Hindustani Academy U.P. prayagraj

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हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज द्वारा प्रकाशित ’हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक पत्रिका का आगामी जुलाई-सितम्बर 2026 अंक महागुरू ...
13/04/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज द्वारा प्रकाशित ’हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक पत्रिका का आगामी जुलाई-सितम्बर 2026 अंक महागुरू गोरखनाथ पर केन्द्रित विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।
उक्त विषय एवं उप विषय पर केन्द्रित आलेख आमंत्रित हैं ।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0 प्र0 प्रयागराज के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित 99 वें स्थापना दिवस समारोह एवं विद्वत सम्मान सम...
27/03/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0 प्र0 प्रयागराज के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित 99 वें स्थापना दिवस समारोह एवं विद्वत सम्मान समारोह में दिनांक 29 मार्च 2026 रविवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठीविषय: “हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष”स्थान: छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर न...
15/03/2026

द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
विषय: “हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष”
स्थान: छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर नगर
तिथि: 15 मार्च 2026
आयोजक: हिन्दुस्तानी एकेडमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
एवं रामसहाय राजकीय महाविद्यालय, शिवराजपुर, कानपुर नगर
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र का शुभारम्भ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ, जिसमें प्रो. डॉ. ज्योति किरण एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल जी को शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
अपने उद्बोधन में प्रो. डॉ. ज्योति किरण ने मुद्रण कला की उत्पत्ति से लेकर उदन्त मार्तण्ड तक हिंदी पत्रकारिता के प्रारम्भिक विकास पर प्रकाश डालते हुए भारतेन्दु हरिश्चंद्र, गणेश शंकर विद्यार्थी के प्रताप तथा माखनलाल चतुर्वेदी के कर्मवीर के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने राहत इंदौरी की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए पत्रकारिता के मूल उद्देश्य—सत्य के निर्भीक प्रकटीकरण—पर बल दिया।
वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल जी ने हिंदी पत्रकारिता की यात्रा को नदियों के रूपक के माध्यम से स्पष्ट करते हुए गंगा और नर्मदा का उदाहरण दिया। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद, भगत सिंह, माखनलाल चतुर्वेदी एवं के. एल. सहगल से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उस दौर की पत्रकारिता में वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोपरि बताया। अली सरदार जाफ़री की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची पत्रकारिता संवेदना और साहस से ही जीवित रहती है। सत्र का समापन स्मृति-चिह्न प्रदान कर किया गया।
द्वितीय दिवस के तृतीय तकनीकी सत्र का प्रारम्भ डॉ. नेहा मिश्रा, प्रो. दीपीका कटियार, जितेन्द्र सिंह एवं अन्य अतिथियों के सम्मान के साथ हुआ। डॉ. नेहा मिश्रा ने पत्रकारिता की सामाजिक भूमिका एवं महिला सशक्तिकरण में उसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए नई शिक्षा नीति के नैतिक क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई। जितेन्द्र सिंह (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) ने हिंदी भाषा के घटते आकर्षण पर चिंता व्यक्त की, जबकि प्रो. दीपीका कटियार ने स्वतंत्रता संग्राम में पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए पत्रकारिता को जनजागरण का प्रभावी माध्यम बताया। सत्र के अंत में सभी वक्ताओं को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक, उच्च शिक्षा, प्रो. डॉ. बी. एल. शर्मा उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों की सुरक्षा एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए सत्यनिष्ठ एवं निर्भीक पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. अजीत कुमार सिंह (सचिव, हिन्दुस्तानी एकेडमी, उ.प्र., प्रयागराज) ने अपने उद्बोधन में कहा कि डिजिटल युग में समाचारों का प्रसार अत्यंत तीव्र हो गया है। आज की खबर जब तक अगले दिन प्रिंट मीडिया में प्रकाशित होती है, तब तक वह कई बार पुरानी हो जाती है, जिससे पाठकों की संख्या प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि त्वरित प्रसारण की होड़ में समाचारों की सत्यता पर संकट उत्पन्न हो सकता है, अतः जिम्मेदार एवं सत्यापित पत्रकारिता समय की आवश्यकता है।प्राचार्या डॉ. अपर्णा सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
दो दिवसीय समारोह के सफल आयोजन के उपरांत सेमिनार संयोजिका डॉ. सुमन शुक्ला ने सभी को आभार व्यक्त किया एवं प्राचार्य द्वारा स्मृति-चिह्न भेंट किये गये।

