Bihari Lal-B.L.Rai Bauddha

Bihari Lal-B.L.Rai Bauddha बौद्धिष्ट तथा अंबेडकर वादी

💐💐🎂 सम्पूर्ण विश्व 🌎में 💡मानवता का संदेश देने वाले,मानव कल्याण के मार्गदाता, विश्व के पहले वैज्ञानिक 💐सत्य,💐 अहिंसा💐, न्...
01/05/2026

💐💐🎂 सम्पूर्ण विश्व 🌎में 💡मानवता का संदेश देने वाले,मानव कल्याण के मार्गदाता, विश्व के पहले वैज्ञानिक 💐सत्य,💐 अहिंसा💐, न्याय, 💡बंधुत्व, समानता, यथार्थ, वैज्ञानिककता,नास्तिकता, प्रत्यक्षवाद,प्रमाणवाद,पंचशील सिद्धांत, करूणा,मध्यम मार्ग एवं अन्य सिद्धांतों व विचारों का प्रतिपादन करने वाले तथा विश्व मे ब्याप्त सभी प्रकार की समस्याओं व दुखों के निवारण हेतु उपाय बताने वाले, विश्व के प्रकाश पुंज💥, करूणा के महासागर तथागत गौतमबुद्ध जी की 🎂जयन्ती🎂 के अवसर पर विश्व के सभी धम्म जनों को बुद्ध जयंती की हार्दिक बधाई।
🖊️ बी.एल.बौद्ध/नास्तिक🖋️
*सम्पूर्ण विश्व में मानवता, शांति, समानता, स्वतंत्रता, भाईचारे का सन्देश देने वाले करुणा के महासागर तथागत गौतम बुद्ध की 2568 वीं जयंती (बुद्धि पूर्णिमा) के शुभ अवसर पर आप सभी सम्मानित जनो को हार्दिक मंगलकामनाएं एवं बधाई।
*तथागत गौतम बुद्ध के विचार, आज विश्व में व्याप्त समस्याओं के समाधान का माध्यम हो सकते है।
*बुद्ध के जिस महान विचार ने पूरी दुनिया में वैज्ञानिक सोच एवम् खोज को जन्म दिया कि दुनिया में अगर कोई दुख अथवा समस्या है , तो निश्चित रूप से उसका कोई न कोई कारण है , यदि उसके कारण का पता लगा लिया जाय तो उसका निवारण भी निश्चित है बस हमें उचित मार्ग की खोज करनी होती है।*
*आज लोग तमाम समस्याओं को लेकर दुखी है, (समस्याएं निजी एवम् सामाजिक दोनों प्रकार की हो सकती है) , बुद्ध उनका मार्गदर्शन कर सकते है अगर वे स्वयं इसके लिए तैयार है।*आज इस पावन अवसर पर हम बुद्ध के विचारो को जानने एवम् उनका अनुकरण करने का संकल्प करे , यही इस बुद्ध जयंती के अवसर पर बुद्ध के प्रति हमारा असली सम्मान होगा।*
*दुनिया में जब जब दुख अथवा समस्याएं बढ़ेगी, बुद्ध स्वयं प्रासंगिक होते चले जाएंगे।*
*"लेकिन हमें हमेशा एक बात याद रखनी चाहिए कि तबीयत डॉक्टर द्वारा दी गई दवा खाने से ठीक होती है डॉक्टर को अगरबत्ती और धूप बत्ती लगाने से तबीयत ठीक नहीं होगी।"*
*विश्वासी बनो अंधविश्वासी नहीं।*
*अपना दीपक/प्रकाश /स्वामी स्वंम बनो।*
🙏नमो बुद्धाय,जय भीम ,जय भारत जय संविधान🙏🙏

👉जानवरों से भी बदतर जीवन जीने वाले शूद्रों(एस.सी.एस.टी.ओ.बी.सी.)को इंसान की तरह जीवन जीने का अधिकार दिलाने वाले,विश्व ज्...
15/04/2026

