AYO Motive

AYO Motive इस चैनल में हम जिंदगी जीने के तरीके जिंदगी को कैसे किया जाए उसके बारे में बताते हैं

10/11/2023
रामायण के सात काण्ड - मानव की उन्नति के सात सोपान ~~1 बालकाण्ड 👉🏻 बालक प्रभु को प्रिय है क्योकि उसमेँ छल ,कपट , नही होता...
06/02/2023

रामायण के सात काण्ड - मानव की उन्नति के सात सोपान ~~

1 बालकाण्ड 👉🏻 बालक प्रभु को प्रिय है क्योकि उसमेँ छल ,कपट , नही होता ।
विद्या , धन एवं प्रतिष्ठा बढने पर भी जो अपना हृदय निर्दोष निर्विकारी बनाये रखता है , उसी को भगवान प्राप्त होते है। बालक जैसा निर्दोष निर्विकारी दृष्टि रखने पर ही राम के स्वरुप को पहचान सकते है। जीवन मेँ सरलता का आगमन संयम एवं ब्रह्मचर्य से होता है। बालक की भाँति अपने मान अपमान को भूलने से जीवन मेँ सरलता आती है।बालक के समान निर्मोही एवं निर्विकारी बनने पर शरीर अयोध्या बनेगा । जहाँ युद्ध, वैर ,ईर्ष्या नहीँ है , वही अयोध्या है।

2. अयोध्याकाण्ड 👉🏻 यह काण्ड मनुष्य को निर्विकार बनाता है l जब जीव भक्ति रुपी सरयू नदी के तट पर हमेशा निवास करता है, तभी मनुष्य निर्विकारी बनता है। भक्ति अर्थात् प्रेम , अयोध्याकाण्ड प्रेम प्रदान करता है । राम का भरत प्रेम , राम का सौतेली माता से प्रेम आदि ,सब इसी काण्ड मेँ है ।राम की निर्विकारिता इसी मेँ दिखाई देती है । अयोध्याकाण्ड का पाठ करने से परिवार मेँ प्रेम बढता है । उसके घर मेँ लडाई झगडे नहीँ होते । उसका घर अयोध्या बनता है । कलह का मूल कारण धन एवं प्रतिष्ठा है । अयोध्याकाण्ड का फल निर्वैरता है ।सबसे पहले अपने घर की ही सभी प्राणियोँ मेँ भगवद् भाव रखना चाहिए।।
3. अरण्यकाण्ड 👉🏻 यह निर्वासन प्रदान करता है ।इसका मनन करने से वासना नष्ट होगी । बिना अरण्यवास (जंगल) के जीवन मेँ दिव्यता नहीँ आती l रामचन्द्र राजा होकर भी सीता के साथ वनवास किया । वनवास मनुष्य हृदय को कोमल बनाता है । तप द्वारा ही कामरुपी रावण का बध होगा । इसमेँ सूपर्णखा (मोह ) एवं शबरी (भक्ति) दोनो ही है। भगवान राम सन्देश देते हैँ कि मोह को त्यागकर भक्ति को अपनाओ ।

4. किष्किन्धाकाण्ड 👉🏻 जब मनुष्य निर्विकार एवं निर्वैर होगा तभी जीव की ईश्वर से मैत्री होगी । इसमे सुग्रीव और राम अर्थात् जीव और ईश्वर की मैत्री का वर्णन है। जब जीव सुग्रीव की भाँति हनुमान अर्थात् ब्रह्मचर्य का आश्रय लेगा तभी उसे राम मिलेँगे । जिसका कण्ठ सुन्दर है वही सुग्रीव है। कण्ठ की शोभा आभूषण से नही बल्कि राम नाम का जप करने से है। जिसका कण्ठ सुन्दर है , उसी की मित्रता राम से होती है किन्तु उसे हनुमान यानी ब्रह्मचर्य की सहायता लेनी पडेगी ।

5. सुन्दरकाण्ड 👉🏻 जब जीव की मैत्री राम से हो जाती है तो वह सुन्दर हो जाता है । इस काण्ड मेँ हनुमान को सीता के दर्शन होते है। सीताजी पराभक्ति है , जिसका जीवन सुन्दर होता है उसे ही पराभक्ति के दर्शन होते है ।संसार समुद्र पार करने वाले को पराभक्ति सीता के दर्शन होते हैl ब्रह्मचर्य एवं रामनाम का आश्रय लेने वाला संसार सागर को पार करता है । संसार सागर को पार करते समय मार्ग मेँ सुरसा बाधा डालने आ जाती है , अच्छे रस ही सुरसा है , नये नये रस की वासना रखने वाली जीभ ही सुरसा है। संसार सागर पार करने की कामना रखने वाले को जीभ को वश मे रखना होगा । जहाँ पराभक्ति सीता है वहाँ शोक नही रहता , जहाँ सीता है वहाँ अशोकवन है।

6. लंकाकाण्ड 👉🏻 जीवन भक्तिपूर्ण होने पर राक्षसो का संहार होता है काम क्रोधादि ही राक्षस हैँ । जो इन्हेँ मार सकता है , वही काल को भी मार सकता है जिसे काम मारता है उसे काल भी मारता है , लंका शब्द के अक्षरो को इधर उधर करने पर होगा कालं । काल सभी को मारता है l किन्तु हनुमान जी काल को भी मार देते हैँ । क्योँकि वे ब्रह्मचर्य का पालन करते हैँ पराभक्ति का दर्शन करते है ।
7. उत्तरकाण्ड 👉🏻 इस काण्ड मेँ काकभुसुण्डि एवं गरुड संवाद को बार बार पढना चाहिए । इसमेँ सब कुछ है । जब तक राक्षस , काल का विनाश नहीँ होगा तब तक उत्तरकाण्ड मे प्रवेश नही मिलेगा । इसमेँ भक्ति की कथा है । भक्त कौन है ? जो भगवान से एक क्षण भी अलग नही हो सकता वही भक्त है । पूर्वार्ध मे जो काम रुपी रावण को मारता है उसी का उत्तरकाण्ड सुन्दर बनता है , वृद्धावस्था मे राज्य करता है । जब जीवन के पूर्वार्ध मे युवावस्था मे काम को मारने का प्रयत्न होगा तभी उत्तरार्ध - उत्तरकाण्ड सुधर पायेगा । अतः जीवन को सुधारने का प्रयत्न युवावस्था से ही करना चाहिए।

