Auraiya औरैया اوریہ

Auraiya   औरैया   اوریہ All people from Auraiya are welcome to join this community.

जनपद औरैया अपने नये युवा रत्नों के साथ आज आगे बढ़ता जा रहा है. साथियो, वो दिन था १७ सितम्बर,१९९७ जब दो तहसील औरैया और बिधूना जनपद इटावा से अलग कर दीं गयीं और जन्म हुआ हमारे राज्य के नये जनपद औरैया का जो कि जनपद का मुख्यालय भी है.

हमारा जनपद औरैया मुग़ल सराय मार्ग(रा.रा. ०२) पर कानपुर से १०४ किमी पश्चिम में, और इटावा से ६४ किमी दूर पूर्व में स्थित है.

समय के साथ हमारे जनपद ने बहुत जल्द ही राजनैति

क विसंगतियों से ग्रसित कुछ 'महापुरुषों' का कोप भी झेला है पर जैसा कि सर्वविदित है "जाके राखे साइंयां... " वो लोग भी हमारे इस जनपद का कुछ न कर सके.

पॉडकास्ट के माइक के सामने बैठकर कुछ लोगों को अचानक लगता है कि कानून उनकी जेब में और संविधान उनके जूते के नीचे रखा है।​भा...
04/09/2026

पॉडकास्ट के माइक के सामने बैठकर कुछ लोगों को अचानक लगता है कि कानून उनकी जेब में और संविधान उनके जूते के नीचे रखा है।
​भाई साहब कैमरे पर बैठकर ऐसे शेखी बघार रहे थे जैसे किसी का सिर फोड़ना, हत्या के प्रयास की धाराएं लगवाना और सिस्टम को ठेंगे पर रखना कोई ओलंपिक का गोल्ड मेडल हो! "अरे हमने सिर फोड़ दिया, 60 टांके लगवा दिए, फिर भी पूरी रात बाहर घूमते रहे... फलाने नेता जी हमारे बड़े भाई हैं, एक कॉल पर सब सेट है।"
​वाह! रसूख देखिए इनका, जैसे थानेदार सुबह उठकर पहले इन्हीं को हाजिरी लगाने आता हो।
​पर मजाल है कि ऐसे "इंटरनेट के बाहुबलियों" की हेकड़ी 24 घंटे भी टिक जाए। जैसे ही सोशल मीडिया पर लानत-मलानत शुरू हुई, विपक्ष ने संसद तक सवाल दागे और जिन 'बड़े भाइयों' का नाम लेकर हवाबाजी हो रही थी उन्होंने खुद एफआईआर करवा दी—भाई साहब का सारा बाहुबल अचानक धड़ाम हो गया।
​अब पुलिस की गाड़ी का सायरन बजते ही वही "शेर" अचानक भीगी बिल्ली बनकर कहने लगा— "अरे वो तो हम मज़ाक कर रहे थे जी, व्यंग्य था, सटायर था, हम तो बस आत्मरक्षा कर रहे थे!"
​अरे भाई! माइक पर तो तुम खुद को दिल्ली का डॉन बता रहे थे, अब थाने का गेट दिखते ही रोस्टिंग का 'कॉमेडियन' क्यों बन गए?
​असल में सोशल मीडिया ने कुछ लोगों को यह गलतफहमी दे दी है कि चार लाइक्स और कुछ हजार फॉलोअर्स का मतलब कानून से ऊपर होने का लाइसेंस है। पर सच यही है: कैमरे के सामने गुंडई की डींगें हांकना बहुत आसान होता है, लेकिन जब कानून का शिकंजा कसता है, तो सारी 'स्वतंत्रता' हवा हो जाती है और बस हवालात का सन्नाटा बचता है।

सत्तेश्वर मंदिर दर्शन, सावन मेला
28/08/2026

सत्तेश्वर मंदिर दर्शन, सावन मेला

28/08/2026

सत्तेश्वर मंदिर, औरैया, रक्षाबंधन

27/08/2026

Discover the timeless elegance of a beautifully aged bonsai. 🌿 Each intricate branch tells a story, a living piece of art that brings serenity and natural beauty to any space. ✨ Consider one for your home! 🏡