14/03/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी की झलकियां एक वीडियो के माध्यम से

द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) विषय: “हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष”हिन्दुस्तानी एकेडमी, उत्तर प्रदेश, प...
14/03/2026

द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) विषय: “हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष”
हिन्दुस्तानी एकेडमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज एवं रामसहाय राजकीय महाविद्यालय, बैरी, शिवराजपुर, कानपुर नगर के संयुक्त तत्वावधान में “हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष” विषय पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) का शुभारम्भ दिनांक 14 मार्च 2026 को प्रातः 10:30 बजे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया गया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के माननीय कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) शशि कपूर (संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, प्रयागराज) एवं प्रो. (डॉ.) दिलीप सरदेसाई (पूर्व प्राचार्य एवं संगठन मंत्री, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अनेक विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत “स्वागतम्” की प्रस्तुति दी गई। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर सम्मान किया गया।
स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) अपर्णा सिंह, प्राचार्य, रामसहाय राजकीय महाविद्यालय ने सभी अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन किया तथा संगोष्ठी के उद्देश्य एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. विनय कुमार पाठक ने हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक परम्परा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य एवं निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने वर्तमान समय में मीडिया की बदलती प्रकृति, तकनीकी हस्तक्षेप, बाजारवाद तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव को पत्रकारिता के लिए चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में तकनीक के साथ मानवीय संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा।
प्रो. (डॉ.) दिलीप सरदेसाई एवं प्रो. (डॉ.) शशि कपूर ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विषय की सामयिकता पर बल दिया और विद्यार्थियों को जिम्मेदार एवं मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता की दिशा में प्रेरित किया।
सरस्वत वक्ता
सरस्वत वक्ता के रूप में पद्मश्री श्री विजय दत्त, निदेशक, माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल ने हिंदी पत्रकारिता के विकास की समयरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने ‘उदन्त मार्तण्ड’ से लेकर आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वकाल में सीमित संसाधनों के बावजूद पत्रकारिता अत्यंत प्रभावशाली थी, जबकि आज संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद प्रभावशीलता में कमी दिखाई देती है। उन्होंने पत्रकारिता को समाज को दिशा देने वाली सशक्त शक्ति बताया।
द्वितीय सरस्वत वक्ता श्री अनुप कुमार शुक्ल, महासचिव, कानपुर इतिहास समिति (स्थापना 1946) ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पंडित जुगलकिशोर शुक्ल एवं ‘उदन्त मार्तण्ड’ के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता त्याग, संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना की भूमि पर विकसित हुई। साथ ही ‘प्रताप’ समाचार पत्र एवं गणेश शंकर विद्यार्थी के योगदान को स्मरण करते हुए उन्होंने पत्रकारिता को राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बताया।
तकनीकी सत्र
उद्घाटन सत्र के उपरान्त आयोजित तकनीकी सत्र में विषय के समकालीन आयामों पर गंभीर विमर्श हुआ।
तकनीकी सत्र के प्रमुख वक्ता श्री फिरोज नकवी, वरिष्ठ पत्रकार (नई दिल्ली/अलीगढ़) रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि पत्रकारिता का मूल स्वरूप सत्य की खोज और जनपक्षधरता रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भगत सिंह द्वारा 1924 में दिल्ली दंगों की ग्राउंड ज़ीरो से की गई रिपोर्टिंग आज की सनसनीप्रधान पत्रकारिता से भिन्न थी। उस समय पत्रकारिता का उद्देश्य जनचेतना जागृत करना था, न कि केवल आकर्षण या TRP बढ़ाना। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी पत्रकारिता का समग्र और प्रामाणिक इतिहास अभी पूर्ण रूप से लिखा जाना शेष है।
तकनीकी सत्र में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी ने “हिन्दी की क्रांतिकारी पत्रकारिता” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की वैचारिक पत्रकारिता पर प्रकाश डाला गया।
अंत में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक, लोकसभा एवं राज्यसभा से संबद्ध श्री अरविंद कुमार सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में कई रियासतों ने ‘प्रताप’ जैसे निर्भीक समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगाए, क्योंकि वे जनता की आवाज़ को निर्भीकता से उठाते थे। उन्होंने सरोजिनी नायडू के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता और भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। साथ ही विजयलक्ष्मी पंडित के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने भारतीय महिला नेतृत्व की ऐतिहासिक भूमिका को स्मरण किया।
तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों द्वारा शोधपत्र प्रस्तुत किए गए तथा संवाद के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों—विशेषकर डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता—पर सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम का संचालन संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. सुमन शुक्ला ने किया तथा उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. आलोक पांडेय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस प्रकार संगोष्ठी का प्रथम दिवस सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

