CYSS Allahabad

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remember the student activists who have worked in the name of chatra yuva sangharsh samiti.

  की तर्ज पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जिलाध्यक्ष Cyss Saddam ने CYSS की तरफ से मंच से AISA के पैनल को समर्थन‌ का ऐलान ...
12/09/2018

की तर्ज पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जिलाध्यक्ष Cyss Saddam ने CYSS की तरफ से मंच से AISA के पैनल को समर्थन‌ का ऐलान किया। साथ में CYSS के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

01/09/2018

आने वाले 12 सितम्बर को होने वाले डूसू चुनावों में आम छात्रों के मुद्दे को पुरजोर ढंग से उठाने और डूसू में एक ऐतिहासिक बदलाव लाने के लिए AISA और CYSS (आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. DUSU चुनाव में जिन मुख्य मुद्दों पर CYSS और AISA चुनाव लड़ रहे हैं वह इस प्रकार है:

1-कैम्पस में गुंडागर्दी के खिलाफ Zero Tolerance की नीति अपनाई जाए. गुंडागर्दी को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बूथ और CCTV कैमरा की व्यवस्था हो।

2- उच्च शिक्षा में बाज़ारीकरण के चलते निजीकरण और ऑटोनोमस के खिलाफ AISA और CYSS लगातार संघर्ष कर रही है जिससे छात्रों को सस्ती और बेहतर शिक्षा मिल सके।

3- AC बसों में पास की सुविधा करवाना।

4- कैम्पस में महिलाओं की आज़ादी और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की विशाखा जजमेंट के तहत हर कॉलेज में एक स्वायत्त जेंडर सेन्सेटाईजेशन कमेटी का गठन करवाना और एक anti-stalking बिल पास करवाना.

5. यू-स्पेशल और विमेंस स्पेशल बस की सुविधा फिर से शुरू करवाना।

6. मेट्रो किराया कम करवाने के लिए लगातार संघर्ष।

7. छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा प्रदान करने के लिए लगातार संघर्ष करना।

8. बेहतरीन सुविधाओं से लैस कॉलेज कूल कैंटीन की सुविधा करवाना।

9. सभी कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थायी नियुक्ति के लिए संघर्ष करना.

10.कैम्पस में पीने के साफ़ और ठन्डे पानी की सुविधा करवाना।

11.हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए हिंदी में अध्ययन सामग्री की व्यवस्था और remedial क्लासेज की व्यवस्था करना.

12.दिल्ली विश्विद्यालय में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए छात्रों की सीटों में बढ़ोत्तरी करवाना

13.दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए प्रवेश परीक्षा का अनिवार्य करवाने के लिए संघर्ष।

14.छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए कॉलेज एवं सांध्य कॉलेज खुलवाने के लिए संघर्ष करना।

15. युवाओं को वैचारिक रूप से मज़बूत करना और उनमें सकारात्मक सोच और सकारात्मक राष्ट्रवाद की भावना को जगाना।

16.विश्वस्तरीय लाइब्रेरी की 24*7 सुविधा करवाना तथा छात्राओं के अध्ययन हेतु होस्टल की समयसीमा Boys Hostel के बराबर करवाना।

17.सभी कॉलेज में कॉलेज आर्काइव और फ़ोटो गैलेरी के लिए संघर्ष।

18.दिव्यांग छात्रों के लिए तकनीकी सुविधाओं के लिए संघर्ष।

19.अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग के हितों के लिए संघर्ष

20. डोर सेवा के तहत कॉलेज में ड्राइविंग लाइसेन्स की सुविधा करवाना।

21. सभी कॉलेज में कॉलेज थिएटर,कैरियर काउन्सलिंग केंद्र और स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स की स्थापना करवाने के लिए संघर्ष।

22. उत्तर-पूर्वी राज्यों से आये छात्रों को भेदभाव से बचाने के लिए जरुरी कदम उठाये जाएँ.

