27/06/2026
सत्य को अफवाहों से नहीं, तथ्यों से परखा जाना चाहिए।
आज कुछ लोग राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और पूर्वाग्रहों के कारण रोहित मिश्रा की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। किंतु किसी भी व्यक्ति के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले यह आवश्यक है कि पूरे घटनाक्रम, उपलब्ध तथ्यों और विधिक प्रक्रिया को निष्पक्षता से देखा जाना चाहिए!राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में धरातल के नीचे दबे हुए कुंठित मानसिकता से ग्रसित सभी लोग अपने आकाओं और प्रायोजकों से पता करें कि,जिस रोहित मिश्रा पर मिथ्या आरोप मढ़ने की असफल कोशिश में लगे हुए हैं, उस प्रकरण में पहले FIR किसके ऊपर हुई थी,और किस बात पर हुई थी?
अगर सच्चाई यह थी,जो कि विभिन्न सोशल साइटों के माध्यम से अल्प और दूषित ज्ञानियों द्वारा परोसी जा रही है,तो कृपया उसमें यह भी स्पष्ट करें की मारपीट करने वाला अभियुक्त नसेड़ी अपने घर को छोड़कर महीनों फरार क्यों था?
यदि किसी प्रकरण में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, तो यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यह देखा जाए कि प्रारंभिक शिकायत क्या थी, घटनाक्रम किस प्रकार आगे बढ़ा और जांच में क्या तथ्य सामने आए। केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित आधी-अधूरी जानकारियों के आधार पर किसी के चरित्र या व्यक्तित्व का आकलन करना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।
भारतीय जनता पार्टी विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन है। ऐसे संगठन का नेतृत्व ,किसी भी दायित्व पर निर्णय लेते समय उपलब्ध तथ्यों, संगठनात्मक मूल्यांकन और कार्यकर्ता के योगदान को ध्यान में रखता है। रोहित मिश्रा पर पुनः विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें युवा नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपा जाना इस बात का संकेत है कि संगठन ने अपने स्तर पर सभी आवश्यक पहलुओं पर विचार किया।
सभी कार्यकर्ताओं का भी दायित्व है कि व्यक्तिगत कटुता या दुष्प्रचार के बजाय सत्य, संगठन और सकारात्मक राजनीति का साथ दें। व्यक्ति आते-जाते हैं, लेकिन संगठन, विचार और कार्यकर्ता का सम्मान सर्वोपरि रहता है।
सत्य की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि उसे बार-बार सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। समय स्वयं उसका सबसे बड़ा साक्षी बन जाता है।
DrRohit Mishra