🚩 हर हर महादेव 🚩
[21/01, 06:20] ANJANI NANDANSHARANMISHRA: श्रीमद्भागवत महापुराणमें भागवतधर्मोंके उपदेशों को धारण करनेवाले के लिये कहा है कि वह "मृत्युको अनायास ही जीत लेते हैं" जबकि इस शरीरको मृत्युसे कोई नहीं बचा सकता है - यही सब समझाते हुए श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् ने कहा है -
परम सिद्धिको प्राप्त महात्माजन मुझको प्राप्त होकर दुःखोंके घर एवं क्षणभङ्गुर पुनर्जन्मको नहीं प्राप्त होते।।- यही मृत्युको जीत लेना है।
यह परम सिद्धिको प्राप्त करना क्या है? अथवा यह परम सिद्धि प्राप्त कैसे होती है? इसके लिये कहा है -
शुद्धान्तःकरण पुरुष जब आकाशके समान बाहर और भीतर परिपूर्ण एवं आवरणशून्य मुझ परमात्माको ही समस्त प्राणियों और अपने हृदयमें स्थित देखता है, जब निरन्तर सभी नर-नारियोंमें एवं पदार्थोंमें भी मेरी ही भावना की जाती है, तभी इसीको 'अनन्यभक्ति' एवं परम सिद्धिको प्राप्त हुआ कहा जाता है। और -
हे अर्जुन! जो पुरुष मुझमें अनन्य चित्त होकर सदा ही निरन्तर मुझ पुरुषोत्तमको स्मरण करता है, उस नित्य-निरन्तर मुझमें युक्त हुए योगीके लिये मैं सुलभ हूँ, अर्थात् उसे सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ।।
और जो यह अविनाशी जीवात्मा अव्यक्तभावसे है -
उस अव्यक्तसे भी अति परे दूसरा अर्थात् विलक्षण जो सनातन अव्यक्तभाव है, वह परम दिव्य पुरुष सब भूतोंके नष्ट होनेपर भी नष्ट नहीं होता।।
जो अव्यक्त 'अक्षर' इस नामसे कहा गया है, उसी अक्षर नामक अव्यक्तभावको परमगति कहते हैं तथा जिस सनातन अव्यक्तभावको प्राप्त होकर मनुष्य वापस नहीं आते, वह मेरा परम धाम है।।
हे पार्थ! जिस परमात्माके अन्तर्गत सर्वभूत हैं और जिस सच्चिदानन्दघन परमात्मासे यह समस्त जगत् परिपूर्ण है, वह सनातन अव्यक्त परम पुरुष तो अनन्य भक्तिसे ही प्राप्त होने योग्य है।।

🚩 हर हर महादेव 🚩
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Arun Singh

04/02/2023

श्री रामचरित मानस, ज्ञान का सागर
#बागेश्वरधाम


एक बुखार से पीड़ित व्यक्ति मिशनरी हास्पिटल जाता हैं,उसे डॉक्टर कैंसर बता देते हैं,और उस रोते बिलखते परिवार को कोई बाप मि...
20/01/2023

एक बुखार से पीड़ित व्यक्ति मिशनरी हास्पिटल जाता हैं,
उसे डॉक्टर कैंसर बता देते हैं,
और उस रोते बिलखते परिवार को कोई बाप मिलता हैं (फादर)
चंगाई प्रार्थना में आने को कहता है और ठीक होने का आश्वासन देता है,
हालेलुया हालेलुया करके एनांउस कर देता है,
अब तुम ठीक हो गए,
और उसके बाद वही हास्पिटल उसकी जांच करके डिक्लेयर करता है,
अब तुम ठीक हो गए बिना दवाई के तुम्हें कोई कैंसर नहीं हैं,
ईशु ने सब ठीक कर दिया,
प्रभु ईसा की शरण में आ जाओ,
और वो प्रभावित परिवार ईशाई धर्म स्वीकार कर लेता है,
क्या है ये अंधविश्वास नहीं है??
और एक व्यक्ति जो केवल यह कहता है हनुमान जी सब ठीक करेंगे,
बाला जी महराज की जय,
वो अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहा है,
अरे वाह गजब का आरोप हैं,
लोगों को आगे बढ़ कर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम) का समर्थन करना चाहिए,
यह एक विशेष लॉबी का चलाया गया अभियान हैं...
#बागेश्वरधाम
Arun Singh

जिस देश के अखबार के पहले पेज पर गुटखे का प्रचार हो उस देश की सड़कों पर थूक ही मिलेगा ।।
20/01/2023

जिस देश के अखबार के पहले पेज पर गुटखे का प्रचार हो उस देश की सड़कों पर थूक ही मिलेगा ।।

11/01/2023

कैसा लगा अवतार
AYO Motive

मानसिक गुलामी
07/01/2023

मानसिक गुलामी

कैसे हो सर जी "Slave I Remain" (SIR)

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