23. दिल्ली विश्वविद्यालय में होने वाली प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनो माध्यम में कराने के लिए संघर्ष करना।

24-छात्रों की बुनियादी आवासीय सुविधाओं के लिए रेंट कंट्रोल एक्ट लागू करवाना।

25- सभी कॉलेज एवं DU कैंपस में मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर " छात्र क्लीनिक" का निर्माण करवाना।

छात्र युवा संघर्ष समिति इलाहाबाद की तरफ से रामदेव मौर्य को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।
03/07/2018

छात्र युवा संघर्ष समिति इलाहाबाद की तरफ से रामदेव मौर्य को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।

Sushil Kumar Singh जी की कलम से
29/05/2018

Sushil Kumar Singh जी की कलम से

Krishn Kumar Krishna जी की कलम से
29/05/2018

Krishn Kumar Krishna जी की कलम से

CYSS इविवि इकाई अध्यक्ष पवन गुप्ता जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।
13/05/2018

CYSS इविवि इकाई अध्यक्ष पवन गुप्ता जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।

छात्र युवा संघर्ष समिति इलाहाबाद की तरफ से Aftab Alam को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।
07/05/2018

छात्र युवा संघर्ष समिति इलाहाबाद की तरफ से Aftab Alam को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।

20/04/2018

*2013 से एसएससी की परीक्षाओं की CBI जांच की मांग कर रहे साथियों के लिए ज़रूरी तथ्य।*
भर्ती में गड़बड़ियां आज से नही बहुत पहले से चल रही हैं।
पहले बड़े (माफिया) कोचिंग संस्थान ssc के अफसरों और नेताओं के साथ सांठ गांठ करके भर्ती में धांधली करवाते थे,आज वही काम ये ऑनलाइन वेंडर कर रहा है।
क्या ऐसा कभी हो सकता है कि बिना अफसरों और नेताओं की साठ गांठ के इतने बड़े स्तर पर धांधली हो ।
चाहे वो 2009-2014 तक कांग्रेस की सरकार हो या 2014-फिलहाल तक बीजेपी सरकार हो ,सिर्फ नाम बदले हैं काम एक जैसे हैं ,सब दलों के ।
2013 में जो परीक्षा में धांधली हुई उसमे तो कांग्रेस की ही सरकार थी । चाहे 2G घोटाला,coal ब्लॉक घोटाला हो हर स्तर पर भ्रष्टाचार उस समय की सरकार में व्याप्त था।
आज की बीजेपी सरकार भी कम नही है, हरियाणा में HPSC,मध्यप्रदेश में व्यापम में ही हुए भर्ती महाघोटाले को देख लीजिए।
सरकारें बदल गई पर भ्रष्टाचार वहीं का वहीं रह गया। हमारी नौकरियां कोई और पैसे वाला भ्रष्टाचारी ले गया।
अब असल खेल ये है कि जितने भी परीक्षा धांधली के माफिया हैं वे सारे के सारे इन राजनैतिक दलों को मोटी रकम पहुंचाते हैं जिसका हिसाब उन्हें किसी को नहीं देना होता और इसी कारण इन लोगों को कोई जेल भेजने की हिम्मत नहीं करता।
इसी एवज में सरकार में ऐसे नेता आते हैं वो अपने बेटे बेटियों, रिश्तेदारों को नौकरियां लगवा देते हैं और मेहनत करने वाले बेरोज़गार बैठे रह जाते हैं।
नेताओं का संरक्षण इन भर्ती के माफियाओं को मिलता रहता है फिर चाहे सरकार में चाहे BJP हो या कांग्रेस।
इसलिए ये लोग हम छात्रों के साथ तब तक ही होते हैं जब तक इनकी सरकार नही होगी। एक बार सरकार में आये फिर हम दर बदर की ठोकरें खाते फिरेंगे।
पुराना चोर हो या नया चोर हो नियत तो दोनों की ही खराब है।
लेकिन अब इन लोगों को हम हमारे साथ नही टिकने देंगे । ऐसे माफियाओं को जेल पहुँचा के रहेंगे।

हमारा हक़ लेके रहेंगे ।

*आपसे भी एक अपील है, ऐसे नौकरियां बेचने वाले लोगों को अपने आस पास भी मत फटकने देना।*

16/04/2018

आज एक बार फिर Allahabad विश्वविघालय हुआ शर्मसार
शताब्दी Girls Hostal की Ek छात्रा ने किया आत्महत्या ।

