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हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज, उ0प्र0एवं हिन्दी विभाग, पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0के संयुक्त ...
20/09/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज, उ0प्र0
एवं हिन्दी विभाग, पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0
के संयुक्त तत्वावधान में 19 सितम्बर 2026 को 'मध्यकालीन नारी अस्मिता और मीराबाई' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0 में किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी की प्रमुख समाचार पत्रों में प्रतिक्रिया

हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज, उ0प्र0एवं हिन्दी विभाग, पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0के संयुक्त ...
19/09/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज, उ0प्र0
एवं हिन्दी विभाग, पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0
के संयुक्त तत्वावधान में 19 सितम्बर 2026 को 'मध्यकालीन नारी अस्मिता और मीराबाई' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0 में किया गया।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज, उ0प्र0एवं हिन्दी विभाग, पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0के संयुक्त ...
18/09/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज, उ0प्र0
एवं हिन्दी विभाग, पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0
के संयुक्त तत्वावधान में 19 सितम्बर 2026 को 'मध्यकालीन नारी अस्मिता और मीराबाई' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पूर्णोदय महिला महाविद्यालय, बच्छांव, वाराणसी, उ0प्र0 में किया गया है। संगोष्ठी में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक...
17/09/2026

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत 17 सितंबर को हर सरकारी कार्यालयों में 'आशीर्वाद का दीया' जलाए जाने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी क्रम में हिंदुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज परिसर में भी #आशीर्वाद_का_दीया जलाया

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज  एवं हंसवाहिनी, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी दिवस के अवसर पर द...
12/09/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज एवं हंसवाहिनी, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी दिवस के अवसर पर दिनांक 14 सितम्बर 2026 सोमवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे गाँधी सभागार, हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज मे"हिन्दी : राष्ट्र की एकता और अस्मिता की भाषा" विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
संगोष्ठी में प्रतिभाग एवं प्रमाण पत्र हेतु नीचे दिए गए लिंक अथवा कार्ड में अंकित QR कोड को स्कैन करके अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
https://hindustaniacademyup.org.in/panjikaran.php

