BSP Panipat Haryana बसपा पानीपत हरियाणा

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BSP Panipat Haryana बसपा पानीपत हरियाणा सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय

मान्यवर साहब कांशीराम जी की साइकिल यात्रा 15 मार्च 1983 को शुरू हुई थी,जिसमें उन्होंने 7 राज्यों को कवर करते हुए 40 दिनो...
07/09/2026

मान्यवर साहब कांशीराम जी की साइकिल यात्रा 15 मार्च 1983 को शुरू हुई थी,
जिसमें उन्होंने 7 राज्यों को कवर करते हुए 40 दिनों में 4200 किलोमीटर की दूरी तय की थी।

विश्व के इकलौते नेता जिन्होंने जन आंदोलन खड़ा करने के लिए साइकिल से इतनी लंबी दूरी तय की।

बहुजन नायक मान्यवर साहब कांशीराम जी अमर रहें 🙏🙏🙏🙏🙏

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बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्रीआदरणीय मायावती जी (बहन जी) के निर्देश ...
01/09/2026

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्रीआदरणीय मायावती जी (बहन जी) के निर्देश पर लखनऊ में आयोजित महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय बैठक

मान्यवर साहब कांशीराम जी कहा करते थे—“सरकारों से लड़ा नहीं जा सकता, उन्हें सिर्फ़ बदला जा सकता है।”इसलिए मीडिया, अख़बारो...
30/08/2026

मान्यवर साहब कांशीराम जी कहा करते थे—
“सरकारों से लड़ा नहीं जा सकता, उन्हें सिर्फ़ बदला जा सकता है।”

इसलिए मीडिया, अख़बारों, भाड़े के बुद्धिजीवियों और अपने ही समाज में मौजूद स्वार्थी तत्वों के प्रभाव में आने के बजाय अपनी सोच और समझ से फैसला करें।

अपने वोट की कीमत पहचानिए, क्योंकि आपकी वोट सिर्फ़ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आपकी आवाज़ और अधिकार है। इसी वोट के माध्यम से आप अपनी पसंद की सरकार चुनने की ताकत रखते हैं।

सरकार की ताकत को समझिए—सेना, पुलिस, प्रशासन, न्याय व्यवस्था, आयकर, कस्टम, सीबीआई, ईडी, एनआईए, जीएसटी, रेलवे, सड़क, हवाई अड्डे और देश के अनेक सरकारी संसाधनों तक सरकार की भूमिका हमारे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में है।

इसलिए अपनी वोट की असली ताकत को पहचानिए—

एक व्यक्ति — एक वोट — एक मूल्य।

लोकतंत्र में जागरूक नागरिक सिर्फ़ सरकार का विरोध नहीं करता, बल्कि अपनी वोट की ताकत से सरकार बदलने की क्षमता रखता है।

🐘 बहुजन समाज पार्टी ज़िंदाबाद
💙 बहुजन मिशन ज़िंदाबाद
BSP INDIA
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जो क़ौम संघर्ष नहीं करतीं है उनकी आने वाली पीढ़ियां गुलाम हो जाती हैं                         "बाबा साहब"
30/08/2026

जो क़ौम संघर्ष नहीं करतीं है
उनकी आने वाली पीढ़ियां गुलाम हो जाती हैं
"बाबा साहब"

30/08/2026
मान्यवर साहब कांशीराम जी और आदरणीय बहन कु. मायावती जी भारत की पहली ऐसी महान सख्सियत है जिन्होने सड़को/गलीयों से आन्दोलन ...
30/08/2026

मान्यवर साहब कांशीराम जी और आदरणीय बहन कु. मायावती जी भारत की पहली ऐसी महान सख्सियत है जिन्होने सड़को/गलीयों से आन्दोलन की शुरुआत की,
लेकिन;
"अपने आप को प्रसिद्ध करने के लिए लोगों को नही भड़काया, जिसके कारण एक भी व्यक्ति जेल नही गया"