👉जानवरों से भी बदतर जीवन जीने वाले शूद्रों(एस.सी.एस.टी.ओ.बी.सी.)को इंसान की तरह जीवन जीने का अधिकार दिलाने वाले,विश्व ज्ञान के प्रतीक,आधुनिक भारत के निर्माता व पथ प्रदर्शक
👉विश्व विख्यात लेखक,महान दूरदर्शी,महान विद्वान,विश्व विख्यात संविधान विशेषज्ञ,सूर्यसम,अल्पसंख्यकों को सम्पूर्ण अधिकार दिलाने वाले,रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना में अहम योगदान देने वाले,महान समाजसेवी,समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री,दार्शनिक,इतिहासकार,विज्ञानवादी,तर्कशास्त्री
👉दामोदर घाटी बांध,हीरा कुंड बांध,सोन नदी बांध बिजली बनाने के ग्रिड सिस्टम आदि में योगदान,
👉श्रम मंत्री के रूप में काम के आठ घंटे करवाने में योगदान
👉हिलाओ के सशक्तीकरणके लिए हिन्दू कोड बिल का निर्माण💐भारत के प्रथम कानून मंत्री,
👉विश्व के सबसे बड़े संविधान भारतीय संविधान निर्माता💐गांधी के जीवनदाता💐नारी के मुक्तिदाता,शोषित पीड़ितों की हजारों वर्षों की गुलामी की बेड़ियों को काटने वाले
👉विश्वरत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर जी की 🌹135 वीं💐 जयंती की आप सभी को हार्दिक धम्म बधाई🙏बाबा साहब जी🌹को कोटि-कोटि नमन एवं अनुशरण करता हूँ। 🙏जिन्होंने आज ये शान ओ शौकत से जिंदगी जीने के अधिकार दिलवाए।*
*🙏🏻जय भीम 💐नमो बुद्धाय💐जय संविधान💐
आपका अंबेडकरवादी-बुद्धिष्ट धम्म उपासक÷बी. एल. बौद्ध (ATHEIST)
👉ईश्वर व भाग्य पर विश्वास,अंधविश्वास,पाखंड,कर्मकांड,मूर्ति पूजा,अवैज्ञानिकता,अशिक्षा,अज्ञानता ही पिछड़ेपन का मूल कारण है।अंबेडकरवादी बुद्धिष्ट एथिष्ट बने👏

🎂★💐 राष्ट्रपिता ज्योतिबा राव फूले"🎂★💐👏जी की जयंती के अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन👏            *भारतीय समाज में महिला शिक...
11/04/2026

🎂★💐 राष्ट्रपिता ज्योतिबा राव फूले"🎂★💐
👏जी की जयंती के अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन👏

*भारतीय समाज में महिला शिक्षा के पथ प्रदर्शक"*सामाजिक समानता, न्याय, बंधुता,भाईचारे के लिए और अन्याय, अत्याचार, शोषण, छुआछूत, जातिवाद, ईश्वर, धर्म, अंधविश्वास, पाखंड, कर्मकांड, ढोंग के खिलाफ आजीवन संघर्ष करते रहे
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ज्योतिराव गोविंदराव फेले, जिन्हें ज्योतिबा फूले के नाम से जाना जाता है, का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उनका विवाह 1840 में सावित्रीबाई फुले से हुआ था। सावित्रीबाई फूले, जिनका जन्म 3 जनवरी 1831 को नयागांव, सतारा जिले में हुआ था, भारतीय महिला शिक्षा की प्रेरणा बनीं। ज्योतिबा फुले ने अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य शिक्षा को बनाया और उन्होंने समाज के अछूतों, शूद्र वर्गों के लिए विशेष रूप से शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।

★1848 में, ज्योतिबा और सावित्रीबाई ने पुणे में पहला ★बालिका विद्यालय★ की स्थापना की। इस अभियान ने उन्हें भारी सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें न केवल समाज बल्कि अपने ही परिवार द्वारा भी विरोध झेलना पड़ा। फिर भी, उन्होंने अपने मिशन को नहीं छोड़ा और 1851 तक उन्होंने★ तीन ★और स्कूलों की स्थापना की।

