19/09/2026
इस मंदिर में कौन-कौन गया बताओ
#गणेश_मंदिर_मल्हारगंज_इन्दौर
यह मंदिर छोटा गणपति के नाम से जाना जाता है।
यह करीब 200 बर्ष पुराना है।
कहा जाता है कि यहाँ उस समय गणेशजी की स्वयंभू मूर्ति मिली थी।
यह जमीन किबे परिवार को होल्कर शासको से जागीर से प्राप्त हुई थी।
किंबे किबे परिवार के मूल पुरुष श्री विठ्ठल महादेव (जिन्हे इतिहास में तात्या जोग के नाम से जाना जाता है।) उन्होंने ये मूर्ति स्थापित करवाई थी पास में स्थित बावड़ी इसी कारण से "तात्या की बावडी" नाम से प्रसिद्ध है। इस जागीर की जमीन मे से काफी बड़ी जमीन शासन ने उनके नाम पर कर ली थी; एवं गणेश मंदिर, शिव मंदिर (समाधि) और
इन दोनों के बीच की जमीन इसके बाद भी किबे परिवार के पास रही।
सन् 1905 के करीब श्रीमती लक्ष्मीबाई किबे के हस्ते आज विद्यमान बड़ी गणेश जी की मूर्ति की स्थापना की गई व मंदिर का भी रूप बदला गया जो आज भी मौजुद है।
गणेशजी किबे परिवार के प्रारंभ से ही कुलदेवता रहे है।
हेरंब गणेशजी का ही नाम है;
यह मंदिर सन् 1998 तक किबे परिवार की पारिवारिक संपत्ति रही है।
उसके पश्चात हेरंब न्यास एक प्रायवेट ट्रस्ट बनाया गया।
गणेशजी एवं शिवजी का मंदिर आमने-सामने होने के कारण इसे पिता-पुत्र का मंदिर कहते है। हेरंब न्यास एक प्रायवेष्ट ट्रस्ट है जिसके ट्रस्टी किबे परिवार से है।