27/04/2026
त्रिविध पावनी वैशाख बुद्ध पूर्णिमा (01 मई 2026, दिन-शुक्रवार) के मंगल अवसर पर आप सभी धम्म प्रेमी बन्धुओं को हार्दिक बधाई, मंगल कामनाएं, नमो बुद्धाय।
मित्रों! जैसा कि आप सभी अवगत हैं कि सम्यक सम्बुद्ध, शाक्यमुनि तथागत गोतम बुद्ध के जैविक मानवीय जीवन से संबंधित तीन महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं "जन्म, प्रज्ञा (ज्ञान) की प्राप्ति और मृत्यु (महापरिनिर्वाण दिवस)"से सम्बन्धित त्रिविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा महापर्व आगामी 01 मई को पूरे भू-लोक में समता, स्वतंत्रता, मानवता और अहिंसा के मानवीय परिवेश में करुणा, प्रज्ञा, सील, समाधि के साथ मनाया जाएगा।
प्रत्येक मानव इस पृथ्वी पर एक स्वतंत्र इकाई (बच्चा) के रूप में जन्म लेता है और अपने पूरे जीवन काल के जैविक मानवीय कार्यों को संपादित करते हुए एक सम्यक मानव बनने का प्रयास करता रहता है। मानव बनने के क्रम में ही प्रत्येक मानव जाने /अनजाने में बुद्ध के पंचशील सिद्धांतों का सहज ही पालन करता है। बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग और दस पारमिताओं को अपनाकर मानव मानवता के कार्यों को सृजित करते हुए एक सभ्य मानव समाज का निर्माण करता है।
बुद्ध के पंचशील सिद्धांत विद्यार्थियों को करुणाशील,विवेकशील सीलवान, प्रज्ञावान छात्र बनाते हैं। तथागत का यह धम्म -संदेश कि,मैं केवल मार्गदाता हूं, केवल रास्ता दिखा सकता हूं, चलना आपको स्वयं होगा, विद्यार्थियों को स्वयं पर विश्वास करने तथा किसी भी परिस्थितियों में उन्हें धैर्य के साथ सदैव आगे बढ़ने का हौसला तथा साहस देता है, जिससे वे ऊंची से ऊंची शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रत्यनशील रहते हैं।
प्राकृतिक सत्य को जानने और समझने के लिए सम्यक सम्बुद्ध बुद्ध द्वारा प्रतिपादित "प्रतीत्यसमुत्पाद (Dependent Origination)" बौद्ध धर्म का केंद्रीय सिद्धांत है, जो कार्य-कारण संबंध (Cause and Effect) को दर्शाता है। इसका अर्थ है-"कारण पर आश्रित होकर किसी वस्तु का उत्पन्न होना। यह बताता है कि सब कुछ आपस में जुड़ा है और कुछ भी स्वतंत्र नहीं है
तथागत गोतम बुद्ध द्वारा स्थापित विशेष ध्यान पद्धति "विपासना"आज भी लोगों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ -साथ मंगल मैत्री के मानवीय जैविक मूल्यों युक्त समता का मानव समाज बनाने में सहयोग कर रहा है।
आज जब आधुनिकता और भौतिकता में दुनिया धन, दौलत तथा दिखावा की अंधी आंधी में कहीं खो सी गई, तब ऐसे परिवेश में बुद्ध और बुद्ध के धम्म ज्यादा प्रांसगिक महसूस हो रहे हैं। वैश्विक इतिहास में अहिंसा और मानवता के कार्यों केलिए बुद्ध के धम्म -संदेश आज भी प्रेरणास्रोत बनें हुए हैं।
बुद्ध और उनका पूरा शाक्य परिवार आज वैश्विक इतिहास का महत्वपूर्ण पठनीय और लिखनीय विषय बिंदु बन चुका है वह भी बिना धन, दौलत या दिखावा के। मानवता, करुणा और अहिंसा के विश्व इतिहास के कई पन्नों पर बुद्ध जी की कई पीढ़ियों का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जिसमें पिता- शाक्य शुद्धोधन, माता -महामाया, मौसी -प्रजापति गौतमी, पत्नी- यशोधरा, पुत्र -राहुल आदि लोक प्रसिद्ध हैं।
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