Pahadi Bhula

Pahadi Bhula Pahari Bhula...

10/12/2024

एक राजा की बेटी की शादी होनी थी। बेटी की यह शर्त थी कि जो भी 20 तक की गिनती सुनाएगा, वही राजकुमारी का पति बनेगा। गिनती ऐसी होनी चाहिए जिसमें सारा संसार समा जाए। जो यह गिनती नहीं सुना सकेगा, उसे 20 कोड़े खाने पड़ेंगे। यह शर्त केवल राजाओं के लिए ही थी।

अब एक तरफ राजकुमारी का वरण और दूसरी तरफ कोड़े! एक-एक करके राजा-महाराजा आए। राजा ने दावत का आयोजन भी किया। मिठाई और विभिन्न पकवान तैयार किए गए। पहले सभी दावत का आनंद लेते हैं, फिर सभा में राजकुमारी का स्वयंवर शुरू होता है।

एक से बढ़कर एक राजा-महाराजा आते हैं। सभी गिनती सुनाते हैं, जो उन्होंने पढ़ी हुई थी, लेकिन कोई भी ऐसी गिनती नहीं सुना पाया जिससे राजकुमारी संतुष्ट हो सके।

अब जो भी आता, कोड़े खाकर चला जाता। कुछ राजा तो आगे ही नहीं आए। उनका कहना था कि गिनती तो गिनती होती है, राजकुमारी पागल हो गई है। यह केवल हम सबको पिटवा कर मज़े लूट रही है।

यह सब नज़ारा देखकर एक हलवाई हंसने लगा। वह कहता है, "डूब मरो राजाओं, आप सबको 20 तक की गिनती नहीं आती!"

यह सुनकर सभी राजा उसे दंड देने के लिए कहने लगे। राजा ने उससे पूछा, "क्या तुम गिनती जानते हो? यदि जानते हो तो सुनाओ।"

हलवाई कहता है, "हे राजन, यदि मैंने गिनती सुनाई तो क्या राजकुमारी मुझसे शादी करेगी? क्योंकि मैं आपके बराबर नहीं हूँ, और यह स्वयंवर भी केवल राजाओं के लिए है। तो गिनती सुनाने से मुझे क्या फायदा?"

पास खड़ी राजकुमारी बोलती है, "ठीक है, यदि तुम गिनती सुना सको तो मैं तुमसे शादी करूँगी। और यदि नहीं सुना सके तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जाएगा।"

सब देख रहे थे कि आज तो हलवाई की मौत तय है। हलवाई को गिनती बोलने के लिए कहा गया।

राजा की आज्ञा लेकर हलवाई ने गिनती शुरू की:

"एक भगवान,
दो पक्ष,
तीन लोक,
चार युग,
पांच पांडव,
छह शास्त्र,
सात वार,
आठ खंड,
नौ ग्रह,
दस दिशा,
ग्यारह रुद्र,
बारह महीने,
तेरह रत्न,
चौदह विद्या,
पन्द्रह तिथि,
सोलह श्राद्ध,
सत्रह वनस्पति,
अठारह पुराण,
उन्नीसवीं तुम और
बीसवां मैं…"

सब लोग हक्के-बक्के रह गए। राजकुमारी हलवाई से शादी कर लेती है! इस गिनती में संसार की सारी वस्तुएं मौजूद हैं। यहाँ शिक्षा से बड़ा तजुर्बा है। 🙏🏻🙏🏻

दूनागिरी मंदिर एक हिन्दूओं का प्रसिद्ध मंदिर है जो कि उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र से 15.1 किलोम...
25/11/2022

दूनागिरी मंदिर एक हिन्दूओं का प्रसिद्ध मंदिर है जो कि उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र से 15.1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह मंदिर द्रोणा पर्वत की चोटी पर स्थित है। मां दूनागिरी मंदिर को ‘द्रोणगिरी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्वत पर पांडव के गुरु द्रोणाचार्य द्वारा तपस्या करने पर इसका नाम द्रोणागिरी पड़ा था। इस मंदिर का नाम उत्तराखंड सबसे प्राचीन व सिद्ध शक्तिपीठ मंदिरो में आता है। मां दूनागिरी का यह मंदिर ‘वैष्णो देवी के बाद उत्तराखंड के कुमाऊं में दूसरा वैष्णो शक्तिपीठ है।

