10/08/2025
एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी के संस्थापक काॅमरेड शिवदास घोष की 50वीं स्मृति दिवस पर जनसभा आयोजित हुई।
10 अगस्त 2025 / बदलापुर, जौनपुर, उ.प्र
आजादी आंदोलन के गैर समझौतावादी धारा के अग्रणी क्रांतिकारी, सर्वहारा वर्ग के महान नेता, विख्यात मार्क्सवादी दार्शनिक तथा एस.यू.सी.आई (कम्युनिस्ट) पार्टी के संस्थापक महासचिव कॉमरेड शिवदास घोष की 50वीं स्मृति दिवस के अवसर पर आज दिनांक 10 अगस्त 2025 को जनसभा का आयोजन माया मैरिज हॉल बदलापुर, जौनपुर में किया गया। इस जनसभा में जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, बलिया गाजीपुर, मऊ, बनारस सहित कई जिलों से सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने हिस्सा लिये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता- काॅमरेड जगन्नाथ वर्मा (राज्य कार्यालय सचिव, एसयूसीआई (सी), पूर्वी उत्तर प्रदेश) व संचालन- कॉमरेड रविशंकर मौर्य (राज्य सचिव, एसयूसीआई (सी), पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने किया। जनसभा के मुख्य वक्ता - कॉमरेड शंकर घोष [ केंद्रीय कमेटी सदस्य, एसयूसीआई (सी) ] ने संबोधित करते हुए कहा कि-
किशोरावस्था में ही काॅमरेड शिवदास घोष स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा में शामिल हो गए थे। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने उस दौर के सबसे बड़े क्रांतिकारी संगठन 'अनुशीलन समिति' के एक स्वयंसेवक के रूप में की थी। बहुत कम समय में ही वे एक जिम्मेदार संगठक बन गए। 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन" में वे ओतप्रोत रूप से जुड़ गए एवं गिरफ्तार हो गए। उससे पहले, इस देश के कई विचारशील लोगों की तरह, वे मार्क्सवाद से परिचित हो गए थे। लेकिन उन्हें मार्क्सवाद का गहराई से अभ्यास करने का अवसर नहीं मिला था। उन्हें यह अवसर जेल में मिला और तीन साल (1942 से 1945) तक उन्होंने मार्क्सवाद के विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया एवं अभ्यास में अपने आपको नियोजित किया । इस अभ्यास के माध्यम से ही उनमें मार्क्सवाद की गहरी समझ विकसित हुई। इस तरह 24 अप्रैल 1948 को भारतवर्ष की धरती पर एकमात्र कम्युनिस्ट पार्टी- एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की स्थापना और उसकी प्रगति हुई । वास्तव में, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) का इतिहास कॉमरेड शिवदास घोष के जीवन संघर्ष का इतिहास है। इसलिए, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) और कॉमरेड शिवदास घोष एक एवं अभिन्न हैं।
पार्टी गठन के इस संघर्ष के माध्यम से ही उन्होंने इस देश की मिट्टी के अनुसार मार्क्सवाद-लेनिनवाद को विशेषीकृत करते हुए इस ज्ञान भंडार में नये विषय को संयोजित किया एवं समृद्ध किया। काॅमरेड शिवदास घोष की प्रत्यक्ष देखरेख में, एस यू सी आई (कम्युनिस्ट) ने स्थापना के बाद से ही पूंजीवाद विरोधी समाजवादी क्रांति के लक्ष्य को सामने रखते हुए एक के बाद एक आंदोलन संगठित किए । उनके जीवन काल में ही पार्टी देशव्यापी स्तर पर फैल गई थी। 5 अगस्त 1976 को उनकी मृत्यु के बाद, उनकी शिक्षाओं के आधार पर ही भारतवर्ष के लगभग सभी राज्यों में पार्टी का संगठन और भी अधिक विस्तृत हुआ है, तथा देश के बाहर भी उनके विचारों और संघर्षों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