( News source Mohd Aftab Alam - Student of Allahabad University)

13/04/2018

अगर किसी बलात्कार के बाद
तुम सबसे पहले पीड़िता का धर्म देखते हो ,
तो मर चुके हो तुम |

अगर बलात्कारी के नाम में उसका धर्म खोजकर ही अपनी पर्तिक्रिया निर्धारित करते हो , तो मर चुके हो तुम |

अगर बलात्कार करनेवाले की जाती देखकर विरोध करना है या नही तय करते हो , तो मर चुके हो तुम |

जिस राज्य में बलात्कार हुआ है , वहां किसकी सरकार है देखकर ही विरोध करते हो , तो मर चुके हो तुम |

बलात्कारी तुम्हारे धर्म का है इसलिए उसका बचाव करते हो , तो मर गए चुके हो तुम |

न किसी का धर्म , जाती देखकर पीड़िता के लिए आवाज़ उठा रहे हो , तो जाग रहे हो तुम |

आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ भवन पर छात्र युवा संघर्ष समिति (CYSS) समेत(ICM, दिशा छात्र संगठन ,AISA, DSO, SFI...
11/04/2018

आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ भवन पर छात्र युवा संघर्ष समिति (CYSS) समेत(ICM, दिशा छात्र संगठन ,AISA, DSO, SFI, DSA) विभिन्न प्रगतशील छात्र संगठनों के द्वारा रोस्टर प्रणाली लागू करने व 62 विश्वविद्यालयों स्वायत्तता करने के खिलाफ MHRD मिनिस्टर प्रकाश जावेड़कर का पुतला दहन व विरोध प्रदर्शन किया गया। CYSS की तरफ से इविवि यूनिट अध्यक्ष पवन गुप्ता और यूनिट सचिव विवेक सिंह ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए सभी छात्रों को इससे जुडने की अपील की।

10/04/2018

नमस्कार🙏

मैं एक एसएससी CGL स्टूडेन्ट, 2 कड़ोर स्टूडेंट्स हर साल एसएससी के अलग-अलग परीक्षाओं में सम्मिलित होते हैं, कोई भी एक नाम चुन लीजिये, मैं वो हुँ। 2016 में हमारा एग्जाम डिजिटल हो गया, पूरा इंडिया हो रहा था सो ये भी हो गया। हमने सोचा गोले भरने से निजात मिलेगी। परीक्षा के आआख़िरी 20 मिनट हम गोले भरने के लिए सुरक्षित रखते थे, अब उन 20 मिनटों में कुछ स्कोर करेंगे।

पर हुआ कुछ ऐसा कि डिजिटल इण्डिया का फायदा उन लोगों को मिला जो समाज के अगड़े थे, पैसे वाले। किसी भी "डेवलपमेंट" का फायदा यही ले जाते हैं। कम्प्यूटर हैक होने लगे, सेंटर मैनेज होने लगे, रुट एक्सेस नाम के एक डिजिटल दैत्य से हमारा सामना हुआ जो हमारे भविष्य को निगल लिए जाता था। हम औऱ हमारे आस-पास के साथी, जो मेन्स में 2-4 नम्बरों से रह जाते थे, अब पीटी में छटने लगे। पहले मुझे लगा ये बस हमारा हाल है। डिजिटल इण्डिया के माध्यम से ही पता चला पूरे देश के योग्य युवा की फौज बन गई है। जिनका सेलेक्सन हो रहा था वो हमारी कक्षा के सबसे आखिरी बेंच पर बैठने वाले वो छात्र थे जिनको हमारे टीचर्स ने कभी किसी सवाल का जवाब ने दे पाने के लिए हमेशा से योग्य मान कर नज़रंदाज़ कर दिया था। वही छात्र सेलेक्ट किये जा रहे थे जो स्कूल के एग्जाम अपने मम्मी-पापा के रिक्वेस्ट से क्लास में प्रोमोट होते रहे थे, बोर्ड में मैनेज किये गए थे। आखिर में वही छात्र अपने मम्मी-पापा के पैसों के दम पर एसएससी में भी मैनेज कर लिए गए।
हमेशा से क्लास के अगले बेंच पर बैठने वाले, हम स्टूडेन्ट अचानक से जिंदगी की दौर में आख़िरी कतार में खड़े कर दिए गए।

