10/10/2025
⚔️ 1857 क्रांति की अमर गौरव गाथा ⚔️
⚔️⚔️ राजा बेनी माधव सिंह ⚔️⚔️
अग्रेजों के खिलाफ, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता सग्रांम आदोंलन के जन नायक सेनानी वीर योध्दा रण बाकुंर बौडरा रियासत (स्टेट) अतरौलिया जिला आजमगढ़ के कुल भूषण #राजा_बेनी_माधव_सिंह (10 अक्टूबर 1874) 1857 की क्रांति मे आजमगढ़ से ब्रिटानिया हुकूमत को ईट से ईट बजाने वाले वीर योध्दा के 151वी० पुण्यतिथि पर शत् शत् प्रणाम 🙏💐🇮🇳
#स्वर्णिम_इतिहास_के_कुछ_पृष्ठ...
आजादी के दीवाने वीर सपूत देश को स्वतंत्र करने के लिए लड़ते रहे। आजादी की लडा़ई मे अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जमीन नीलाम हो गयीं, किलो को अग्रेजों ने रौद डाला लेकिन इन वीर सपूतों के चेहरे पर शिकन तक नहीं आयी। आजीवन देश के लिए लड़ते रहे।
एक भाई को अग्रेजों ने खुलेआम इमली के पेड़ पर फांसी दे दिया तो दूसरा भाई 16 वर्ष तक फरार रहते हुए देश की आजादी के लिए संघर्ष करता रहा मगर अफसोस, कि परिवार का इतिहास के पन्नों मे दफन होकर रह गया।
1771 से 1801 तक आजमगढ़ अवध के नवाब के शासन मे था 10 नवंबर 1801 आजमगढ़ कम्पनी शासन के अधीन चला गया। 1857 मे नवाब वाजिद अली शाह की गिरफ्तारी के बाद सूबे मे क्रांति की आग भड़की जिसका सीधा प्रभाव आजमगढ़ पर पड़ा क्योंकि तत्कालीन अवध राज्य की सत्ता की बागडोर जिन तीन व्यक्तियो के हाथ मे थी वे आजमगढ़ के ही थी।
इसमें राजा जयलाल सिंह अवध के समाहर्ता कलेक्टर थे इनके मझले भाई राजा बेनी माधव सिंह पूर्वी इलाके के सूबेदार तथा अवध सेना के सिपहसालार-ए-आजम थे जबकि इनके सबसे छोटे भाई फतेह बहादुर सिंह नसरते जंग अवध सेना के कमाण्डर थे।
अतरौलिया बाजार के पूरब राजा बेनी माधव सिंह का किला, फैजाबाद जिले की सीमा से कुछ दूर पर मऊ शिवाला व कोयलसा आजमगढ़ का किला, केशवपुर का पुराना पुल, मंदुरी का बाग, राजा साहब का बाग, बौडरा का अस्त्र शस्त्र का किला जहाँ राजा साहब का शास्त्रागार हुआ करता था उनकी शौर्य गाथा बयां करता हैं। अतरौलिया मे हाथी घोड़ो और सशस्त्र सौनिकों से अलंकृत राजा बेनी माधव सिंह का कोर्ट था जहाँ उनकी कचहरी लगती थी कोर्ट के चारों ओर खाईयां थी इस कोर्ट का पक्का पोखरा (पूरब पोखरा) और राजा साहब की कुल देवी सम्मो माता का शिवालय (मंदिर) उनके वैभव के प्रतीक स्वरूप आज भी विधमान हैं मौजूदा समय अतरौलिया का थाना भवन जिस भूमि पर हैं वहां राजा बेनी माधव सौनिक व घोड़े हाथी रहते थे जिसे अग्रेजों ने तोप से उड़ा दिया था।
#परिचय....
बौड़रा लछिरामपुर के कुर्मी परिवार के गरीबदास के पुत्र राजा दर्शन सिंह तत्समय बहादुरी, वफादारी और व्यक्तित्व मे समाहित गुण के नाते ओहदो मे तरक्की करते करते सिपहसालार-ए-आजम (कमाण्डर-इन-चीफ) बन गये थे। गालिब-जगं के खिताब से नवाजा गया था। लखनऊ, फैजाबाद, आजमगढ़ मे उन्हें जागीर दी गई थी।
4 जुलाई 1857 को 11 वर्षीय पुत्र विरजिस कदर के गद्दी बैठने के पश्चात लार्ड डलहौजी ने अवध को अग्रेजी साम्राज्य मे समाहित कर लिया। देश प्रेम के जज्बो से लबरेज राजा दर्शन सिंह के पुत्रगण राजा जयलाल सिंह अवध समाहर्ता क्लेक्टर, मझले भाई राजा बेनी माधव सिंह पूर्वी इलाके के सूबेदार व अवध सेना सिपहसालार-ए-आजम, छोटे भाई राजा फतेह बहादुर सिंह नसरते जगं अवध सेना कमाण्डर जिन्होंने अग्रेजों की अधीनता स्वीकार नहीं किया। राजा बेनी माधव सिंह अवध से भारी संख्या मे तोपें बन्दूक व आग्नेयास्त्र गुप्त रूप से ले आये और बौडरा के घने जगलों मे जहाँ उनकी कुटी थी छिपा दिया सशस्त्र सौनिक रहते थे।
राजा बेनी माधव को अग्रेजो का बढता प्रभाव व साम्राज्य उध्देलित करता रहता था। 1857 मे नाना साहब अजीमुल्लाह, अवध की बेगम हजरत महल, झांसी की रानी, बिहार के कुँवर सिंह से होते रहे सम्पर्क बाद अग्रेजों को देश से खदेड़ने का विस्तृत योजना बनीं।
