09/12/2025
Udit Narayan Shukla भाई जी सत्य के प्रति अखंड प्रेम मेरे सभी कर्मों का प्राण है। सत्य संसार में एक मात्र निर्विवाद, सार्वभौमिक और अभय प्रदान करने वाला सार्वकालिक धर्म है। उसको जन्म से ही पाया है।
जितना अंतःकरण में उसको देखता हूँ, उतना समझ पाता हूँ कि उसकी कीमत पर और कुछ नहीं पाना है। उसको पाने के लिए यहाँ तक पहुँचने में कई जन्मों की यात्रा हुई है।
संसार में सत्य से अधिक मूल्यवान क्या है, जिसको पाने के लिए सत्य को छोड़कर इधर -उधर, कहीं जाना- भागना चाहिए? मुझे यह दिखता है कि संसार में सत्य से मूल्यवान ऐसा कोई पद,पदार्थ नहीं है, जिसे प्राप्त करने के लिए सत्य का त्याग करके उसे पाने का प्रयत्न किया जाना चाहिए।
जब, जहाँ,जिस विचार, कार्य में हैं, वही और वहीं आनंद है।
सभी सद्विचार उसी सत्य से जन्म और आधार पाते हैं और सभी कर्म उसी सत्य में समाहित हो जाते हैं।
यह जानकर कोई भौतिक चिंता नहीं सताती है।
जीवन प्रयोग है। साक्षी भाव साधने की यात्रा है। अंतः प्रेरणा ही प्रथम व अंतिम मार्गदर्शक और प्रमाण है। उसी के अनुसार कार्य करता हूँ।
सत्य की सहज प्रीति के कारण किसी स्थिति, परिस्थिति का साक्षात्कार करने में कोई भय भी नहीं है।
आपकी मेरे लिए चिंता भ्रातृभाव के कारण है और स्वाभाविक है।
परंतु, मुझे न किसी से कुछ पाने की लालसा है और न किसी को कुछ देने की विवशता है। अतः किसी के जाल में फँसने की संभावना भी अति न्यून है। बहुत कम संभावना है कि किसी की दुष्प्रेरणा मात्र से हम किसी निरर्थक कार्य में उतर जाएं।
जीवन यात्रा में जगाने, चलाने के लिए आप जैसे भाई, मित्र, शुभचिंतक और गुरुजन तो हैं ही। आप सबका आभारी हूँ।