इसके बाद भी भारत की तीसरे नम्बर की पार्टी बना दी.
#देश_में_बसपा_सरकार मिशन 2027

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*पहले-पहल कुछ लोग मेरे बारे में अंदाज़े लगाते थे कि ढेढ़ रुपये की टूटी चप्पल, फटी हुई पैंट-कमीज़ पहनने वाला शख्स समाज में क...
30/08/2026

*पहले-पहल कुछ लोग मेरे बारे में अंदाज़े लगाते थे कि ढेढ़ रुपये की टूटी चप्पल, फटी हुई पैंट-कमीज़ पहनने वाला शख्स समाज में क्या ख़ाक परिवर्तन लाएगा?- साहेब कांशी राम*
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बात 1977-78 की है, जिन दिनों साहेब दिल्ली में सरगर्म थे. लेकिन दिल्ली में साहेब की बात कोई भी सुनने को तैयार नहीं था. वजह यह थी कि दिल्ली का हरेक शख्स खुद को दादा समझता था. साहेब दिल्ली से निकलकर उत्तर प्रदेश में अपनी विचारधारा को ले जाना चाहते थे, लेकिन उसके लिए कोई स्रोत नहीं मिल रहा था.

एक दिन बाहरी दिल्ली के दरियापुर गाँव में साहेब को 8-10 लोग नज़र आये. जब साहेब ने उनसे कुछ बातचीत करने की कोशिश की तो उनमें से एक कँवर सिंह नाम के शख्स ने कहा, ‘आपकी बातें हमारे पल्ले नहीं पड़ रहीं हैं. आप पालिका बाज़ार में जय भगवान् नाम के आदमी के पास चले जाओ. उसका इंदिरा गाँधी से लेकर संजय गाँधी, जोगिन्दर मकवाना, ज्ञानी जैल सिंह और वी.पी.सिंह जैसे लोगों के साथ उठाना-बैठना है. वह आपकी हर तरह से मदद भी कर सकता है. और वह है भी आपकी चमार जाति से संबंधित.’

साहेब ने बस पकड़ी और जय भगवान् के पास जा पहुंचे. साहेब ने जय भगवान् को कहा कि, *‘मैं देश की व्यवस्था को बदलना चाहता हूँ और समाज में परिवर्तन लाना चाहता हूँ. इसीलिए मैंने शादी नहीं की और यहाँ तक कि मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और घर ना जाने का फैसला भी किया है. मैं दबे-कुचले समाज को जहालत भरी ज़िन्दगी से निकालकर मान-सम्मान वाली ज़िन्दगी देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा हुआ देखना चाहता हूँ.’*

साहेब के शब्द सुनकर जय भगवान् जाटव ने कहा कि, ‘जिस शख्स के पैरों में ढेढ़ रुपये की टूटी हुई प्लास्टिक की चप्पल हो, कमीज़ फटी हो, पैंट के पहुंचे घिसे हुए हो, तो वह शख्स समाज में परिवर्तन क्या ख़ाक लाएगा?’

लेकिन जब साहेब ने गंभीर होते हुए कहा, *‘मैं समाज को बदलने का ईरादा करके चला हूँ. अब इस बात के लिए चाहे मुझे अपनी ज़िन्दगी ही दाव पर क्यूँ न लगानी पड़ जाये.’* तो साहेब के इन स्वाभिमानी शब्दों को सुनकर जय भगवान् जाटव कुछ हिल से गए. क्यूंकि भले ही उसके राजनीति से जुड़े चोटी के लोगों से संबंध रहे थे लेकिन इस तरह का शख्स पहली बार उसके सामने खड़ा था जिसके शब्दों में सदियों से पीड़ित समाज के लिए सच्चा और पाक दर्द जोर मार रहा था. इसके बाद जय भगवान् ने साहेब को अपने तजुर्बे के आधार पर कहा, ‘देखो! यदि आप दबे-कुचले समाज के लिए कुछ करना चाहते हो तो दिल्ली छोड़कर उत्तर प्रदेश पर ध्यान केन्द्रित करो. क्यूंकि दिल्ली का हर इंसान अपने आप को दादा समझता है. और वह आपकी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं होगा. और यदि सुन भी लेगा तो पीठ पीछे आपका मज़ाक उड़ाएगा. दूसरी बात, मेरी उत्तर प्रदेश में काफी जान-पहचान भी है. मैं वहाँ आपकी मीटिंग्स वगैरा का प्रबंध भी कर सकता हूँ.’