भाई राजा जयलाल सिंह व राजा फतेह बहादुर सिंह, अहीरीपुर ग्राम निवासी तोपची मघई यादव, अतरौलिया के बलवन्त सिंह 49 कोस रहने वाली पालीवाल बिरादरी के लोगों मे से मुख्यतः मर्दन सिंह, भोला सिंह, तिघरा के ताल्लुकेदार पृथ्वी पाल सिंह, ग्राम भीमलपुर निवासी सेनापति ठाकुर हरिनाम सिंह व स्थानीय व निकटवर्ती क्षेत्रों के हजारों सौनिकों के साथ राजा बेनी माधव सिंह ने अग्रेजों से अनेक लड़ाइया लडीं।
अतरौलिया, भोराजपुर की बाग, कोयलसा का वह मैदान जहाँ मौजूदा समय डिग्री कालेज, इण्टर कालेज व जवाहर मैदान है मदुंरी की बाग मे हुए अग्रेजों का आक्रमण विफल कर राजा बेनी माधव सिंह ने अग्रेजों को गाजीपुर की सीमा तक खदेड़ा था। अग्रेजों ने तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट वेनवुत्स के निर्देशन मे बड़ी सेना गुप चुप तरीक़े से भेज कर मदुंरी बाग मे राजा बेनी माधव सिंह की सो रही सेना पर जोरदार हमला कर बड़ा कत्लेआम किया था। राजा साहब का कोर्ट तोप से ध्वस्त किया गया। सारे परिवार को अग्रेजों ने बागी करार दिया 14 मई 1857 को उनकी सारी सम्पत्ति ब्रिटिश सरकार ने जप्त कर ली थी।
अग्रेजों की बड़ी सेना से चारो तरफ से घिरे राजा बेनी माधव सिंह, राजा फतेह बहादुर सिंह, पृथ्वी पाल सिंह व विश्वस्त सौनिक के साथ केशवपुर पुल तोड़ते हुए लखनऊ पहुंचे वहाँ भाई राजा जयलाल सिंह के साथ अग्रेजों से कई लड़ाइया लड़ी। इस क्रम फतेह बहादुर सिंह शहीद हो गये, राजा जयलाल सिंह बन्दी बना लिए गये। पहली अक्टूबर 1859 को राजा जयलाल सिंह को उनके महल परिसर के समाने इमली के पेड़ पर लटाकाकर फांसी दे दी गई।
राजा बेनी माधव सिंह ने अवध की बेगम साहिब, नाना साहब व विश्वस्त सैनिकों के साथ शंकरगढ़ पर चढाई कर दी पर कम सेना के कारण परास्त हो गये। तब राजा बेनी माधव सिंह, राजा जयलाल सिंह आदेशानुसार बेगम हजरत महल पुत्र विरजिस कदर लेकर सुरक्षित नेपाल चले गये। इसी बीच अग्रेजों ने अतरौलिया पर चार बार हमला बोलकर खूब लूट पाट की। लगभग 16 वर्ष तक फरार रहते हुए देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए अपनी जन्मभूमि बौडरा लौटे किसी समय जहाँ उनका शस्त्रागार हुआ करता था और फिर 52 गांव खरीदकर, 52 गांव के जमींदार बने। भारत के वीर सुपुत्र राजा बेनी माधव सिंह, बौडरा जन्मभूमि पर 10 अक्टूबर 1874 को उनका स्वर्गवास हो गया।
#हमारा_प्रयास....
हमारा प्रयास है कि कुर्मी समाज के गौरव शाली इन पुरखों की कुरबानियों की कीर्ति पूरे देश मे बिखरे, राजा बेनी माधव सिंह, अमर शहीद राजा जयलाल सिंह की जन्मभूमि अतरौलिया-आजमगढ़़ में उनके नाम से भव्य स्मारक व अदमकद प्रतिमा स्थापित, राजा साहब का गृह जनपद मे निर्माणाधीन आजमगढ़ एअरपोर्ट का नाम अमर शहीद राजा जयलाल सिंह रखा जाये और पाठ्य पुस्तकों व साहित्य पुस्तकों में बलिदान की चर्चा हो। और भारत सरकार, आयोग गठित करके राजा बेनी माधव सिंह के साथ शहीद हुए हजारों हजार सैनिकों के वंशजों का पता लगायें। उन्हीं यथोचित सम्मान मिले, सड़कों व योजनाओं का नाम इनके नाम पर हो ताकि मौजूदा व भावी पीढी इनके बारे मे जाने सके और प्रेरणा ले सके।
"आओ सर्व प्रथम हम उनको श्रद्धा के सुमन चढाये ! वह शाक्ति हमें दो भारत माँ हम उन जैसा कुछ कर पायें"
1857 के क्रांतिकारी अमर शहीद राजा जयलाल सिंह (बेगम हजरत महल के सेनापति), राजा बेनी माधव सिंह पिता राजा दर्शन सिंह (गालिब जंग) राजघराने से 6वी० पीढी..
कुंवर ऋषभ सिंह
बौडरा रियासत (स्टेट)
(प्रदेश युवा सहायक मंत्री, कू.क्ष.स. लखनऊ)
अतरौलिया आजमगढ़ (उ०प्र०)
राजा दर्शन सिंह, अमर शहीद राजा जयलाल सिंह, राजा बेनी माधव सिंह, राजा फतेह बहादुर सिंह अमर रहें !!
Narendra Modi
Amit Shah
MYogiAdityanath
Anupriya Patel अनुप्रिया पटेल
Brajesh Pathak
Keshav Prasad Maurya
Rakesh Sachan
Ashish Patel
Swatantra Dev Singh
Government of UP