दूनागिरी मंदिर पर्वत की चोटी पर स्थित है। यह मंदिर समुद्र तल से 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। सडक से लगभग 365 सीढ़ीयों द्वारा मंदिर तक जाया जाता है। सीढ़ीयों की ऊचाई कम व लम्बी है। सीढ़ीयों को सेड से ढका गया है और पूरे रास्ते में हजारों घंटे लगे हुए है, जो लगभग एक जैसे है। दूनागिरी मंदिर रखरखाव का कार्य ‘आदि शाक्ति मां दूनागिरी मंदिर ट्रस्ट’ द्वारा किया जाता है। दूनागिरी मंदिर में ट्रस्ट द्वारा रोज भण्डारे का प्रबधन किया जाता है। दूनागिरी मंदिर से हिमालय पर्वत की पूरी रेज़ को देखा जा सकता है।

दूनागिरी मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। प्राकृतिक रूप से निर्मित सिद्ध पिण्डियां माता भगवती के रूप में पूजी जाती हैं। दूनागिरी मंदिर में अखंड ज्योति का जलना मंदिर की एक विशेषता है। दूनागिरी माता का वैष्णवी रूप में होने से इस स्थान में किसी भी प्रकार की बलि नहीं चढ़ाई जाती है। यहाँ तक की मंदिर में भेट स्वरुप अर्पित किया गया नारियल भी मंदिर परिसर में नहीं फोड़ा जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि त्रेतायुग में रामायण युद्ध में जब लक्ष्मण को मेघनात के द्वारा शक्ति लगी थी। तब सुशेन वेद्य ने हनुमान जी से द्रोणाचल नाम के पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहा था। हनुमान जी पूरा द्रोणाचंल पर्वत उठाकर ले जा रहे थे तो यहां पर पर्वत का एक छोटा सा टुकड़ा गिरा और फिर उसके बाद इस स्थान में दूनागिरी का मंदिर बनाया गया। उसकी समय से यहां पर कई प्रकार की जड़ी बूटिया अब भी पाई जाती है।

कत्यूरी शासक सुधारदेव ने 1318 ईसवी में मंदिर निर्माण कर दुर्गा मूर्ति स्थापित की। देवी के मंदिर के पहले भगवान हनुमान, श्री गणेश व भैरव जी के मंदिर है। हिमालय गजिटेरियन के लेख ईटी एडकिंशन के अनुसार मंदिर होने का प्रमाण सन् 1181 शिलालेखों में मिलता है।

देवी पुराण के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव ने युद्ध में विजय तथा द्रोपती ने सतीत्व की रक्षा के लिए दूनागिरी की दुर्गा रुप में पूजा की। स्कंदपुराण के मानसखंड द्रोणाद्रिमहात्म्य में दूनागिरी को महामाया, हरिप्रिया, दुर्गा के अनूप विशेषणों के अतिरिक्त वह्च्मिति के रुप में प्रदर्शित किया गया है।

दूनागिरी देवी मंदिर में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर दुर्गा पूजा, नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिर को फूलो व लाईट से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।