मान्यवर,हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0,प्रयागराज   (भाषा विभाग उ०प्र० शासन के नियंत्राणाधीन) एवं हरे राम सेवा संस्थान, प्रय...
12/03/2026

मान्यवर,
हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0,प्रयागराज (भाषा विभाग उ०प्र० शासन के नियंत्राणाधीन) एवं हरे राम सेवा संस्थान, प्रयागराज के संयुक्त के तत्वावधान में दिनांक 14 मार्च, 2026, शनिवार को अपराह्न 4:30 बजे से 'ठिठोली के रंग और काव्य के संग' कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है । कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित है ।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ०प्र०, प्रयागराज के तत्वावधान में दिनांक 11 मार्च, 2026, बुधवार को ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और लोक सा...
11/03/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ०प्र०, प्रयागराज के तत्वावधान में दिनांक 11 मार्च, 2026, बुधवार को ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और लोक साहित्य’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 11 मार्च 2026, बुधवार, प्रातः 11ः00 बजे से हिन्दुस्तानी एकेडेमी के गांधाी सभागार में दो सत्रों में किया गया। सर्वप्रथम एकेडेमी परिसर में स्थापित पं0 बालकृष्ण भट्ट, राजर्षि पुरूषोत्तम दास टण्डन एवं सुभद्रा कुमारी चैहान की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र के प्रारम्भ में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा जो कि ऋषियें, मुनियों के द्वारा वेदों उपनिषदों के माध्यम से लोक साहित्य, जीवन दर्शन और नैतिक शिक्षा के पथ प्रदर्शक हैं, जो कि भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के द्वारा लोक साहित्य को समृद्ध करते हैं।,’ प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ० आर०पी० सिंह, पूर्व निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, उ०प्र० ने कहा कि ‘आदि काल से ऋषियों, मुनीयों एवम् मनीषाण ने अपने ज्ञान, तपस्या एवम साधनाओं से अर्जित ज्ञान का वेदों, पुराणों और उपनिषदों के द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरण हेतु साहित्य एवं लोक कथाओं के द्वारा जन सामान्य के अनुकरण हेतु सुलभ कराया है। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो० अजय प्रकाश खरे, प्राचार्य, सी०एम०पी० डिग्री कॉलेज, प्रयागराज नेे अपने वक्तव्य में कहा कि ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक साहित्य दोनों पृथक नहीं है।, लोक साहित्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा जन जन तक पुहँचती है। भारतीय ज्ञान परंपरा ओर लोक पंरपरा दोनों ही शामिल है और भारतीय संस्कृति को समृद्व करते हैं।’ राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ० सत्यप्रिय पाण्डेय, श्याम लाल महाविद्यालय, दिल्ली ने कहा कि ‘भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने में जितना श्रेय शास्त्रों का रहा है उससे रंच मात्र भी कम श्रेय लोक का नहीं रहा है । जिस वेद, पुराण , उपनिषद के ज्ञान की बात कही जाती है उसे लोक जनमानस में उनकी भाषा में पहुंचाने का श्रेय लोक कवियों को है, लोक रचनाकारों को है, संतों का है अन्यथा ये ज्ञान शास्त्र की पोथियों में बंद पड़ा रहता, आम जन मानस तक प्रसारित न हो पता । भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने का यह कार्य लोक ने अपनी कहावतों , लोक गीतों, लोक कथाओं और लोक नाट्यों के माध्यम से किया है । अतः लोक साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर मौजूद है, यह धरोहर वैदिक सूत्रों की तरह लोकोक्तियों में विद्यमान है ।’ विशिष्ट वक्ता डॉ० कल्पना वर्मा, पूर्व आचार्य, आर्यकन्या डिग्री कॉलेज, प्रयागराज ने कहा कि ’भारतीय ज्ञान परम्परा बहुत पुरानी है। भारतवर्ष के युगद्रष्टा महर्षियों का भौतिक एवं पराभौतिक प्रकृति से किया गया संवाद, उनकी सामाजिक और आध्यात्मिक दिशाओं को जोड़ने वाली जीवन शैली तथा उनके चिन्तन पूर्ण अनुभव भारतीय ज्ञान परम्परा की धरोहर हैं। यह परम्परा मौखिक और लिखित दोनों माध्यमों से आगे बढ़ी है। आदिवासी समाज से लेकर वेद-पुराण-उपनिषद-रामायण-महाभारत-गीता आदि धर्म ग्रन्थों, लोक कथाओं, लोक गीतों, कहावतों तथा साहित्य आदि में संरक्षित है। सर्वे भवन्तु सुखिनः, वसुधैव कुटुम्बकम, अतिथि देवो भव का संदेश ज्ञान परम्परा से ही आया है। भारतीय ज्ञान की यह परंपरा लोक की ताकत है और जीवन को राह दिखाने वाली है।’ इस सत्र का संचालन डॉ0 सुजीत कुमार सिंह, इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने किया। राष्ट्रीय सुंगोष्ठी के द्वितीय सत्र के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, सुलतानपुर ने कहा कि ‘ हमारी भारतीय ज्ञान परम्परा व्यापक एवं समृद्ध रही है, जो वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों व शास्त्रों से पूर्व लोक साहित्य के रूप में विकसित हुई है। यह परम्परा मात्र दार्शनिक और आध्यात्मिक चिन्तन तक सीमित नहीं रही अपितु समाज को नैतिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध करने में भी सहायक रही है। इस ज्ञान परम्परा को जन सामान्य तक पहुँचाने में सन्त साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।’ संगोष्ठी की विशिष्ट वक्ता प्रो० राकेश सिंह, आचार्य, इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने कहा कि ‘ भारतीय संस्कृति से जुड़ा सबसे विशिष्ट तथ्य यह है कि यहाँ ज्ञान मात्र ग्रंथों या औपचारिक शिक्षा संस्थानों तक सीमित नहीं रहा है। भारतीय समाज में ज्ञान की अनेक धाराएँ रही हैं-वैदिक, दार्शनिक, शास्त्रीय, लोक और व्यावहारिक। इनमें लोक ज्ञान परम्परा एक ऐसी परम्परा है, जो लिखित ग्रंथों से अधिक सामुदायिक अनुभव और मौखिक परम्परा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी प्रवाहित होती रही है। लोक साहित्य इस ज्ञान परम्परा का सबसे सशक्त माध्यम रहा है। ’। संगोष्ठी में अपने वक्तव्य में डॉ० शारदा द्विवेदी, सहायक आचार्य, रानी भाग्यवती महिला महाविद्यालय, बिजनौर ने कहा कि ‘भारतीय ज्ञान परंपरा की श्रेष्ठ परंपराओं का संरक्षण संवर्धन एवं उससे एक श्रेष्ठ भविष्य की निर्मित करना हमारा दायित्व है। हमारा देश केवल आर्थिक शक्तियों से ही महाशक्ति नहीं बन सकता है, वह अपने ज्ञान की शक्ति से महाशक्ति बनेगा अतः हमें अपनी भारतीय ज्ञान प्रणाली- ज्ञान परंपरा अपनी विरासत के प्रति अपने विद्यार्थियों में सम्मान की भावना पैदा करना अत्यंत आवश्यक है।’संगोष्ठी के सम्मानित वक्ता डॉ० रमेश चन्द्र वर्मा, पूर्व सम्पादक, दैनिक जागराण, कानपुर ने कहा कि ‘लोक साहित्य संस्कृतिक चेतना, पहचान, समाज सुधार और राष्ट्रवाद के विषयों का पता लगाने के लिए प्रेरणा स्रोत है। लोक साहित्य ने भारतीय ज्ञान को जन-जन तक पहुंच कर प्रेम, त्याग, साहस, धर्म, कर्तव्य जैसे जीवन मूल्य दिखाएं जिससे संस्कृति समृद्ध बनी।’ इस सत्र का संचालन डॉ० अनिल कुमार सिंह, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज, प्रयागराज ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में प्रो. रामकिशोर शर्मा, रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासा’, डाॅ. पवन कुमार सिंह, डाॅ. सजंय कुमार सिंह, सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

