:36:06
वार सोमवार
रितु शरद
आयन दक्षिणायन
विक्रम संवत 2081
शक संवत 1946
सूर्योदय 06:14:42
सूर्यास्त 17:56:08
दिन काल 11:41:26
रात्री काल 12:19:04
चंद्रोदय 10:06:09
चंद्रास्त 20:33:28

राघव धाम ट्रस्ट (पंजीकृत)
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