10/09/2026
एक पल के लिए ठहरकर सोचिए… हमारी खुशी की तेज आवाज़ कहीं किसी और की तकलीफ तो नहीं बन रही? डीजे की आवाज़ में हमें उत्सव और खुशी सुनाई देती है, लेकिन उसी तेज ध्वनि में किसी मरीज की बेचैनी, किसी बुजुर्ग की परेशानी, किसी बच्चे की घबराहट या किसी परिवार का सुकून भी छिपा हो सकता है। हम नहीं जानते कि हमारे आसपास कौन व्यक्ति पहले से बीमार है, किस घर में कोई आराम कर रहा है, किस बच्चे की परीक्षा है या किस बुजुर्ग को तेज आवाज़ से परेशानी होती है।
खुशी मनाइए… जरूर मनाइए।
लेकिन ऐसी खुशी नहीं, जिसके कारण किसी दूसरे की आंखों में परेशानी के आंसू आ जाएं।
हम सब अलग-अलग धर्म और जाति से हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत हम सबको एक करती है।
हमारा त्योहार तभी सच्चा और खूबसूरत है, जब हमारी खुशी के साथ हमारे पड़ोसी का सुकून भी सुरक्षित रहे। रितेश राजवाड़ा भाई की यह अपील सिर्फ आवाज़ कम करने की बात नहीं है—यह एक-दूसरे की जिंदगी और भावनाओं का सम्मान करने की अपील है।
आइए, आवाज़ थोड़ी कम करें… और इंसानियत की आवाज़ थोड़ी ऊंची करें।