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16/08/2026

आपका प्यार और आशीर्वाद साथ हो,
तो हर मुश्किल राह भी आसान हो जाती है।

" रत्नाकरधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्।ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम वन्देभारतमातम् ॥ "          80 वें स्वतंत्रता दिवस की सादर बधा...
15/08/2026

" रत्नाकरधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्।
ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम वन्देभारतमातम् ॥ "
80 वें स्वतंत्रता दिवस की सादर बधाई और शुभकामनायें ।
सादर

जिस प्रकार से राष्ट्र भक्ति की भावना का पतन होता जा रहा है। कुछ समय बाद ही इस राष्ट्र के आगामी नस्ले विश्वास ही नहीं करे...
11/08/2026

जिस प्रकार से राष्ट्र भक्ति की भावना का पतन होता जा रहा है। कुछ समय बाद ही इस राष्ट्र के आगामी नस्ले विश्वास ही नहीं करेगी कि कहीं ऐसा भी होता है क्या ?
मात्र 19 वर्ष की आयु में इस राष्ट्र की स्वतंत्रता की चाह लिए हाथ में भगवत गीता लेकर हंसते - हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। आज 11 अगस्त को इसी गुदड़ी के लाल की पुण्य तिथि है। राष्ट्र के ऐसे दीवाने खुदीराम बोस की खुद्दारी और वीरता को मेरी अनंत श्रद्धांजलि और बारंबार नमन ।।
सादर।

एक आवश्यक अपील :-*               लगातार बरसात का दौर प्रारम्भ होने जा रहा है । बिजली के खम्बो, तान, लटकते तार , भीगे हुई...
02/08/2026

एक आवश्यक अपील :-*
लगातार बरसात का दौर प्रारम्भ होने जा रहा है । बिजली के खम्बो, तान, लटकते तार , भीगे हुई दरवाजे की घंटी, विधुत तारो से सटे व पुराने पेड, जर्जर भवनों, कच्ची चट्टानों, बहते पानी, जल स्त्रोतो आदि से दूरी बनाए रखे। हर वर्ष बरसात के दिनों में करंट और पानी से कई जाने चली जाती है। ऐसे स्थानों से आमजन और बेजुबान पशुओं को भी सावधान करे। यदि लाईट बंद है तो विभाग कर्मचारी को भी चलती बरसात में काम करने के लिए मजबूर ना करे।
हो सकता है हम सबकी थोड़ी सी जागरूकता से किसी की जान बच जाये ।
सादर ।
ज्ञान सारस्वत

.आज ही शहीद हुए थे महात्मा उधम सिंह जी, ब्रिटेन जाकर सजा दी थी डायर को! जलियांवाला बाग नरसंहार, किसका बदन सिहर नहीं उठता...
31/07/2026

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आज ही शहीद हुए थे महात्मा उधम सिंह जी, ब्रिटेन जाकर सजा दी थी डायर को!

जलियांवाला बाग नरसंहार, किसका बदन सिहर नहीं उठता जलियांवाला बाग का नाम सुनकर ? ऐसा कोई हिंदुस्तानी नहीं, जो अंग्रेजों के प्रति घृणा से भर नहीं उठता होगा जलियांवाला बाग का नाम सुनकर। पर महात्मा उधम सिंह जी जैसे देश के वीर सपूत ने अंग्रेजों की इस कायरता का भरपूर जवाब दिया। देश में महात्मा भगत सिंह जी और महात्मा आजाद जी जैसे राष्ट्रवादी क्रांतिकारियों की पूरी टोली ने अंग्रेजों का जड़ उखाड़ने में खुद को झोंक दिया, तो आज ही के दिन अंग्रेजों की फांसी पर इंग्लैंड में झूल जाने वाले सरदार महात्मा उधम सिंह जी ने इसका बदला अंग्रेजों की सरजमी पर जाकर लिया, वो भी 21 सालों के बाद।

सरदार महात्मा उधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग नरसंहार के समय पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ डायर को उसी की सरजमीं पर गोलियों से भून डाला। और ठीक सरदार महात्मा भगत सिंह जी के अंदाज में आत्मसर्मपण कर दिया। खास बात तो ये थी कि उन्होंने माइकल ओ डायर के अलावा किसी को निशाना नहीं बनाया, क्योंकि वहां पर महिलाएं और बच्चे भी थे। अंग्रेजों ने फांसी की सजा की सुनवाई के दौरान जब महात्मा उधम सिंह जी से पूछा कि उन्होंने किसी और को गोली क्यों नहीं मारी, तो *वीर अहिंसा मूर्ति महात्मा उधम सिंह जी* का जवाब था कि सच्चा हिंदुस्तानी कभी महिलाओं और बच्चों पर हथियार नहीं उठाते। ऐसे थे हमारे शहीद-ए-आजम महात्मा सरदार उधम सिंह जी । महात्मा उधम सिंह जी को बाद में शहीद-ए-आजम की वही उपाधि दी गई, जो सरदार महात्मा भगत सिंह जी को शहादत के बाद मिली थी।

अमर शहीद सरदार महात्मा उधम सिंह जी का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। सन 1901 में महात्मा उधम सिंह जी की माता और 1907 में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना के चलते उन्हें अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। उधम सिंह का बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्ता सिंह था जिन्हें अनाथालय में क्रमश: उधम सिंह और साधु सिंह के रूप में नए नाम मिले। पर सरदार महात्मा उधम सिंह जी ने भारतीय समाज की एकता के लिए अपना नाम बदलकर राम मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया था जो भारत के तीन प्रमुख धर्मों का प्रतीक है।

