SDPI Amravati

SDPI Amravati Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from SDPI Amravati, Political organisation, Amravati.

12/12/2025
06/11/2025

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया अमरावती ने ट्रांसपोर्ट नगर में अतिक्रमण विभाग की करवाई का कड़ा विरोध किया

11/09/2025
26/08/2025

The National Secretariat meeting of the Social Democratic Party of India, presided over by National Vice President Mohammed Shafi, is being held in Kozhikode, Kerala, on 26 August 2025.

15/08/2025

Happy 79th Independence Day

Happy Independence Day
15/08/2025

Happy Independence Day

मौलाना आज़ाद अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम में धांधली का आरोप एसडीपीआई ने उच्च‑स्तरीय एसआईटी की माँग उठाईअमरावती, अमरावती ...
18/07/2025

मौलाना आज़ाद अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम में धांधली का आरोप

एसडीपीआई ने उच्च‑स्तरीय एसआईटी की माँग उठाई

अमरावती,
अमरावती ज़िले में मौलाना आज़ाद अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम (एमएएमएफ़डीसी) द्वारा संचालित ऋण एवं अनुदान योजनाओं में “बड़े पैमाने पर गबन और धोखाधड़ी” के आरोप सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) की जिला इकाई ने लगाया है इस मामले में जिल्हाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि कई लाभार्थियों के खातों में स्वीकृत रक़म “काग़ज़ों पर ही” जारी दिखायी गई, जबकि वास्तव में धनराशि पहुँची ही नहीं।
एसडीपीआई का दावा है कि कुछ मामलों में गारंटरों की संपत्ति पर ऋण का भार डाल दिया गया, मगर लाभार्थियों को एक भी रुपया हासिल नहीं हुआ। पार्टी ने इसे “अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक अधिकारों पर सीधा प्रहार” बताते हुए छह सूत्री माँग‑पत्र पेश किया।ज्ञापन मे कहा गया कि घोटाले की गहराई से जाँच के लिए उच्च स्तरीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) तत्काल गठित किया जाए।
साथ ही चेयरमैन से लेकर संबंधित अधिकारियों को जाँच पूरी होने तक पद से हटाया जाए और उन पर आपराधिक मुक़दमे दर्ज किया जाए, स्वीकृत ऋण और अनुदान की रक़म लाभार्थियों के निजी बैंक खातों में सीधे एवं पारदर्शी तरीक़े से जमा की जाए।जिन मामलों में ऋण न मिलने से गारंटरों को आर्थिक क्षति हुई है, उनके लिए विशेष राहत‑पैकेज और क़ानूनी संरक्षण दिया जाए। निगम में कदाचार की पुष्टि होने पर दोषियों पर सख़्त कानूनी कार्यवाही की जाए।अल्पसंख्यक छात्रों और उद्यमियों को मिलने वाली सुविधाओं की प्रक्रिया सरल और डिजिटल ट्रैकिंग‑सक्षम बनाई जाए।ज्ञापन सौंपने के बाद एसडीपीआई अमरावती के जिला अध्यक्ष ने कहा, “यदि सरकार ने जल्दी क़दम नहीं उठाए, तो हम राज्य‑व्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। यह संघर्ष अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के भविष्य और ग़रीब परिवारों की आजीविका से जुड़ा है।”
पार्टी पदाधिकारियों ने जिल्हा प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर आधिकारिक कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट मांगते हुए स्पष्ट किया कि सिर्फ़ आश्वासन नहीं, बल्कि “मौद्रिक हस्तांतरण की रसीदें और जाँच समिति का गठन आदेश” ही स्वीकार्य होंगे। इस मौके पर SDPI अमरावती ज़िला अध्यक्ष रीज़वान कुरैशी, विधान सभा अध्यक्ष शेख महबूब, ज़िला कमेटी मेंबर शेख इरशाद और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे

21/06/2025

SDPI's 17th Formation day, Amravati MH

SDPI अमरावती ने मनाया अपना 17वा स्थापना दिवस श्री गाडगे महाराज वृद्ध आश्रम के बुजुर्गों को भोजन करवा मनाया स्थापना दिवस2...
21/06/2025