23/11/2022

कक्षा दूसरी में पढन वाले अतुल से
कक्षा शिक्षिका ने गणित का एक सवाल
पूछा "" अतुल, यदि में तुमको एक सेव, एवं एक
सेव एवं एक सेव दूं , तो तुम्हारे पास कितने
सेव हो जावेगें ?
अतुल "" मेडम जी... चार सेव ""
मेडम को लगा कि अतुल ने सवाल को ठीक से
समझा नहीं है..उसने फिर से सवाल
को दोहराया "" अतुल , घ्यान से
सुनो..यदि में तुमको एक सेव दूं ..फिर एक सेव
दूं...फिर एक सेव दूं ..तो तुम्हारे पास कितने
सेव हो जाय...ेगे.
छोटे अतुल ने अपनी उंगलियों पर केलकुलेट
किया... उत्तर दिया "" चार सेव ""
मेडम झुझंला गई..उन्होने अपनी झुझलाहट
को कंट्रोल किया एवं सोचा कि शायद
छोटे अतुल को सेव पंसद नहीं है इसलिये वह
सवाल पर घ्यान ही नहीं दे रहा है..उन्हे याद
आया कि अतुल आम बहुत पंसद करता है...
उन्होने फिर अपना सवाल दोहराया ...
बेटा अतुल..घ्यान से सुनो...यदि में तुमको एक
आम फिर एक आम एवं फिर एक आम दूं
तो ..तुम्हारे पास कितने आम हो जावेगें ?
छोटे अतुल ने कांउट किया "" मेडम जी तीन
आम ""
मेडम का चेहरा..खुशी से दमक उठा...चेहरे पर
मुस्काराहट आ गई..उन्हे अपने प्रयास पर गर्व
महसूस हुआ...कि चलो छात्र की समझ में
गणित आ या तो.
उन्होने फिर से अतुल से पूछा अच्छा अब
बोलो ""यदि में तुमको एक सेव दूं ..फिर एक
सेव दूं...फिर एक सेव दूं ..तो तुम्हारे पास
कितने सेव हो जायेगे""
अतुल ने सहम कर उत्तर दिया "" मेडम
जी चार ""
मेडम झल्ला गई....उन्होने ने झल्लाकर कहा ""
कैसे अतुल..कैसे ""
मासूम अतुल सहम गया...उसने अपना हाथ
सहमते हुये अपने स्कूल बेग में डाला..उसके हाथ
में एक सेव था ..उसने मेडम को दिखाते हुये
कहा सहम कर कहा "" एक सेव मेरे पास पहले
से है ""
।।यदि कोई व्यक्ति आपके सवाल के जबाब
में आपका अपेक्षित उत्तर नहीं देता है
तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह गलत
है..उसे पूर्ण् रूप से गलत घोषित करने से पूर्व
उसका नजरिया जान लेना जरूरी है ।

13/10/2022

ऐसे दोस्तों को मैसेज
करने से बेहतर है,..........
कुत्ते को पत्थर मार लो।
कम से कम जवाब
तो देता है।

लड़कियां भी अजीब
होती हैं,तैयार होने के
लिए पार्लर जाती हैं
और............
पार्लर जाने के
लिए भी तैयार होती हैं।
😛😛
लोगों को पता नहीं कैसे
सच्चा प्यार मिल
जाता है............
हमें
तो सुबह पलंग के नीचे
उतारी चप्पल
नहीं मिलती।
कौनकहता है कि सिर्फ
मोहब्बत में ही दर्द
होता है,कमबख्त.........
द­रवाज़े में ऊँगली आ जाये
तो भी जान निकल
जाती है।
जब तक जिंदा हूँ
मैसेज करता रहूँगा,जिस
दिन ना करूँ समझ
लेना...........
कि अगले दिन
करूँगा।
और क्या....मार
दो जालिमो अभी मेरी ऊमर
ही क्या हुई है जो मैं मरुँ?

अगर आप कहीं जल्दी में
जा रहे हों और
'काली बिल्ली' आपके आगे
से गुज़र जाये
तो इसका मतलब..........'
काली बिल्ली' आपसे
ज्यादा जल्दी में है।

28/09/2022

एक बार फिर पहाडी ROCKS...........

एक बार शेरदा
प्लेन से लन्दन
जा रहा थे, बगल में
एक अंग्रेज बैठा हुआ
था !
शेरदा ने अंग्रेज से
पूछा - "आप क्या करते
हो ?"
अंग्रेज - "मैं एक
साईंटिस्ट हूँ... और
आप ?"
शेरदा - "मैं इंजीनियर
हूँ !"
अंग्रेज - "वाव
इंजीनियर ... क्या हम
किसी टॉपिक पर
बात कर सकते हैं ?"
शेरदा - "बिलकुल ,, "
अंग्रेज - "अच्छा, तुम
मुझे न्यूक्लियर पावर
के बारे में कुछ बताओ"
शेरदा ये सुनकर चुप रह
गये !
अंग्रेज - (व्यंग से) "ओह
~~ तो तुम
नहीं जानते ?"
शेरदा - "जानता तो हूँ
लेकिन तुम पहले मेरे
एक प्रशन का उत्तर
दो"
अंग्रेज - "हम्म ~~
पूछो .. "
शेरदा - "मंदिर में
भी घंटा होता है और
चर्च में
भी घंटा होता है,
तो फिर चर्च
का घंटा मंदिर के घंटे
से
बड़ा क्यों होता है ..?"
अंग्रेज कुछ देर
सोचता रहा फिर
बोला - "मैं
नहीं जानता"
शेरदा - "अबे साले ..
पता तुझे घंटे
का भी नहीं है और
बातें न्यूक्लियर
पावर की करे है ?

