12/01/2026
आजकल देश में कूटनीति का ऐसा 'हाइब्रिड मॉडल' चल रहा है कि आम आदमी का दिमाग चकरा जाए। एक तरफ NSA डोभाल साहब का कड़क बयान आया है— "हिंदू के हृदय में आग होनी चाहिए, बदला लेना चाहिए!"
सुनकर खून खौल उठा! युवा जिम जाने लगा, मुक्कियाँ भींचने लगा। लेकिन तभी उसके मोबाइल पर दो नोटिफिकेशन और आए:
1️⃣ पहला नोटिफिकेशन: बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के 'विरोध' में वहां ₹50 लीटर सस्ता तेल भेजा जाएगा।
2️⃣ दूसरा नोटिफिकेशन: भारत के 100 करोड़ हिंदुओं को वही तेल ₹92 लीटर में ही दिया जाएगा।
अब युवा भारी कंफ्यूजन में है कि 'बदला' किससे लेना है? 🤨
उस व्यवस्था से जो अपनों की जेब काटकर पड़ोसियों का चूल्हा जला रही है?
या उस बांग्लादेश से जहां हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है जिसे हम 'सजा' के तौर पर सस्ता तेल गिफ्ट कर रहे हैं?
मास्टरस्ट्रोक का लेवल तो देखिए:
एक तरफ जय शाह जी ने बांग्लादेशी खिलाड़ी को IPL से बाहर का रास्ता दिखा दिया (मानो असली युद्ध पिच पर ही लड़ा जा रहा था)। दूसरी तरफ, सौ करोड़ हिंदुओं से ₹92 वसूलकर उसी पैसे से बांग्लादेश को 'डिस्काउंट' दिया जा रहा है।
तर्क शायद यह है कि जब बांग्लादेशी हमारे दिए हुए सस्ते तेल से गाड़ियाँ चलाएंगे, तो उन्हें ग्लानि (Guilt) महसूस होगी! और यहाँ का हिंदू? वह ₹42 एक्स्ट्रा इसलिए दे रहा है ताकि डोभाल साहब के कहे अनुसार उसके हृदय की 'आग' जलती रहे—क्योंकि जेब खाली होगी तभी तो गुस्सा आएगा!
क्रोनोलॉजी समझिये:
लूट अपनी जनता से होगी ➔ सस्ता तेल पड़ोसी को मिलेगा ➔ पड़ोसी फिर से मजबूत होगा ➔ हिंदू फिर से खतरे में आएगा ➔ और 'सम्राट' फिर से रक्षक बनकर आएंगे।
यह बदला लेने का नहीं, बल्कि खुद की जेब 'बदलवाने' का दौर है। हृदय में आग जलाए रखिए, क्योंकि ₹92 लीटर वाला तेल वैसे भी अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होने वाला है!