24/08/2026
 #औरैया  #न्यूज़
23/08/2026

#औरैया #न्यूज़

औरैया का इतिहास और एक ऐसा नेता जिसने अपनों से ही बगावत कर दी... ⏳​समय से ज्यादा बलवान कोई नहीं होता। हाल ही में औरैया के...
20/08/2026

औरैया का इतिहास और एक ऐसा नेता जिसने अपनों से ही बगावत कर दी... ⏳
​समय से ज्यादा बलवान कोई नहीं होता। हाल ही में औरैया के बहुचर्चित डबल मर्डर केस में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कानून और न्याय की नजर में जिसने जो गलत किया है, उसे उसकी सजा मिलती है।
​लेकिन इतिहास हमेशा हर इंसान के दोनों पहलुओं को सहेज कर रखता है। आज के दौर में ऐसे नेता दुर्लभ हैं, जो आम जनमानस की समस्याओं के लिए अपनी ही सरकार और अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़े हो जाएं। एक समय था जब औरैया में उनकी एक आवाज पर हजारों लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते थे। शहर के लोग आज भी उनके उन कामों को याद करते हैं जो औरैया के वजूद से हमेशा के लिए जुड़ गए:
​जिला बचाओ आंदोलन: साल 2003 में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने औरैया का जिला दर्जा खत्म करने का फैसला किया, तब कमलेश पाठक ही थे जिन्होंने औरैया के लिए अपनी ही सरकार से सीधी बगावत कर दी थी। उनके पीछे हजारों की भीड़ मुलायम सिंह को रोकने निकल पड़ी थी और उन्होंने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी थी।
​रातों-रात दूरदर्शन केंद्र की स्थापना: एक वह भी दौर था जब औरैया में लोगों के पास दूरदर्शन की सुविधा नहीं थी। शहरवासियों की मांग पर यह उनका ही रसूख था कि उन्होंने रातों-रात औरैया में दूरदर्शन केंद्र की स्थापना करवा दी थी।
​देवकली मंदिर का कायाकल्प: यमुना के बीहड़ों में स्थित औरैया की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र, प्राचीन देवकली मंदिर वर्षों तक उपेक्षित रहा। यह उनके ही अथक प्रयास थे कि मुलायम सिंह सरकार में इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और वहां विकास के नए कार्य किए गए।
'मिनी मुख्यमंत्री' का रुतबा और विकास: 1985 में मात्र 28 वर्ष की उम्र में सबसे युवा विधायक बनने वाले कमलेश पाठक का एक समय इतना दबदबा था कि लोग उन्हें 'मिनी मुख्यमंत्री' कहने लगे थे। वन निगम और बाद में रेशम विभाग के अध्यक्ष (राज्यमंत्री का दर्जा) रहते हुए उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर क्षेत्र के कई प्रशासनिक और आधारभूत कार्यों को गति दी।
छात्र और युवा राजनीति को बढ़ावा: औरैया के कॉलेजों में छात्र राजनीति को स्थापित करने और युवाओं को मंच देने में उनका बड़ा हाथ था। उन्होंने कई युवाओं को आगे बढ़ाया और उन्हें राजनीतिक पहचान दिलाई।
​निष्कर्ष:
आज वह सजा भुगत रहे हैं, जो कि न्याय की प्रक्रिया है। लेकिन औरैया के अस्तित्व को बचाने, यहाँ के मंदिरों और सुविधाओं के विकास में उनका जो भी योगदान रहा है, वह भी शहर की एक ऐसी हकीकत है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता।

आप सभी को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🐍🙏 इस शुभ दिन पर, भगवान शिव की कृपा हम सब पर बनी रहे। 🕉️✨  #नागपंचमी
17/08/2026

आप सभी को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🐍🙏 इस शुभ दिन पर, भगवान शिव की कृपा हम सब पर बनी रहे। 🕉️✨ #नागपंचमी

Keeping up with all the Auraiya local news! 📰 Always good to know what's happening around here. What's caught your eye r...
17/08/2026

Keeping up with all the Auraiya local news! 📰 Always good to know what's happening around here. What's caught your eye recently? 🤔

Address

Auraiya
206122

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Auraiya औरैया اوریہ posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share