★ज्योतिबा ने महिलाओं और निम्न जातियों की शिक्षा के साथ-साथ उनके सम्मान और समाज में समानता के लिए भी काम किया। 1873 में, उन्होंने◆ 'सत्यशोधक समाज' ◆की स्थापना की, जिसका उद्देश्य जातिगत भेदभाव और अन्याय के खिलाफ लड़ना था। सावित्रीबाई फूले ने★ नारी शिक्षा ★के साथ-साथ★ विधवा पुनर्विवाह, ★स्त्री सशक्तिकरण★ और ★बाल विवाह★ के विरोध में भी काम किया। उन्होंने महिलाओं के लिए एक ★आश्रम ★भी खोला जहां★ विधवाओं और अनाथ लड़कियों ★को आश्रय और शिक्षा प्रदान की जाती थी।

★ज्योतिबा फूले का निधन 28 नवंबर 1890 को हुआ, वहीं सावित्रीबाई फुले का निधन 10 मार्च 1897 को हुआ। अपने जीवनकाल में, दोनों ने महिला शिक्षा और समाज में समानता की दिशा में अमिट योगदान दिया। उनका संघर्ष और उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी भारत में सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक हैं। उनकी विरासत आज भी प्रेरणा का स्रोत है, और उनके द्वारा स्थापित मूल्य और सिद्धांत समाज में आज भी गूंजते हैं।
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👏राष्ट्पिता ज्योतिबा राव फूले जी अमर रहे👏

: 👉आज【15 मार्च】👈💐बहुजन समाज को जगाने वाले, बहुजन समाज के महापुरुषों को एवं उनकी विचारधारा, सिद्धान्तों को जन-जन तक पहुंच...
15/03/2026

: 👉आज【15 मार्च】👈💐बहुजन समाज को जगाने वाले, बहुजन समाज के महापुरुषों को एवं उनकी विचारधारा, सिद्धान्तों को जन-जन तक पहुंचाने वाले, बहुजनों को राजनीतिक रूप से संगठित और उनमें राजनीतिक चेतना उत्पन्न करने वाले💐 युगपुरुष, बहुजन महानायक, सामाजिक तथा आर्थिक समानता व सामाजिक न्याय, धार्मिक स्वतंत्रता एवं बन्धुत्व के समर्थक, बहुमुखी प्रतिभा के धनी और विद्वान पुरोधा मान्यवर साहब कांशीराम जी की 🕯️जयन्ती (15 मार्च) 🕯️के अवसर पर सभी सम्मानित जनो को हार्दिक बधाई एवं साधुवाद। 🎂मान्यवर साहब कांशीराम साहब जी🎂💐 की जयंती के अवसर पर उन्हें 🙏🏻कोटि कोटि नमन।💐मान्यवर साहब कांशीराम जी अमर रहे 💐 जय भीम💐,नमो बुद्धाय,💐जय संविधान,💐 जय भारत🌹

🛞👉10 मार्च 1897 में जन्मी बहुजन क्रांति की प्रथम महिला, ध्वजवाहक, मानवता की प्रचारक, सामाजिक क्रांति की अग्रदूत, स्त्री ...
10/03/2026

🛞👉10 मार्च 1897 में जन्मी बहुजन क्रांति की प्रथम महिला, ध्वजवाहक, मानवता की प्रचारक, सामाजिक क्रांति की अग्रदूत, स्त्री संघर्ष की मसाल🌹प्रथम महिला शिक्षिका🌹 बहुजन नायिका,🙏 राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले जी🙏 के परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि 👏🕯️💐
👉भारत के शोषित, वंचित व पिछड़ों, महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाने वाली सामाजिक क्रांति की पुरोधा शिक्षा की ज्योति कभी ना बुझने देने वाली क्रांतिकारी मसाल थी माता सावित्रीबाई फूले जी।
राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले जी ने शोषितों, और दलितों, पिछड़ों, महिलाओं को भेदभाव, पाखंडवाद, से मुक्ति दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया और शिक्षा की ज्योति जलाई ।
साथियों हम ऐसी महान विभूति, मानवता की समर्थक माता सावित्रीबाई फूले जी को नमन करते है💐💐💐

💐💐💐संत शिरोमणि रविदास जी जयंती💐💐💐 के अवसर पर उन्हें कोटि कोटि नमन।ऐ👉🏿सा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो स...
01/02/2026