SDPI अमरावती ने मनाया अपना 17वा स्थापना दिवस

श्री गाडगे महाराज वृद्ध आश्रम के बुजुर्गों को भोजन करवा मनाया स्थापना दिवस

21/06/2025, अमरावती

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के 21 जून को 16 वर्ष पूरे हो चुके है। अपने 17वे स्थापना दिवस पर sdpi अमरावती ने अपने ज़िला कार्यालय पर पार्टी का झंडा फैराया और लोगों में मिठाइयां बाटी। इस शुभ अवसर पर पार्टी की जानिब से श्री गाडगे महाराज वृद्ध आश्रम के बुजुर्गों के लिए भोजन का इंतेज़ाम भी किया गया। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के अमरावती जिला अध्यक्ष रिज़वान कुरेशी ने बात कहा कि, " आज हम SDPI के 17वें स्थापना दिवस पर इकट्ठा हुए हैं। यह सिर्फ़ एक तारीख नहीं, बल्कि एक आंदोलन का प्रतीक है- एक ऐसा आंदोलन जो अन्याय की गलियों से निकला, पीड़ितों के आंसुओं में पला, और भारत के संविधान में अपनी आस्था से मजबूत हुआ।
21 जून 2009 को जब SDPI की स्थापना हुई थी, तब हमारा उद्देश्य स्पष्ट था-भारत के उन लोगों को आवाज़ देना जिनकी आवाज़ सत्ता के गलियारों में नहीं सुनी जाती थी। हम बने मुसलमानों, दलितों, आदिवासियों, ईसाइयों, पिछड़े वर्गों, श्रमिकों और महिलाओं की आवाज़ उन लोगों की जो शक्ति, सम्मान और न्याय से वंचित रखे गए।
आज, 2025 में हमारा संघर्ष और भी बड़ा हो गया है। अब हम सिर्फ़ एक सरकार से नहीं, बल्कि लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने की सुनियोजित योजना से लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में लोकतंत्र केवल दिखावे की चीज़ रह गई है। संसद सिर्फ़ औपचारिकता बन चुकी है, मीडिया सरकार का माइक है, और कानून डर पैदा करने का हथियार।
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष एम. के. फ़ैज़ी आज तिहाड़ जेल में हैं। उन्होंने कोई अपराध नहीं कियी-उनका गुनाह बस इतना है कि उन्होंने सत्ता से सवाल पूछे। उनकी गिरफ्तारी इस बात का प्रतीक है कि इस देश में अब सच बोलना एक अपराध बन चुका है।
इस सरकार की नीतियाँ अब छुपी नहीं रहतीं, बल्कि गर्व से दिखाई जाती हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), वक़्फ़ संपत्ति संशोधन, और "अवैध प्रवासी" घोषित कर मुस्लिम समुदायों को बेदखल करने की मुहिम ये सभी एक बड़े एजेंडे का हिस्सा हैं- भारत की नागरिकता को धार्मिक पहचान के आधार पर पुनर्परिभाषित करना।
CAA, जो 2019 में पारित हुआ था और अब 2025 में सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है, धार्मिक आधार पर भेदभाव करता है। यह भारत के संविधान की आत्मा और उसकी धर्मनिरपेक्षता का खुला उल्लंघन है। इससे गरीब, कागज़ों से वंचित मुस्लिम परिवारों की नागरिकता पर खतरा मंडरा रहा है।
इसी तरह, बिना संवाद और सहमति के UCC थोपने की कोशिश, विविधता को मिटाकर बहुसंख्यक मान्यताओं को नियम बनाने की साज़िश है। यह सिर्फ़ सुधार का बहाना है, असल में यह धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है।
वक़्फ़ संशोधन अध्यादेश सरकार को यह अधिकार देता है कि वह मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों जैसी वक़्फ़ संपत्तियों को ज़ब्त या नीलाम कर सके। यह मुस्लिम समुदाय की धार्मिक विरासत और सामूहिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
इसके साथ ही असम जैसे राज्यों में बंगाली भाषी मुसलमानों को 2/3 कहकर बस्तियाँ उजाड़ी जा रही हैं। यह सब NRC जैसी नीतिया का पुनरा है-बिना सबूत, कानूनी प्रक्रिया या पुनर्वास के हज़ारों परिवारों को विस्थापित करना।
यह शासन नहीं है, यह जनसंख्या परिवर्तन की सांप्रदायिक योजना है। और जब मुसलमान निशाने पर हैं, तो दलित, आदिवासी, ईसाई, किसान और गरीब हिंदू भी इससे अछूते नहीं हैं। श्रम कानूनों में कटौती, किसानों के आंदोलन पर दमन, अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्तियाँ बंद करना, और विश्वविद्यालयों का निजीकरण-सबका शोषण किया जा रहा है।
आज अंबेडकर की मूर्तियाँ लगाई जाती हैं, लेकिन आरक्षण और सामाजिक न्याय की नीतियाँ खत्म की जा रही हैं। यह उनके विचारों का अपमान है। इस अंधेरे समय में, SDPI उम्मीद की एक रोशनी है। हमने सिर्फ़ भाषण नहीं दिए-हमने संघर्ष किया है। मॉब लिंचिंग के पीड़ितों के साथ खड़े हुए, अंतरधार्मिक प्रेमियों को बचाया, फर्जी मुठभेड़ों को उजागर किया, जुल्म के कानूनों का विरोध किया, और जमीनी स्तर पर आंदोलन खड़े किए।
हम चुनावों के समय उभरने वाली पार्टी नहीं हैं- we are a street-to-courtroom movement. हमारा संघर्ष सिर्फ़ सत्ता पाने का नहीं, बल्कि संविधान, इंसानियत और बराबरी को बचाने का है।
आज हम फिर संकल्प लेते हैं:
हम संविधान को सांप्रदायिक विकृति से बचाएंगे।
हम तानाशाही का कानूनी और नैतिक प्रतिरोध करेंगे।
हम वंचितों की एकजुटता को मज़बूत करेंगे- जाति, धर्म और वर्ग के पार।
हम युवाओं को लोकतांत्रिक और समान भारत के लिए तैयार करेंगे।
सरकार को हमारा संदेश है: आप हमारे नेताओं को जेल में डाल सकते हैं, हमारी हिम्मत को नहीं।
जनता से हमारा वादा है: आप अकेले नहीं हैं। आपकी लड़ाई, हमारी लड़ाई है। इतिहास के सामने हमारा जवाब है: हम खड़े रहे। हमने आवाज़ उठाई। हमने हार नहीं मानी।
जय हिंद! जय संविधान ! जय SDPI!"
इस प्रोग्राम में sdpi अमरावती के तमाम पदाधिकारी, कार्यकर्ता और परिसर के नागरिक मौजूद थे।

Address

Amravati
444601

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when SDPI Amravati posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to SDPI Amravati:

Share