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 11 सितम्बर 2026, शुक्रवार को एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में महादेवी वर्मा की पूण्य...
11/09/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 11 सितम्बर 2026, शुक्रवार को एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में महादेवी वर्मा की पूण्यतिथ के अवसर पर ‘महादेवी वर्मा के गद्य में भारतीय दर्शन, स्त्री-विमर्श और मानवीय करुणा की गहराई’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा एवं महादेवी वर्मा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एकेडेमी के सचिव डाॅ. अजीत कुमार सिंह एवं कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए डाॅ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि ‘महादेवी वर्मा के साहित्य में सभी प्रसंग विद्यमान है चाहें वो प्रेम हो, करूणा हो या वियोग। उन्हाने अपने साहित्य के माध्यम से नारी को केन्द्र में रखा और उसकी व्यथा को समाज के सम्मुख रखा किया। उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था। महादेवी वर्मा जी वर्ष 1943 में हिन्दुस्तानी एकेडेमी से जुड़ी और लगभग 18 वर्षों तक एकेडेमी के विभिन्न दायित्वों पर रह कर कार्य किया। ’संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डाॅ. ऊषा मिश्रा, पूर्व विभागाध्यक्ष - हिन्दी, प्रयाग महिला विद्यापीठ, प्रयागराज ने कहा कि ‘महादेवी का साहित्य नारी के प्रश्नों को बहुत गम्भीरता से उभारता है। उनका मानना था कि स्त्री को केवल त्याग, सहनशीलता की प्रतिमूर्ति मानना पर्याप्त नहीं है। उसे अपने व्यक्तित्व एवं अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। वे स्त्रियों की शिक्षा, समानता, संवेदना और आत्मनिर्भरता पर बल देती हैं। महादेवी जी - जिनकी प्रासंगिकता समय के साथ कम नहीं होती, महादेवी जी को समझना भारतीय स्त्री की चेतना, संघर्ष और आत्मसम्मान की यात्रा को समझना है। वो स्त्री ही नहीं वरन् आस पास के जीवन को अधिक संवेदनशील दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती हैं।’ संगोष्ठी की मुख्य वक्ता प्रो. सरोज सिंह, विभागाध्यक्ष - हिन्दी, सी.एम.पी. डिग्री काॅलेज, प्रयागराज ने कहा कि ‘महादेवी वर्मा का चिन्तन और साहित्य निरन्तरता और सनातनता, तथा व्यापकता और पूर्णता से परिपूर्ण है। महादेवी जी के गद्य में भारतीय दर्शन की गहरी अन्तर्दृष्टि विद्यमान है, जहाँ उनके काव्य में रहस्यवाद और अद्वैतवाद की आध्यात्मिक अनुभूतियाँ हैं, वहीं उनके गद्य साहित्य में भारतीय दर्शन का व्यवहारिक और मानवतावादी रूप परिलक्षित होता है। बौद्ध दर्शन का ‘करुणा’ और ‘दुःखवाद’ उनके रेखाचित्रों और संस्मरणों का मूल आधार है। महादेवी के पाठ की विशेषता है कि वह स्वयं में संपूर्ण होता है। पाठ में ही सारी दुनिया होती है। महादेवी के पाठ में स्त्री सिर्फ स्त्री के रूप में ही नहीं आती, बल्कि संस्थान के रूप में सामाजिक और राजनीतिक प्राणी के रूप में अभिव्यक्त होती है। महादेवी जी ने स्त्री विमर्श को नया आयाम और विचार ही नहीं दिया, बल्कि नई भाषा भी दी है। ।’ संगोष्ठी की विशिष्ट वक्ता डाॅ. रतन कुमारी वर्मा, विभागाध्यक्ष - हिन्दी, जगत तारन गल्र्स डिग्री काॅलेज, प्रयागराज ने ‘महादेवी वर्मा के गद्य में भारतीय दर्शन, स्त्री-विमर्श और मानवीय करुणा की गहराई’ विषय पर डालते हुए कहा ‘महादेवी वर्मा के गद्य साहित्य में भारतीय दर्शन, स्त्री विमर्श और मानवीय करुणा की गहराई सर्वत्र व्याप्त है। ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ भारतीय नारी की समस्याओं का जीवंत दस्तावेज है, जो कि लगभग 85 वर्ष पूर्व प्रकाशित हुआ था 1942 में, परन्तु वर्तमान समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। भारतीय नारी के जीवन की विभिन्न समस्याओं का ग्यारह अध्याय में बड़ी ही सूक्ष्म विवेचन एवं विश्लेषण किया गया है। नारी परम्परा एवं रूढ़ियों की अदृश्य दीवारों में कैद है। उसे या तो देवी के रूप में स्थापित किया जाता है या तो दासी के रूप में रखा जाता है लेकिन उसके साथ मानवतापूर्ण व्यवहार नहीं किया जाता है। उसे मानवी समझे जाने की जरूरत है। मानवी समझे जाने के लिए नारी को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्वाधीनता की आवश्यकता है। नारी की दृष्टि से उसकी मौलिकता को स्वीकार करने की आवश्यकता है। उसे पुरुष की छाया मात्र न समझकर उसके स्वतंत्र व्यक्तित्व को भारतीय समाज के द्वारा प्रश्रय दिया जाना चाहिए। तभी समाज, परिवार, राष्ट्र को मजबूत करने में वह अपना अमूल्य योगदान दे सकती है और अपने व्यक्तित्व के साथ सम्मान से गौरवान्वित जीवन जी सकती है।’ कार्यक्रम का संचालन करते हुए डाॅ. मुदिता तिवारी सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग, आर्य कन्या डिग्री काॅलेज, प्रयागराज ने कहा कि ‘महादेवी वर्मा का कहना था कि जिस युग का मानव अपने से पूर्व युग के समस्त सत्य ,शिव और आंशिक सत्य को अनुपयोगी बता देता है ,वह अपना विकास अवरुद्ध कर लेता है । आधुनिक मानव भी अपने संस्कारों के लिए आदिम पूर्वज का आभारी है।’ कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में पं0 रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासा’, सुनील दानिश, गोपाल जी पाण्डेय, विवेक सत्यांशु, एम. एस. खान. डाॅ. अनिल कुमार सिंह, सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मान्यवर,हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर दिनांक 11 सितम्बर,...
09/09/2026

मान्यवर,
हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर दिनांक 11 सितम्बर, 2026, शुक्रवार को 3:00 बजे से गांधी सभागार हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज में ‘महादेवी वर्मा के गद्य में भारतीय दर्शन, स्त्री-विमर्श और मानवीय करुणा की गहराई’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित हैं।
नोट - शिक्षक एवं शोधार्थी अपने प्रतिभाग हेतु नीचे दिए गए लिंक/क्यू आर कोड से पंजीकरण कर सकते हैं।
https://hindustaniacademyup.org.in/panjikaran_hindi_diwas.php

हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं उन्मेष, प्रज्ञा-प्रवाह, काशी प्रांत के संयुक्त के तत्वावधान में 9 सितम्बर 2026, बुधवार, अपराह्न...
09/09/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं उन्मेष, प्रज्ञा-प्रवाह, काशी प्रांत के संयुक्त के तत्वावधान में 9 सितम्बर 2026, बुधवार, अपराह्न 3ः00 बजे एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में ‘युवा संवाद एवं विकसित भारत - 2047’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, निदेशक - जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागाराज ने कहा कि ‘देश के युवाओं के अपने सपने होते हैं और देश का सामूहिक स्वप्न है कि 2047 तक विकसित भारत की ओर अग्रसर हों। देश की युवा शक्ति, ज्ञान, कौशल, नवाचार और नेतृत्व के माध्यम से देश को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। युवाओं के विचार, सकारात्मक सहभागिता और रचनात्मक ऊर्जा को राष्ट्रनिर्माण से जोड़कर ही विकसित भारत - 2047’ की संकल्पना की जा सकती है।’ संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. के. बी. पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष, लोक सेवा आयोग उ0प्र0, प्रयागराज ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047 के लिए वैश्विक अनुभव, उच्च शिक्षा, शोध और भारतीय भाषाओं का समन्वय आवश्यक है। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में विश्व से सीखते हुए भारतीय दृष्टि और मूल्यों को सुदृढ़ करना होगा। अनुभव आधारित शिक्षा, शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग से भारत आत्मनिर्भर, ज्ञानसम्पन्न और विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बन सकता है।’ संगोष्ठी की मुख्य अतिथि प्रो. कुमुद शर्मा कुुलपति महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से समृद्ध भारत का सपना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति, मातृभाषा और मानवीय मूल्यों से जुड़ा हुआ आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत बनाने का संकल्प है। जब युवा आधुनिक ज्ञान और विश्व की भाषाओं को सीखते हुए अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहेंगे, तभी भारत का विकास अपनी मौलिक पहचान के साथ होगा। सही विचार, स्पष्ट दृष्टि और सृजनात्मक सोच ही विकास को सार्थक दिशा देती है। जिस प्रकार लकड़ी हर कोई काट सकता है, लेकिन उसे उत्कृष्ट कलाकृति में वही बदल सकता है जिसके पास सही दृष्टि और कौशल हो, उसी प्रकार 2047 का विकसित भारत केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दूर दृष्टि, संस्कार, स्वाभिमान, करुणा और रचनात्मक प्रतिभा से निर्मित होगा।’ संगोष्ठी के मुख्य वक्ता चंद्रकांत जी, अखिल भारतीय सह-संयोजक, उन्मेष प्रज्ञा-प्रवाह ने कहा कि ‘भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिये हमें गाँवों में जाकर उनके उत्थान के लिये पाँच मुख्य आवश्यक अवश्यकताओं को पूरा करना होगा। संसार से कनेक्ट करने के लिये सड़क, रहने के लिये घर, स्वच्छ एवं ताजा भोजन, वौद्धिक एवं तकनीकी शिक्षा और उत्तम जीवन यापन के लिये स्वस्थ्य है। कोई भी देश सामरिक क्षमता और आर्थिक क्षमता को नज़र अंदाज नही ंकर सकता क्योंकि यह आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा को दर्शाता है। ’ कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अरूण कुमार वर्मा, महानगर संयोजक, प्रज्ञा-प्रवाह, प्रयगाराज ने किया। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संजय सिंह, उ0प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में संतोष त्रिपाठी (सह संयोजक, काशी प्रांत) श्री मनोज तिवारी (सदस्य मंडल कार्यकारी विन्ययाचल मंडल), डाॅ. अरूण कुमार वर्मा, डाॅ. मनीष कुमार सिंह (सी.एम.पी.), डाॅ. सुभाष चंद्र (सह संयोजक महानगर, प्रयागराज), प्रो. सतीश सिंह (आई.आई.आई टी.), डाॅ. हरीश पटेल डाॅ. कुँवर शेखर (युवा आयाम), प्रो. भावना चैहान, हिन्दी विभाग सी.एम.पी. डिग्री कालेज, डाॅ. सुनीता सिंह, डाॅ. संध्या सिंह, डाॅ. कीर्ति सिंह, शनि शर्मा भट्ट (युवा आयाम), डाॅ. व्रहोश शुक्ल, श्री प्रसून तिवारी (आयोजन सचिव), आकाश तिवारी, एम. एस. खान., वजीर खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हिंदुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज एवं डी सी एस के स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मऊ के संयुक्त तत्वावधान में आधुनिक ...
09/09/2026

हिंदुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज एवं डी सी एस के स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मऊ के संयुक्त तत्वावधान में आधुनिक हिंदी के जन्मदाता भारतेंदु हरिश्चंद्र जी की जन्म दिवस के इस पावन अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन मऊ में किया जा रहा है।

मान्यवर!हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज एवं उन्मेष-प्रज्ञा प्रवाह काशी प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक - ब...
08/09/2026

मान्यवर!
हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज एवं उन्मेष-प्रज्ञा प्रवाह काशी प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक - बुधवार, 9 सितम्बर 2026 को ‘‘युवा संवाद एवं विकसित भारत - 2047’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित हैं।

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Allahabad
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