गलती किसकी थी, हमने R S अग्रवाल को गीता की तरह पढा था। किरण के मैथ्स/इंग्लिश के प्रीवियस ईयर 3 दफा खत्म कर दिए थे। राकेश यादव सर के मैथ्स की बुक के सवाल पेज नम्बर सहित छप गए थे दिमाग पर। हम स्टूडेंट्स जिस नम्बर पर मेन्स में कुछ नम्बर से छट जाते थे अब उस से बेहतर नम्बर लाने पर भी 10-12 नम्बर से छटने लगे थे।

गलती किसकी थी? डिजिटल इण्डिया के पहले साल 2016 में हमे पता ही नही चला हो क्या गया हमारे साथ। 2017 मे हुए परीक्षाओं में चीजें स्पष्ट होने लगी। हमारे भविष्य के साथ खेलने वालों की बढ़ी हिम्मत ने इनसे कई गलतियां करवाई। हमें सैकड़ो सुबूत मिले। हम उन सुबूतों को लेकर एसएससी ऑफिस तक गए। हमारे सुबूतों को गलत बता दिया गया। हमारे सारे सुबूतों को सिरे से खारिज कर दिया गया और जारी धांधली को "टेक्निकल ग्लिच" बता कर पल्ला साफ कर लिया उन लोगो ने जो पद पर इसलिए बिठाए गए थे कि योग्य छात्रों का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में कर सकें। पर उनके "कोर्स ऑफ एक्शन" ने उनकी स्थिति को संदेहास्पद बना दिया।

हम वहीं बैठ गए, धरने पर, CGO में, 27 फरबरी को। पहले दिन हम संख्या में कम थे तो पुलिस ने हमे वहाँ से हटा दिया।
अगले दिन हम संख्या में बड़े हुए तो टिके रहे। हमने सिस्टम की चिन्ता बढ़ा दी। जिन लोगो ने हमे नकारा था अब वो हमारे खिलाफ साजिश करने लगे। फिर भी हम जमे रहे।

प्रेसर, गुटों के खेल, अंदरूनी फूट करवाना... आदि सबके नज़र में आता रहा मैं उसकी बात नही करूँगा। ये सबको पता है।

अब खेल शुरू किए गए। दिन को हमारी संख्या ज्यादा होती थी तो उस वक्त हम सेफ होते थे, पर रात को हमे धमकाने गुण्डे आने लगे। शुरू में हमे पता नही चला कौन हैं ये लोग। धीरे धीरे हम इन्हें पहचानने लगे। ये लोग हमारे साथ CGO में भीड़ के साथ चुपचाप बैठे होते थे। रात को यही छात्र हमारे खिलाफ हो जाते थे, चाहते थे हम अपना प्रोटेस्ट खत्म कर दें।

क्यों कर दें?? हमारे डिमांड्स का क्या? क्यों हमारे साथ सिस्टम के सारे पॉवर और पॉलिटिक्स के सारे पैंतरे इस्तेमाल किये जा रहे थे जब हम एक छोटी से डिमाण्ड, CBI इन्क्वायरी के लिए बैठे थे।

आप सही हो तो ये बात CBI इन्क्वायरी के रिपोर्ट के रूप में हमारे सामने आबे दीजिये न!! क्या दिक्कत है?
पर नही, वो नही माने, हमने भी नही मानी हार।

एक ग्रुप NSUI का, हमारे प्रोटेस्ट में चुपके से घुल गया। 16 मार्च को, निर्णायक दिन को उन्होंने हमारा एक बड़ा नुकसान कर दिया। हमारे छात्र प्रतिनिधि को धमका कर वहाँ से निकाल दिया NSUI वालों ने। उन्होंने अपना प्रतिनिधि भेजा, जो अंदर गई तो हमारे उम्मीद लेकर गई थी। वापस आई तो उन्होंने आश्वासन दिया सारे डिमांड्स मान लिए गए हैं। हम खुश हुए। पर हमारी खुशी कुछ घन्टो की थी। एसएससी ने कोई भी नोटिफिकेशन नही दिया जिस नोटिफिकेशन की बात हमारे प्रतिनिधि ने की थी।
हमने 31 मार्च को "हल्ला बोल" करने का निश्चय किया। निर्धारित डेट पर हम पार्लियामेंट स्ट्रीट पर एकत्रित हुए। पर, फिर से NSUI के गुण्डे आ गए, हमारा स्टेज खराब किया, हम स्टूडेंट्स के साथ धक्का मुक्की की, जबरदस्ती हमे मार्च पर ले गई और पुलिस से पिटवा कर गायब हो गए।