💐💐💐संत शिरोमणि रविदास जी जयंती💐💐💐 के अवसर पर उन्हें कोटि कोटि नमन।
ऐ👉🏿सा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसै, रविदास रहे प्रसन्न॥
जा देखे घिन शूटिंगै, नरक कुंड में बास,
प्रेम भगति सोन ओधरे, प्रगतित जन रैदास।।

'रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीचा,
नकर कूं नीच करि दारी है, ओछे करम कीच'।।

जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात'।।
👉अपनी बौद्धिक ज्ञान, तर्क, यथार्थ, दूरदर्शिता, विलक्षण प्रतिभा से समाज में जागृति का ज्ञान प्रकाश फैलाकर मानवता की राह दिखाने वाले💐 संत शिरोमणि गुरु रविदास जी 💐महाराज की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन व सभी को हार्दिक बधाई ।

*👩‍🦰👨‍🦰 आप सभी को और देश-विदेश,दुनिया में रहने वाले सभी लोगों को बाबासाहेब बोधिसत्व डा.भीमराव अंबेडकर जी द्वारा लिखित दु...
26/01/2026

*👩‍🦰👨‍🦰 आप सभी को और देश-विदेश,दुनिया में रहने वाले सभी लोगों को बाबासाहेब बोधिसत्व डा.भीमराव अंबेडकर जी द्वारा लिखित दुनिया के सबसे बड़ा संविधान -🌹📘भारतीय संविधान 📘🌹के लागू होने के 🛞 76 वें 🛞🕯️ गणतंत्र दिवस 🕯️की हार्दिक🙏 धम्म कामनाएं व बंधाई 🙏

👉26 जनवरी 1950 को भारतीय स्वतन्त्र गणराज्य आज़ाद भारत का संविधान लागू हुआ जिसमें हम भारत के लोगों को संवैधानिक मौलिक अधिकार प्राप्त हुए!*

*👩‍🦰👨‍🦰 क्या हम जानते हैं ?????? कि भारत का संविधान 📖 भारतीय नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार प्रदान करता है।*

*🔴🔴 सविधान में पहले 7 प्रकार के मौलिक अधिकार थे।*
*लेकिन संविधान संशोधन के जरिए सम्पत्ति 🏚️🏬 के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटा दिया गया है।*

*🍏🍏 इन मौलिक अधिकार का वर्णन संविधान के तीसरे भाग में अनुच्छेद 12 से 35 में किया गया है।*

*💎💎 इसमें अनुच्छेद 13 बहुत ही महत्वपूर्ण है इसमें कहा गया है कि संविधान लागू होने अर्थात 26 जनवरी 1950 से पूर्व की वे सभी विधियां शून्य हो जाएगी जो कि मौलिक अधिकार से असंगत होगी , अर्थात संविधान लागू होने के उपरांत भारतीय समाज में जो तमाम नियम, कायदे, कानून थे वो सब शून्य हो जाएंगे यदि मौलिक अधिकारों के विरोध में है।💎💎*

⏩ *हमारे देश भारत का संविधान 📖 में दिए गए मौलिक अधिकार इस प्रकार है:-*

*1.👉 समता का अधिकार! (अनुच्छेद 14 से 18 )*

*2.👉स्वतंत्रता का अधिकार! (अनुच्छेद 19 से 22)*

*3.👉 शोषण के विरुद्ध अधिकार!(अनुच्छेद 23 और 24)*

*4. 👉धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार! (अनुच्छेद 25 से 28 )*