साहेब ने कहा, ‘ठीक है! एक तो मेरी मीटिंग्स बंद कमरे में होनी चाहिए. दूसरा, मेरी मीटिंग्स में केवल 30-35 साल के नौजवान ही शामिल होने चाहियें क्यूंकि इससे ज्यादा उम्र के लोग न तो खुद कोई काम करेंगे और न ही मुझे करने देंगे.’

जय भगवान् जाटव समझ गए और साहेब की हर तरह से मदद करने का भरोसा दिया. सबसे पहले उन्होंने साहेब के करोल बाग़ स्थित (रैगर पुरा) दफ्तर के लिए अपनी जेब से 2200 रुपये खर्च करके फर्नीचर और कुछ और सामान लेकर दिया. उसके बाद उत्तर प्रदेश में अपने ख़ास आदमियों को चिट्ठियाँ लिखने का काम शुरू किया. जिसमें लिखा था कि- मेरा ख़ास दोस्त कांशी राम आपकी मीटिंग्स लेने आ रहा है और आप उन्हें हर तरह का सहयोग दो.

इस तरह साहेब ने छोटी-छोटी मीटिंग्स को संबोधन करना शुरू किया. साहेब जिस मीटिंग को भी संबोधन करते, उसमें अपनी पूरी बात रखने के बाद, एक और बात नौजवानों को कहनी कभी भी ना भूलते. वह थी, *‘अपना काम भी करते रहो, परिवार का भी ख्याल रखो. बस दिन में एक बार साइकिल के हैंडल पर नीला झंडा बाँधकर 15-20 किलोमीटर जाना है और वापिस आना है.'*

जब नौजवान ऐसा हर रोज़ करने लगे तो एक दिन ऐसा आया कि सत्ता के गलियारों में हाहाकार मच गई. उत्तर प्रदेश के हर गाँव, शहर और हर घर में साहेब कांशी राम की तूती बोलने लग गई.

* मैं हमेशा ही अवसरों की तलाश में रहता हूँ. चुनाव आते हैं तो मैं बहुजन समाज के हित में कोई भी मौका गँवाना नहीं चाहता हूँ- साहेब कांशीराम जी

जेवर विधानसभा में बसपा के कार्यक्रम को लेकर बोले बसपा नेता पूर्व  #राज्यसभा_सांसद_मुनकाद_अली ने कहा कि इस बार बसपा को मु...
27/08/2026

जेवर विधानसभा में बसपा के कार्यक्रम को लेकर बोले बसपा नेता पूर्व #राज्यसभा_सांसद_मुनकाद_अली

ने कहा कि इस बार बसपा को मुसलमानों का बंपर समर्थन मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए मुसलमानों को #बसपा के साथ खड़ा होना पड़ेगा और हमें उम्मीद है कि मुस्लिम इस चुनाव में बसपा के साथ ही खड़ा नजर आएगा
पूरा भाषण वीडियो में मौजूद है!

9 अक्टूबर को मान्यवर साहब कांशीराम जी की पुण्यतिथि दिवस पर लखनऊ हो सकता हैं नीला!बहन जी कर सकती है बड़ी रैली।BSP Panipat...
27/08/2026

9 अक्टूबर को मान्यवर साहब कांशीराम जी की पुण्यतिथि दिवस पर लखनऊ हो सकता हैं नीला!

बहन जी कर सकती है बड़ी रैली।

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