09/09/2022

"श्री मद्-भगवत
गीता"
के बारे में-
किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन
को सुनाई।
कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7
हज़ार साल पहले
सुनाई।
भगवान ने किस दिन
गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।
कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी
कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र
की रणभूमि में।
कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में
क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके
हुए अर्जुन
को कर्त्तव्य सिखाने
के लिए और आने
वाली पीढियों को धर्म-
ज्ञान सिखाने के
लिए।
कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय
कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक
गीता में क्या-
क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्
म योग
मार्गो की विस्तृत
व्याख्या की गयी है,
इन मार्गो पर चलने
से व्यक्ति निश्चित
ही परमपद
का अधिकारी बन
जाता है।
गीता को अर्जुन के
अलावा
और किन किन
लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं
संजय ने
अर्जुन से पहले
गीता का पावन
ज्ञान किन्हें
मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव
को
गीता की गिनती किन
धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में
गीता किस महाग्रंथ
का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत
के एक अध्याय शांति-
पर्व का एक
हिस्सा है।
गीता का दूसरा नाम
क्या है?
उ.- गीतोपनिषद
गीता का सार
क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण
की शरण लेना
गीता में किसने कितने
श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40..

जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है।अरे"बॉडी" लेकर आइये, "बॉडी" को उठाइये,ऐसे शब्दो...
11/08/2022

जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है,
उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है।
अरे
"बॉडी" लेकर आइये,
"बॉडी" को उठाइये,
ऐसे शब्दो से आपको पूकारा जाता है, वे लोग भी आपको आपके नाम से नही पुकारते ,
जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी।

इसीलिए

जीवन में आने वाली हर चूनौती को स्वीकार करें।......
अपनी पसंद की चीजों के लिये खर्चा करें।......
इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।....

आप कितना भी बूरा नाचते हो ,
फिर भी नाचिये।......
उस खूशी को महसूस कीजिये।......
फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दीजिये।......
बिलकुल छोटे बच्चे बन जाइये ।

क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है।
लॉस तो वो है
के जिंदा होकर भी आपके अंदर जिंदगी जीने की आस खत्म हो चुकी है।.....

हर पल को खूशी से जीने को ही जिंदगी कहते है।
"जिंदगी है छोटी,पर" हर पल में खुश हूँ "काम में खुश हूं,"आराम में खुश हूँ ,

"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश हूं,
"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश हूं,

"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूं,
"आज कोई नाराज है," उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,

"जिस को देख नहीं सकता," उसकी आवाज से ही खुश हूं

19/07/2022

इत्र से कपड़े महकाना कोई बड़ी बात नहीं.....
मजा तो तब है साहब जब आपके किरदार से खुशबू आए।
जय श्री राम🌹🌹🌹🌺

14/07/2022
13/07/2022

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐पहले सोचें, घबराएं नहीं💐💐*

परिस्थितियां कभी जीवन में एक जैसी नहीं रहती, जीवन में भंवर में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं आपकी सोच बताती है कि आप कठिन परिस्थितियों का कैसे सामना करते हैं? क्या आपके अंदर वो काबिलियत है जो हर परिस्थिति से आपको बाहर निकाल दे?