महात्मा उधम सिंह जी भले ही अनाथालय में पल रहे थे, पर देश प्रेम को अपने अंदर पाल रहे थे। अनाथालय में महात्मा उधम सिंह की जिंदगी चल ही रही थी कि 1917 में उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया। वह पूरी तरह अनाथ हो गए। 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में शमिल हो गए। महात्मा उधम सिंह अनाथ हो गए थे, लेकिन इसके बावजूद वह विचलित नहीं हुए और देश की आजादी तथा डायर को मारने की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए लगातार काम करते रहे।

महात्मा उधम सिंह जी के सामने ही 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ था। वे प्रत्यक्षदर्शी थी। वे गवाह थे उन हजारों बेनामी भारतीयों की नृषंश हत्या के, जो तत्कालीन जनरल डायर के आदेश पर गोलियों के शिकार हुए थे। यहीं पर उन्होंने उन्होंने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर जनरल डायर और पंजाब के गवर्नर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। जिसके बाद क्रांतिकारी घटनाओं में उतर पड़े। सरदार महात्मा उधम सिंह क्रांतिकारियों से चंदा इकट्ठा कर देश के बाहर चले गए और दक्षिण अफ्रीका, जिम्बॉव्बे, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा कर क्रांति के लिए धन इकट्ठा किया। इस बीच देश के बड़े क्रांतिकारी एक-एक कर अंग्रेजों से लड़ते हुए जान देते रहे। ऐसे में उनके लिए आंदोलन चलाना मुश्किल हो चला था। पर अपनी अडिग प्रतिज्ञा के पालन के पर वो डटे रहे।

महात्मा उधम सिंह जी के लंदन पहुंचने से पहले जनरल डायर 1927 में बीमारी के चलते मर गया था। ऐसे में उन्होंने अपना पूरा ध्यान माइकल ओ डायर को मारने पर लगाया। किसी तरह से वो छिपते-छिपाते सन् 1934 में लंदन पहुंचे और वहां 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे। वहां उन्होंने यात्रा के उद्देश्य से एक कार खरीदी और साथ में अपना मिशन पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवॉल्वर भी खरीद ली। और माइकल ओ डायर को ठिकाने लगाने के लिए उचित वक्त का इंतजार करने लगे।

उधम सिंह को अपने सैकड़ों भाई-बहनों की मौत का बदला लेने का मौका 1940 में मिला। जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को *रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हॉल* में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। महात्मा उधम सिंह जी उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुंच गए। अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके।


बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए महात्मा उधम सिंह जी ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। महात्मा उधम सिंह जी ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर दुनिया को संदेश दिया कि अत्याचारियों को भारतीय वीर कभी बख्शा नहीं करते। महात्मा उधम सिंह जी ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। अदालत में जब उनसे पूछा गया कि वह डायर के अन्य साथियों को भी मार सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया। महात्मा उधम सिंह जी ने जवाब दिया कि वहां पर कई महिलाएं भी थीं और भारतीय संस्कृति में महिलाओं पर हमला करना पाप है।


4 जून 1940 को महात्मा उधम सिंह जी को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें *पेंटनविले जेल में फांसी दे दी* गई। इस तरह यह क्रांतिकारी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में अमर हो गया। 1974 में ब्रिटेन ने उनके अवशेष भारत को सौंप दिए। अंग्रेजों को अंग्रेजों के घर में घुसकर मारने की जो उद्दंडता सरदार महात्मा उधम सिंह जी ने दिखाई थी, उसकी हर जगह तारीफ हुई। यहां तक कि जवाहरलाल नेहरू ने भी इसकी तारीफ की। नेहरू ने कहा कि माइकल ओ डायर की हत्या का अफसोस तो है, पर ये बेहद जरूरी भी था। जिसने देश के अंदर क्रांतिकारी गतिविधियों को एकाएक तेज कर दिया। सरदार महात्मा उधम सिंह जी के इस महाबदले की कहानी आंदोलनकारियों को प्रेरणा देती रही। इसके बाद की तमाम घटनाओं को हम सभी जानते हैं। अंग्रेजों को 7 सालो के अंदर देश छोड़ना पड़ा और हमारा देश आजाद हो गया। महात्मा उधम सिंह जी जीते जी भले आजाद भारत में सांस न ले सके, पर करोड़ो हिंदुस्तानियों के दिल में रहकर वो आजादी को जरूर महसूस कर रहे होंगे।
|| जय अहिंसा मूर्ति न्याय प्रिय महात्मा उधम सिंह जी ||

निःआयुर्वेद चिकित्सा शिविर संपन्न -        केंद्रीय आयुर्वेदिय विज्ञान संस्थान आयुष मंत्रालय भारत सरकार बनीपार्क जयपुर क...
30/07/2026

निःआयुर्वेद चिकित्सा शिविर संपन्न -
केंद्रीय आयुर्वेदिय विज्ञान संस्थान आयुष मंत्रालय भारत सरकार बनीपार्क जयपुर के तत्वावधान में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।
चिकित्सा शिविर में निशुल्क ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन आदि की जांच की गई । और विभिन्न रोगों का निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं दवा वितरण हुआ। शिविर में जयपुर के डॉक्टर उमेश यादव, डॉक्टर जयंत जोशी, संदेश मीणा, चन्द्रप्रकाश आदि की टीम ने चिकित्सा जांच व उपचार किया। कार्यक्रम में लगभग 200 से अधिक रोगियों ने जांच व दवा प्राप्त कर लाभ उठाया ।
सभी सहयोगकर्ताओ का सादर आभार।
सादर।

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