*5. 👉सांस्कृतिक एवम् शैक्षिक अधिकार! (अनुच्छेद 29 से 31)*

*6.👉 संवैधानिक उपचारों का अधिकार! (अनुच्छेद 32से 35)*

‌ *📖 संविधान और समाज!👨👩*
*📖📚 भारत का संविधान दुनिया में शायद ऐसा इकलौता संविधान है, जिसका सीधा टकराव अपने ही सामाजिक मूल्यों से रहा है। जैसे की हमारा संविधान सभी को बराबर मानता है, लेकिन समाज एक-दूसरे को छोटा-बड़ा मानता है।* अभी
*📖📚👨👩 भारत का संविधान छुआछूत को अपराध मानता है, लेकिन समाज उसे अपनी 'प्यूरिटी' को बचाए रखने के लिए जरूरी मानता है।*
*📖 📚 भारत का संविधान वैज्ञानिक सोच विकसित करने की बात करता है, लेकिन समाज ईश्वर,धर्म(जो व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास,विचार हैं पर वह उसे समाज पर थोपना चाहता हैं) और अंधविश्वास ,पाखंड , ढोंग व कर्मकांड को अपना प्राण मानता है।*
*👨👩 इस तरह, हम कह सकते हैं कि सभी तरह के जातीय, धार्मिक ,सांप्रदायिक और लैंगिक संघर्ष में शामिल लोग संविधान के दोनों छोर पर पाए जाने वाले लोग हैं। और यह संघर्ष दरअसल संविधान को न मानने और मानने वालों के बीच का ही संघर्ष है।*
*📖👨👩 हां, जब कभी संविधान समर्थकों का पलड़ा भारी रहा, देश आगे बढ़ा और हम आधुनिक दुनिया का हिस्सा लगने लगे।*
*पर जब संविधान विरोधी खेमा मजबूत हुआ है, तो देश उल्टी यात्रा पर निकल गया।*
*😁😁 सबसे मजेदार यह कि इस उलट यात्रा में लंबी-लंबी अंधेरी सुरंगें हैं, जिनसे गुजरते हुए यात्री उत्साह से चिल्ला भी रहे हैं। वैसे भी, हम अंधेरे में रोमांचित होने वाले समाज तो हैं ही।*
*👨‍🦰👩‍🦰 आप इंतजार कीजिए, दूसरी तरफ जाने वाली इसी नाम की अप ट्रेन भी आने वाली है, जो रोशनी की तरफ लेकर जाएगी।*
*👩‍🦰👨‍🦰 भारत का संविधान को समझो और समझाओ, पढ़ो और पढ़ाओ, अपने आपको और देश को आगे ले जाओ।*
🙏*बाबासाहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर जी अमर रहें 🙏जय भारत 🙏जय संविधान!!*🙏

★◆★बहुजन समाज की आन -बान -शान, सामाजिक परिवर्तन की महानायिका,आदरणीय आयरन लेडी ,शेरनी 🌹🙏बहन कुमारी मायावती जी🌹🙏, बहुजन सम...
15/01/2026

★◆★बहुजन समाज की आन -बान -शान, सामाजिक परिवर्तन की महानायिका,आदरणीय आयरन लेडी ,शेरनी 🌹🙏बहन कुमारी मायावती जी🌹🙏, बहुजन समाज की बेटी तुम्हारे शोषण का शिकार नही है, वह बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारत के सबसे बड़े प्रदेश की 4-4 बार मुख्यमंत्री बनकर तुम पर शासन भी कर सकती है, ऐसा उदाहरण पेश करने वाली,बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के सिद्धांत पर चलने वाली, बहुजन महानायकों, व.बहुजन नायिकाओं के विचारों पर चलने वाली,बहुजन समाज के महान महिलाओं व महापुरुषों के मिशन को आगे बढ़ाने वाली, मनुवाद को अपने पैरो की जूती से रौंदने वाली,पितृसत्ता अहंकार को चुनौती देने वाली, बहुजन विरासत को स्थापित करने वाली, बहुजन नायको की मूर्तियां स्थापित कर उन्हें सम्मान देने वाली,कानून का राज स्थापित करने वाली, बुद्ध की अनुयायी, करोड़ों शोषितों पीड़ितों दलितों के खातिर अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली,लोकतंत्र का करिश्मा, सामाजिक परिवर्तन की महानयिका आदरणीय बहन मायावती के जन्मदिन की हार्दिक मंगलकामनाये !!!🎂🎂⚘️⚘️
✊️आदरणीय बसपा सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री आयरन लेडी #भारत_की_बेटी_💐मायावती जी 💐को जन्म दिन की बहुत -बहुत बधाई एवं धम्मकामनाएं।

🙏नमो बुद्वाय,💐जय भीम,💐जय संविधान,💐 आयरन लेडी बहन जी जिन्दाबाद🙏

🎂सावित्रीबाई  फुले 🎂(3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) के जन्म दिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन💐🙏🏿🌹भारत की प्रथम महिला शिक्षिका,...
03/01/2026