दिनांक - 11 मार्च 2026 को  हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0 प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक साहित्य’...
09/03/2026

दिनांक - 11 मार्च 2026 को हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0 प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक साहित्य’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में आप सादर आमंत्रित हैं।
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हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 7 मार्च 2026 शनिवार को पूर्वाह्न ...
05/03/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 7 मार्च 2026 शनिवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे से दो सत्रों में संगोष्ठी एवं महिला कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। प्रथम सत्र में "नारी शक्ति से विकसित भारत" विषयक संगोष्ठी एवं द्वितीय सत्र में महिला कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले श्रोताओं को भी प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
छात्रों अपना पंजीकरण नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से कर सकते हैं –
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हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् काशी प्रांत के संयोजन में दिनांक 14 फ...
14/02/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् काशी प्रांत के संयोजन में दिनांक 14 फरवरी 2026, शनिवार को पूर्वाह्न 11ः30 बजे गाँधी सभागार, हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज में ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम एकेडेमी परिसर में स्थापित पं0 बालकृष्ण भट्ट, राजर्षि पुरूषोत्तम दास टण्डन एवं सुभद्रा कुमारी चैहान की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र के प्रारम्भ में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि ‘समाज के हर व्यक्ति के लिए आत्मबोध और विश्वबोध दो ऐसे महत्वपूर्ण पहलू हैं जो हमारे जीवन को एक आंतरिक अर्थ और दिशा प्रदान करते हैं। आत्मबोध का अर्थ है स्वयं की आंतरिक दुनिया को जानना, समझना, और अपने प्रभाव और कमजोरियों, विचारों और भावनाओं को भली भाँति जानना है। यह एक व्यक्तिगत और आंतरिक खोज है जो हमें अपने अस्तित्व के मूल को समझने में मदद करती है। और विश्वबोध का अर्थ समाज, संस्कृतियों, और प्रक्रियाओं को जानना और समझना। हमें अपनी व्यक्तिगत सीमाओं से बाहर देखने और दूसरों के साथ व्यवहार की क्षमता देता है।’ सगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासा’ ने कहा कि ‘मानव जीवन में बहुत कुछ देखने, परखने, समझने, बोलने का समय मिलता है किन्तु भाव व्यक्त करने से पहले अपने से पूछंे समझे तभी बोलिये क्योंकि आत्मबोध से ही आप तत्वबोध तक सही रूप से पहुँच सकते हैं। और समाज को जानने, समझने का बोध ही विश्वबोध है।’ संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डाॅ. पवनपुत्र बादल, राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, लखनऊ ने अपने वक्तव्य में ‘आत्मबोध से विश्ववोध की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव भारत बोध है। वस्तुतः यही भारत बोध हमारे सनातन का दायित्व बोध है। भारतीय जीवन मूल्यों और परम्पराओं पर विचार रखते हुये पवनपुत्र बादल ने कहा कि सदियों से हमारे यहाँ साहित्य संवाद की परम्परा) के केन्द्र ले रहे हैं। प्रयाग में आयोजित कुम्भ मेला भारत की चेतना का साक्षात प्रमाण है। हमारा दायित्व है कि अपनी