07/08/2026
राजस्थान के डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मेरी बात हुई। 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त को आए फैसले से वे बेहद आहत हैं। उनकी एक ही पीड़ा है यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो फिर उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या किसने की?
वर्ष 2015 में राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में हुए इस जघन्य हत्याकांड में 5 दलितों सहित कुल 6 लोगों की नृशंस हत्या हुई, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब एससी-एसटी विशेष अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने से पीड़ित परिवार स्वयं को न्याय से वंचित महसूस कर रहा है।
यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है। इस फैसले ने पूरे क्षेत्र, विशेषकर दलित समाज के लोगों के बीच असुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। लोगों के मन में यह सवाल है कि यदि इतनी बड़ी घटना में भी दोषियों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा और कानून के प्रति विश्वास कैसे कायम रहेगा?
डांगावास का फैसला उन पुराने जख्मों को फिर ताज़ा कर गया है, जो लक्ष्मणपुर बाथे जैसे नरसंहारों ने दलित समाज को दिए थे। वर्ष 1997 में बिहार के लक्ष्मणपुर बाथे में 58 दलितों का नरसंहार किया गया था, जिसमें 27 महिलाएं और 16 मासूम बच्चे भी शामिल थे। वर्षों बाद उस मामले में भी सभी आरोपी बरी हो गए। आज देश जानना चाहता है कि यदि सभी आरोपी निर्दोष हैं, तो इन निर्दोष लोगों की हत्या आखिर किसने की?
परिवार ने बताया है कि वे इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन न्याय की इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। हमें विश्वास है कि राजस्थान हाईकोर्ट में मामले के सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा होगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।