19/04/2026
उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर एकता मंच संबद्ध ऐक्टू ने मथुरा में किया अपना प्रथम जिला सम्मेलन
19 अप्रैल 2026
मथुरा : उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर एकता मंच (संबद्ध - ऐक्टू) ने मथुरा में अपना प्रथम जिला सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया। कार्यक्रम में जिले भर से आए विभिन्न सफाई कर्मचारियों और सफाई के कार्य में लगे चालकों समेत अलग–अलग कैटेगरी के कॉन्ट्रैक्ट और पक्के कर्मचारियों ने बढ़–चढ़कर भागीदारी की। सम्मेलन में मथुरा और आसपास के इलाकों में मजदूरों की समस्याओं पर गंभीर विचार और बहस के बाद एक 15 सदस्यीय जिला कमिटी का गठन किया गया। कामरेड प्रीतम सिंह को अध्यक्ष एवं कामरेड उत्तम चंद सहजाना को महामंत्री के रूप में चुना गया।
*निजीकरण–आउटसोर्सिंग के जरिए योगी सरकार कर रही है मजदूरों का शोषण*
ऐक्टू के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष कामरेड विजय विद्रोही ने सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मजदूरों के मुद्दों के प्रति उदासीन है। नोएडा के मजदूरों का दमन और मुख्यमंत्री–श्रममंत्री के द्वारा दिए गए गलत बयान इस बात को साफ बताते हैं कि योगी सरकार की वफादारी कॉरपोरेट मुनाफाखोरों के साथ है। केंद्र और राज्य में बैठी भाजपा सरकारें जल्द से जल्द मजदूर–विरोधी श्रम–कोड कानूनों को लागू करना चाहती हैं। इन श्रम कोड कानूनों के पूर्ण रूप से लागू हो जाने के बाद 12 घंटे के कार्यदिवस को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। मजदूरों को आजीवन 'फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट ' में फंसाकर कॉन्ट्रैक्ट पर ही काम लिया जाएगा। श्रम कोड कानूनों के माध्यम से मोदी–योगी सरकार, मजदूरों के यूनियन बनाने और स्ट्राइक करने के अधिकार को भी खत्म कर देना चाहती है। बाबा साहब अंबेडकर के संविधान पर हमला करके और 8 घंटे के कार्यदिवस जैसे प्रावधानों को खत्म कर, भाजपा सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है। अपने संबोधन के अंत में कामरेड विजय विद्रोही ने कहा कि उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर एकता मंच, मोदी–योगी सरकार की इन तमाम कोशिशों के खिलाफ और मजदूर हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर और तैयार रहेगा।
सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों ने मथुरा के कर्मचारियों की समस्याओं को मंच से साझा किया और मानेसर–नोएडा–भिवाड़ी इत्यादि जैसी जगहों पर चल रहे आंदोलनों के साथ एकजुटता भी जाहिर की।
ऐक्टू के सचिव कामरेड अभिषेक ने कहा कि संघ–भाजपा की सरकार बातचीत के जगह दमन और हिंसा में विश्वास रखती है। एक तरफ तो धर्म–संप्रदाय के नाम पर मजदूरों को बांटकर उनके सारे अधिकार छीने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अदानी–अंबानी जैसे पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट दे दी गई है। मजदूर अधिकारों और सम्मान के संघर्षों को सफल बनाने की गारंटी इसी बात में निहित है कि हम सारे भेदभाव को भुलाकर मजदूर–वर्ग की एकता को मजबूत करें।