22/02/2026
📿
आस्था से आत्मनिर्भरता तक: मथुरा के जैत गाँव की तुलसी माला परंपरा
मथुरा का जैत गाँव केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि जीवंत आस्था और श्रम की अद्भुत परंपरा का केंद्र है। यहाँ तुलसी के पौधों की सूखी लकड़ियाँ कारीगरों के हाथों से गुजरकर पवित्र तुलसी माला का रूप लेती हैं और हजारों परिवारों के जीवन में आजीविका की सुगंध भरती हैं। हर माला में केवल मनकों की श्रृंखला नहीं, बल्कि भक्ति, धैर्य और समर्पण का सूत्र पिरोया जाता है—जो सीधे श्रीकृष्ण की सेवा और श्रद्धा से जुड़ता है।
यह परंपरा ब्रज की आध्यात्मिक धरोहर को सहेजते हुए स्थानीय समुदाय को आत्मनिर्भर बना रही है और आस्था को रोजगार से जोड़ने का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है।