कुछ गलती हमारी थी। हमने सोचा प्रोटेस्ट है, हम पर हमले सिस्टम के ही होंगे। यहाँ हम चूक गए। हमले उन पोलिटिकल इनट्रेस्ट वाले ग्रुप की भी हुई जो हमारे हक की लड़ाई में अपना पोलिटिकल हित साधना चाह रहे थे।

अब, हम फिर एकत्रित हो रहे हैं और हम पर हमले तेज हो गए हैं। हमारी पहचान की जा रही है। हमे ट्रेस किया जा रहा है। हमे धमकाया जा रहा है। हमारे जो साथी इनके ट्रेस में हैं उनपर हमले किये जा रहे हैं।

हमारे इनबॉक्स को गालियों और धमकियों से भरा जा रहा है। हमारे ग्रुप को तोड़ने की साजिश की जा रही है। हमारे साथियों के खिलाफ गलत प्रचार किया जा रहा है। गलत तथ्यों के साथ स्क्रीन शॉट्स वायरल किये जा रहे हैं।

क्यों कर रहे हो भाई तुम, स्टूडेंट ही हो तुम भी। हमारी तरह।
रोज रात को अपना वजूद और अपना हक बचाने के लिए तुमसे लड़ता हुँ। तुम्हारी धमकियां, गालियां सुनता/सहता हुँ। रात को सोने से पहले तुमसे हुई लड़ाई दिमाग के दीवारों पर लाल रंग छाप देती है। सुबह जागने के बाद जब आईना देखता हूँ तो दिमाग मे उस रंग की एक परत बची होती है, पर सुकून होता है जब उस आईने में खुद को पाता हूँ, पहचान लेता हूँ खुद को।

तुमसे लड़ते हुए भूल गया मैं कौन था। मैं आज जो भी कर रहा हूँ ये मेरा काम नही होता था। हमारी दुनिया किताबो में थी। हमे सरकारी होब्स चाहिए और तुम्हे पॉलिटिक्स में जाना है। हमारे रास्ते अलग हैं। तुम क्यों हमारे हक की आहुति देना चाहते हो??

स्टूडेंट्स हैं हम तुम्हारे तरह ही। डायन भी 7 घर छोड़ कर शिकार करती है।

जो स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं वो इसलिए कर रहे हैं क्योंकि गरीब हैं। खरीद नही सकते नौकरी और उनके पास तुम्हारी तरह 10 ऑप्शन नही हैं। उनका फ्यूचर बस सरकारी नौकरी है।
ये अगर सफल होते हैं तो इन 2 करोड़ छात्रों में से कम से कम 20-30 हज़ार योग्य छात्र हर साल अपना भविष्य सवार सकेंगे और देश का भी।

अगर प्रोटेस्ट नाकाम हुआ तो NSUI के 2-4 लोग जरूर पॉलिटिक्स में आ जाएंगे। बहुत आसान मैथ है, 20-30 हज़ार के बदले 2-4... बड़ा हित किसका है?

हम पर हमले बन्द कीजिये!!!

जेन्युइन डिमांड्स हैं साहब हमारी, हमे लड़ने दीजिये। आप कही भी अपने ग्राउंड तलाश कर सकते हो, दिल्ली राजनीति के लिए बहुत उपजाऊ है। आपको मिल ही जाएगा कुछ न कुछ। हमे छोड़ दीजिए आप, अलग हो जाइए हमारे प्रोटेस्ट से कि जो एनर्जी हम आपके ताकत को रोकने में व्यर्थ करते हैं उसे एकत्रित कर के सिस्टम के खिलाफ इस्तेमाल कर सकें🙏🙏🙏

प्लीज़!!

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