🎂सावित्रीबाई फुले 🎂(3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) के जन्म दिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन
💐🙏🏿🌹भारत की प्रथम महिला शिक्षिका,🙏🏿 समाज सुधारिका एवं मराठी कवियत्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। वे भारत की प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना किया।
👉🏻सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था।
👉🏻सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। राष्ट्रपिता ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।
👉🏻वे स्कूल जाती थीं, तो विरोधी लोग पत्थर मारते थे। उन पर गंदगी फेंक देते थे। आज से 170 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था कितनी सामाजिक मुश्किलों से खोला गया होगा
👉🏻सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म के लिये उन्होंने काम किया। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं।
👉🏻3 जनवरी 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्होंने महिलोओ के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया, वह भी पुणे जैसे शहर में।आज औरतों को उन्हें आदर्श मानना चाहिए
👉🏻परिनिर्वाण
10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का परिनिर्वाण हो गया। प्लेग महामारी में सावित्रीबाई प्लेग के मरीज़ों की सेवा करती थीं। एक प्लेग के संक्रमण से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी प्लेग हो गया और इसी प्लेग बीमारी के कारण इनकी मृत्यु हो गई।
👉🏻3 जनवरी 2026 को उनके 195 वें जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें कोटि कोटि नमन व सादर आदरांजलि।🙏🏿🌹🙏🏿

🎂Bheema Koregav🎂💐एक जनवरी ‘‘शौर्य दिवस’’💐👉1 जनवरी को हम नववर्ष मनाते है आपस में बधाई देते है लेकिन 1 जनवरी बहुजन समाज के...
01/01/2026