इस वर्ष कॉमरेड शिवदास घोष की 50वीं स्मृति दिवस हम ऐसे समय में मना रहे हैं, जब पूरे देश में आम जन जीवन असंख्य समस्याओं से ग्रसित है। इस पतनशील पूंजीवादी व्यवस्था को बचाने के लिए केंद्र और राज्यों के सत्तारूढ़ पार्टियों की गतिविधियों के परिणामस्वरूप सामाजिक व आर्थिक असमानता जमीन और आसमान की दूरी के समान हो गयी है। भूखमरी और इलाज के अभाव में मौतें अब रोजाना की घटनाएं हो गई हैं। नई शिक्षा नीति 2020 का दुष्प्रभाव है कि, सरकारी शिक्षा विध्वंश के कगार पर है। उत्तर प्रदेश में जहां, 27000 सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है वहीं उत्तर प्रदेश भर में ही 27000 से ज्यादा शराब की दुकानों को खोला जा रहा है। जुलाई-अगस्त महीने में जिन बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करना चाहिए, आज उन्हें अपना स्कूल बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
अब बिजली लोगों की आवश्यक जरूरत बन चुकी है। लेकिन बिजली की समस्यायें भयंकर रूप ले रही है, जिसे बिजली संशोधन अधिनियम 2023 के माध्यम से निजीकरण के हवाले किया जा रहा है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर के माध्यम से आम उपभोक्ताओं को लूटने की खुली छूट दी जा रही है। इस तरह बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में घोर भ्रष्टाचार व्याप्त है। सरकार की तमाम जन विरोधी नीतियों के परिणामस्वरूप योग्य शिक्षक अपनी नौकरियां खोकर रास्ते पर आ गये हैं, घर-घर में बेरोजगारों की भीड़ बढ़ रही है। मजदूरों को उचित मजदूरी एवं रोजगार की गारंटी नहीं मिल रही, खेतिहर मजदूरों की दुर्दशा चरम पर है। किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है, जबकि खेती की लागत बढ़ती जा रही है। परिणामस्वरूप लाखों किसान कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। महंगाई चरम पर है। हिंसा, अपराध, हत्या, रेप, गैंगरेप बढ़ते जा रहे हैं। एक तरफ जहां शराब व नशा का कारोबार बढ़ रहा है एवं दूसरी तरफ महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है। इसके साथ साथ समाज में सामग्रिक रूप से नीति - नैतिकता और संस्कृति का पतन हो रहा है।
इस असहनीय स्थिति के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग संगठित हो रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं। शासक वर्ग इससे भयभीत है। इसलिए वह जन-जीवन की समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक उन्माद व सांप्रदायिकता का जहर फैला रहा है। इसके साथ ही युद्ध का उन्माद पैदा कर देश की जनता में देशभक्ति की गलत धारणा पैदा करके उन्हें असली मुद्दों से भटकाने की साजिश चल रही है। केवल इस देश में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में पूंजीवादी देश अपनी अर्थव्यवस्था के गंभीर संकट से खुद को बचाने के लिए तरह-तरह के बहाने से युद्ध छेड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों समेत अनगिनत लोग इसके शिकार बन रहे हैं।
देश की जनता को इस दयनीय स्थिति से मुक्ति दिलाने के लिए सही नेतृत्व में जन आंदोलनों को मजबूत करने की शपथ लेने का आह्वान देता है यह 5 अगस्त का दिन।
इस अवसर पर अशोक कुमार खरवार, हीरालाल गुप्त, बेचन अली, शैलेंद्र कुमार, जयप्रकाश मौर्य, विजयानंद तिवारी, त्रिभुवन शर्मा, मुन्ना शर्मा, रामकुमार यादव, हरिशंकर मौर्य, रामसमुझ मौर्य, मकरध्वज चौहान, मिथिलेश मौर्य, दिलीप कुमार, उषा सिंह, मीता गुप्ता, सरोजा कन्नौजिया, पूनम प्रजापति, अनीता निषाद सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।