गौरवशाली परंम्पराओं को हम पुनः प्रचलन में लाएं’। राष्ट्रीय संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता डाॅ. महेश बजरंग, प्रदेश महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, लखनऊ, उरई ने कहा कि ‘कोई भी राष्ट्र जब अपने स्वबोध अथवा कहे आत्मबोध को विस्मृत करने लगता है तब उस राष्ट्र का पतन होना आरम्भ हो जाता है। जिस समाज ने अपनी सनातन परम्पराओं अपने पूर्वजों की विरासत पर गर्व न करके उसे भुला दिया था। उसे हीन समझने लगा। उसका अस्तित्व संसार में बचा नहीं है, उनका इतिहास मिट गया है। यह कहा जाता है कि- यूनान, मिश्र, रोम सब मिट गये, जहाँ से बाकी बचा है अभी नामो निशां हमारा, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा यह जो कुछ बात है, यही हमारी सर्व समावेशी संस्कृति है। हमारी लोक कलाएँ लोक गाथाएँ, लोकपर्व, लोकभाषा, लोकनाट्य, लोकगीत, लोकमेले, लोकदेवता आदि सभी हमारे आत्मबोध में महत्वपूर्ण कारण है। यही परम्परा सनातन को सर्द और सृदढ़ बनाती है। हमें वर्तमान में आत्मबोध के परिप्रेक्ष्य में इधर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। इसी प्रकार हमारी भारतीय ज्ञान परम्परा में वैदिक बाङग्मय, पुराण, दर्शन, भाषा का अवतरण और लिपि का विकास, अंकविद्या वैदिक प्राणित कालगणना, गुरूकुल शिक्षा, कला साहित्य वैभव, भारतीय सभ्यता संस्कृति व शौर्य, प्राचीन विज्ञान, योग, आयुर्वेद, प्रकृति व पर्यावरण, चिंतन, ज्योतिष और अध्यात्म भारतीय अर्थचिंतन, राजनीतिक व दण्ड विधान और भारतीय ऋषि परम्परा जैसी गौरवशाली विरासत को जानना, समझना और प्रसारित करते ये विश्व समुदाय तक ले जाना ही आत्मबोध से विश्वबोध की यात्रा करना है।’ संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए डाॅ. विनम्र सेन सिंह, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने कहा कि ‘ आत्मबोध से विश्वबोध की यह यात्रा स्व से सर्व की यात्रा है। आज की यह संगोष्ठी प्रत्येक व्यक्ति के भीतर ऐसा बोध जागृत करेगी जो प्रयाग से सम्पूर्ण भारत की अनुगूंज बनेगा। ‘हम कौन थे, क्या हो गए और क्या होंगे अभी आओ विचारे मिलकर ये समस्याएं सभी इस भाव बोध पर विचार करते हुए आज की युवा पीढ़ी को आत्म से सर्व की ओर यात्रा करने की आवश्यकता है जिससे भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया जा सके।’ संगोष्ठी का संचालन अनुभव दुबे, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में डाॅ. शमशेर जम्दाग्नि, डाॅ. मिथलेश त्रिपाठी, डाॅ. लहरी राम मीणा, डाॅ. कल्पना वर्मा, डाॅ. उषा मिश्रा, डाॅ. विरेन्द्र कुमार तिवारी, डाॅ. रमेश सिंह, स्नेह सुधा, विवेक सत्यांशु, गोपालजी पाण्डेय एम. एस. खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश प्रयागराज के तत्वावधान में दिनांक 14 फरवरी 2026 शनिवार को अपराह्न 11:30 बजे से आत्मबोध...
11/02/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश प्रयागराज के तत्वावधान में दिनांक 14 फरवरी 2026 शनिवार को अपराह्न 11:30 बजे से आत्मबोध से विश्वबोध विषयक संगोष्ठी में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के तत्वावधान में दिनांक - 10 दिसम्बर 2025 को  ‘कृष्ण भक्ति में ब्रज भाषा का...
10/12/2025

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के तत्वावधान में दिनांक - 10 दिसम्बर 2025 को ‘कृष्ण भक्ति में ब्रज भाषा का योगदान’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं ब्रजभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है।

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