एक कहानी यूँ है कि पुराने समय में एक व्यापारी ने किसी धनी साहूकार से पैसा उधार ब्याज पर लिया था लेकिन व्यापार में नुकसान हो जाने की वजह से वह साहूकार का पैसा लौटा नहीं पा रहा था व्यापारी की एक बेहद सुन्दर बेटी थी।

साहूकार बड़ा कुटिल था उसने सोचा कि व्यापारी पैसा तो वापस कर नहीं पा रहा है तो क्यों ना इसकी परिस्थिति का फायदा उठाया जाए उसने व्यापारी को एक सुझाव दिया कि अगर वह अपनी बेटी की शादी उस साहूकार से कर दे तो वह व्यापारी का सारा कर्ज माफ़ कर देगा।

व्यापारी बेचारा मरता क्या ना करता उसने अपनी बेटी को सारी बात बताई समस्या बड़ी थी, साहूकार अधेड़ उम्र का कुरूप व्यक्ति था।

अब उस बेटी के आगे 2 ही रास्ते थे –पहला, या तो साहूकार से विवाह करने से इंकार कर दे और अपने पिता को कर्ज में दबा रहने दे दूसरा, साहूकार से ख़ुशी से विवाह कर ले ताकि उसका पिता स्वतंत्रता से रह सके।

मित्रों, अक्सर हमारे जीवन में भी ऐसे मोड़ आते हैं जब हमें यकीन होने लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा है और अब हम बुरी तरह फंस चुके हैं अख़बारों में सुनने में आता है कि लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं, लेकिन अपने दिमाग को पानी की तरह रखिये, एकदम निर्मल, शांत और चलायमान पानी को देखा है? पानी हर जगह से अपना रास्ता निकाल ही लेता है ठीक वैसे ही बन जाओ।

आगे देखिये लड़की ने क्या फैसला लिया – लड़की ने साहूकार के आगे एक शर्त रखी कि साहूकार एक थैला लाये और उसमें दो गोलियां डाले, एक सफ़ेद रंग की तथा दूसरी काले रंग की इसके बाद लड़की उस थैले से आँख बंद करके कोई एक गोली निकालेगी।

गोली अगर काली निकली तो लड़की साहूकार से विवाह कर लेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा।

साथ ही, अगर गोली सफ़ेद निकली तो भी पिता कर कर्ज माफ़ किया जायेगा लेकिन लड़की साहूकार से विवाह नहीं करेगी।

साहूकार तुरंत बात मान गया और जल्द ही एक थैला लेकर आ गया अब वह जब थैले में गोलियां डाल रहा था तो लड़की ने देखा कि साहूकार ने चालाकी से दोनों गोली काली ही थैली में डाल दीं हैं।

अब लड़की परेशान हो गयी कि अब वह करे तो क्या करे, साहूकार का भांडा फोड़ भी दे तो भी वह दूसरी किसी चाल में उनको जरूर फंसाएगा

लड़की कुछ सोचकर आगे बढ़ी और उसने थैले से एक गोली निकाली और गोली बाहर निकालते ही, उसे हाथ से छिटका दी, जिससे गोली नाली में जा गिरी।

लड़की बोली – माफ़ करना, गोली मेरे हाथ से छिटक गयी लेकिन चिंता की कोई बात नहीं, थैले में अभी दूसरी गोली भी तो होगी उसे देख लेते हैं अगर गोली काली निकली तो मैंने सफ़ेद गोली उठायी होगी और थैले में गोली सफ़ेद निकली तो मैंने काली गोली उठाई होगी।

व्यापारी ने थैले में हाथ डाला तो देखा, काली गोली निकली।

व्यापारी बोला – अहा, बेटी थैले में काली गोली बची है इसका मतलब तुमने सफ़ेद गोली चुनी थी।

साहूकार बेचारा बोलता भी क्या? अगर बोलता तो चोरी पकड़ी जाती इस प्रकार पिता का कर्ज भी माफ़ हो गया और बेटी ने अपनी रक्षा भी कर ली।

जब तक आप समस्याओं के समाधान के बारे में नहीं सोचेंगे तब तक आप समस्याओं में ही उलझे रहेंगे।

*अपने विचारों को खुलने दें, थोड़ा हटकर सोचें, यह सोचें कि हर समस्या का हल है तो मेरी समस्या का भी कोई ना कोई हल जरूर होगा जब आप ऐसा सोचने लगेंगे तो यकीन मानिये आपको समस्याओं के हल भी मिलना शुरू हो जायेंगे।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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