23/01/2026
राष्ट्र की अस्मिता के सजग प्रहरी, धर्म रक्षक और अदम्य साहस के प्रतीक, चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव पासी जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।
महाराजा सुहेलदेव ने अपनी वीरता और कुशल रणनीति से न केवल विदेशी आक्रांताओं को परास्त किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। बहराइच की धरती पर उनकी विजय गाथा आज भी हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाती है।
आइए, आज हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लें।
बहराइच की माटी जिसका, शौर्य गान है गाती,
जिसके रणकौशल से शत्रु की, रूह तक कांप है जाती।आक्रांताओं को धूल चटाकर, जिसने धर्म बचाया था,
भारत की अस्मिता पर, अपना मान लुटाया था।
पासी कुल का गौरव वह, जन-जन का वह त्राता था,सुहेलदेव जैसा योद्धा ही, सच्चा भाग्य विधाता था।
नमन है उस महानायक को, नमन है वीर शिरोमणि को,कोटि-कोटि वंदन उस पावन, राष्ट्र-रक्षक की पद-रजत को।
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