14/08/2026
वीर सावरकर और 'हिन्दुत्व' का सच्चा अर्थ
वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, वकील, समाज सुधारक और लेखक थे।
वे कौन थे और क्यों प्रसिद्ध हैं:
सावरकर ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए 'अभिनव भारत' नामक एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की। उन्होंने 1857 के सिपाही विद्रोह को भारत का "प्रथम स्वतंत्रता संग्राम" बताते हुए एक अत्यंत प्रभावशाली पुस्तक लिखी, जिसने भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों को गहराई से प्रेरित किया।
वे 'हिन्दुत्व' की विचारधारा को प्रतिपादित करने और उसे एक विशिष्ट राजनीतिक व सांस्कृतिक पहचान देने के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं।
उनके साथ क्या हुआ: अपनी उग्र क्रांतिकारी गतिविधियों और अटूट विद्रोह के कारण, उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दोहरी आजीवन कारावास (कुल 50 वर्ष) की सजा सुनाई गई और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात 'सेलुलर जेल' (काला पानी) भेज दिया गया,
जहाँ उन्होंने अकल्पनीय और अमानवीय यातनाएं सहीं।
'हिन्दुत्व' का अर्थ :-
हिन्दुत्व केवल एक धर्म नहीं है: सावरकर यह पूरी तरह स्पष्ट करते हैं कि हिन्दुत्व और 'हिंदू धर्म' (सनातन धर्म) एक ही बात नहीं हैं। सनातन धर्म, हिन्दुत्व की व्यापक अवधारणा का केवल एक छोटा सा हिस्सा है।
इसमें कौन शामिल हैं: हिन्दुत्व एक व्यापक और समावेशी विचारधारा है, जिसमें लिंगायत, आर्य समाजी, सिख, बौद्ध, जैन और भारतीय मूल की अन्य सभी आस्था प्रणालियाँ शामिल हैं।
वे सिखों को स्पष्ट रूप से "महानतम हिंदू" कहते हैं क्योंकि वे इस 'हिंद' (भारत) की रक्षा के लिए एक ढाल बनकर खड़े रहे।
हिंदू की वास्तविक परिभाषा: "आसिन्धु सिन्धु पर्यन्ता यस्य भारत भूमिका। पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरिति स्मृतः॥"
श्लोक का अर्थ: कोई भी व्यक्ति जो सिंधु नदी से लेकर समुद्र तक फैली इस विशाल भारतीय भूमि को अपनी 'पितृभूमि' (पूर्वजों की भूमि) और अपनी 'पुण्यभूमि' (इसके कल्चर, भाषाओं, खान-पान और त्योहारों को पूरी तरह से अपना मानते हुए) मानता है, वही सच्चा हिंदू है।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: वे रवींद्रनाथ टैगोर का उदाहरण देते हुए इसे स्पष्ट करते हैं।