🎂Bheema Koregav🎂
💐एक जनवरी ‘‘शौर्य दिवस’’💐
👉1 जनवरी को हम नववर्ष मनाते है आपस में बधाई देते है लेकिन 1 जनवरी बहुजन समाज के लिए ऐतिहासिक रूप से गौरवपूर्ण दिन है। हमारे समाज में बहुत ही कम लोग है जिनको यह बात मालूम है कि 1 जनवरी को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
19वीं सदी के प्रारम्भ में पुणे के ब्राह्मण राजा वाजीराव पेशवा का शासन मनुस्मृति के कानून के आधार पर चलता रहा था। महाराष्ट्र की अछूत जातियों के साथ जाति-पाति, छुआ-छूत ही नहीं शारीरिक रूप से भी घोर अत्याचार किया जा रहा था। पेशवा की क्रूरता, उदंडता और नीचता ने सभी हदें पार कर डाली। कुछ अंग्रेज शासकों ने इन अत्याचारों को रोकने का प्रयास किया लेकिन कुछ राजा उनके गुलाम थे इसलिए वे ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करते थे।
महाराष्ट्र की अंग्रेजी सेना में महार सैनिकों की एक महार रेजीमेंट थी। महार रेजीमेंट के महार सैनिक वाजीराव पेशवा के अत्याचारों से काफी कुपित थे और उनके अंदर उस अत्याचार को समाप्त करने की एक चिंगारी सुलग रही थी। संयोग से अंग्रेजों और पेशवा में किसी बात पर अनबन हुई अंग्रेजों द्वारा पेशवाओं के अत्याचारों से पीड़ित महार रेजीमेंट के चुनिंदा सैनकों को तैयार कर पेशवा को सबक सिखाने की योजना बनाई, महार सैनिकों को मनमांगी मुराद मिल गई। उनके दिमाग में पैट्रिक हेनरी के वे शब्द गूंज रहे थे कि ‘‘अब हमें छुआ-छूत और जातीय अत्याचारों की गुलामी से मुक्ति चाहिए या फिर मौत।’’
दिसम्बर माह 1817 में उन्होंने पेशवा पर हमला करने की एक अंतिम योजना बनाई। महार रेजीमेंट की लाइट इन्फैंट्री की 1 और 2 बटालियन तैयार हुई। अंग्रेजों ने उनकी पूरी मदद की थी। यह युद्ध अंग्रेजी कैप्टन फ्रांसिस स्टौनसन के नेतृत्व में लड़ा गया। कहते है कि ‘‘यदि चार मैमनों का सेना पति शेर हो तो वे शेर की तरह लड़ते हैं, और सौ शेरों का सेनापति यदि कुत्ता हो तो सौ शेर कुत्तों की मौत मारे जाते हैं।’’ यहाँ वही हुआ। एक तरफ दुनिया क्रिसमस का जश्न मनाने में मशगूल थी। दूसरी तरफ महार रेजीमेंट की बटालियन कमर कस के पेशवा की तरफ कूंच कर रही थी। सभी सैनिक भूख और प्यास के व अधिक पैदल चलकर काफी थके हुए थे लेकिन हौसलें आसमानी उड़ान भर रहे थे। वाजीराव पेशवा के पास एक बड़ी सैन्य ताकत थी। उसके पास 20 हजार सवार सैनिक और लगभग 10 हजार पैदल सैनिक थे। इतनी बड़ी शक्ति को नेस्तनाबूद करने के लिए मात्र 500 महार अछूत सैनिक अपने अधम्य साहस और हौसलें के बल पर तैयार थे।
1 जनवरी 1818 का दिन था। दुनिया नए साल के स्वागत के साथ जश्न मना रही थी और महार सैनिक नया इतिहास रचने का चक्रव्यूह रच चुके थे। यह युद्ध पुणे के कोरेगांव के उत्तर पश्चिम में भीमा नदी के तट पर लड़ा गया। 1 जनवरी 1818 को युद्ध हुआ क्रूर पेशवा की काली धरती को महार सैनिकों ने उन्ही के रक्त से लाल कर दिया था। महार सैनिको ने पेशवा के लगभग 30 हजार सैनिकों की अटूट शक्ति को तोड़ कर रख दिया। वाजीराव पेशवा के सेना को महार सैनिकों ने सिर्फ धूल ही नहीं चटाई उनको धूल में मिला दिया और वाजीराव पेशवा को बंदी बना लिया। शूद्र वीरों की उस बहादुरी को देखकर अंग्रेजों ने भी दांतों तले ऊँगली दबा ली थी। 500 महार सैनिक बम्बई के मूलनिवासी थे।
इस युद्ध में मात्र 22 महार सैनिक शहीद हुए थे। दुनिया ने इस युद्ध के महार शूरवीरों के अधम्य साहस और वीरता के गीत गाये लेकिन भारत के मनुवादियों की आँखें सूज कर कुप्पा हो गयी। यह युद्ध भारत के इतिहास का एक जागीर या राज्य व रियासत जीतने का युद्ध नहीं था, यह युद्ध तो सदियों पुरानी जाति-व्यवस्था की जंजीरों को तोड़ने का अछूतों द्वारा हौंसलों के साथ किया गया एक संघर्ष था। इस घटना ने भारत की जाति-व्यवस्था की नींव हिलाकर रख दिया था। इस घटना से महात्मा ज्योतिबाराव फुले जैसे महान सामाजिक क्रांतिकारियों को एक बड़ी प्रेरणा मिली थी और उनके हौंसले बुलंद थे।
1851 में कोरेगांवमें अंग्रेजों ने 22 महार सैनिकों की याद में एक विजय स्तम्भ की स्थापना करवायी और वही महार सैनिकों की बहादुरी का जश्न मनाया था। वह स्तम्भ आज भी हमारे पूर्वज सैनिकों के जाति-व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष की गाथा सुनाता हुआ हमें प्रेरणा देता है। हमारे 22 बहादुर शहीद महार सैनिकों को श्रद्धांजलि देने और इस घटना के आधार पर ही पूरे देश में से मनुवादी राज को समाप्त करने के लिए प्रेरणा सन्देश देने के लिए प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को बाबा साहेब डा. बी. आर. अम्बेडकर जी भी कोरेगांव जाय करते थे। इस दिन बाबा साहेब डा० अम्बेडकर अछूतों को सम्बोधित करते हुए कहते थे कि आज संकल्प लो कि इसी तरह संघर्ष करके हम पुरे देश मे से ब्राहमन राज को समाप्त करेगें।
👏👏👏💥1 जनवरी💥🏹⚔️भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस🗡️⚔️ की सभी को हार्दिक धम्म बधाई👏👏👏
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