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◼️ ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं : सीपीआइ (एम)                              चुनाव आयोग में सुधार हो!🔴 भ...
30/09/2026

◼️ ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं : सीपीआइ (एम)
चुनाव आयोग में सुधार हो!
🔴 भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार को भारतीय चुनाव आयोग में अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया है! पार्टी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था में सुधार किए जाने की भी मांग की है। सीपीआइ (एम) महासचिव, एमए बेबी ने 23 सितंबर को, नई-दिल्ली में एके गोपालन भवन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग के संंबंध में ये मांगें रखीं।

🔴 वह चुनाव आयोग के कामकाज के संबंध में उसी सुबह इंडियन एक्सप्रेस में आयी रिपोर्ट के संदर्भ में प्रेस से बात कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि
मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) के गिर्द इंडियन एक्सप्रेस (23 सितंबर) द्वारा जो विस्फोटक भंडाफोड़ किए गए हैं, उनसे न सिर्फ इस प्रक्रिया के संबंध में बल्कि इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण तरीके से भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआइ) की निष्ठा को ही लेकर सवाल उठते हैं।

🔴 इन रहस्योद्घाटनों ने उन संदेहों तथा चिंताओं को ही और पुख्ता किया है, जिन्हें एसआइआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही लगातार सीपीआइ (एम) द्वारा, अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा और सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा उठाया जाता रहा था।

🔴 खबरें बताती हैं कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने मतदाता सूची में संशोधन तथा एसआइआर की प्रक्रिया से जुड़े अनेक निर्णयों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करायी थीं। कानून यह कहता है कि तीनों चुनाव आयुक्तों की शक्तियां बराबर हैं और उनके बीच कोई मतभेद हो तो, सर्वानुमति से या फिर बहुमत के जरिए ही उसे हल किया जा सकता है। लेकिन, मुख्य चुनाव आयुक्त इस नियम का अनुसरण नहीं कर रहे हैं बल्कि चुनाव आयोग के अपने अन्य सहयोगियों द्वारा उठायी गयी आपत्तियों को अनदेखा कर, अपनी ही राय थोपते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इन मतभेदों का संबंध इस प्रकार के बुनियादी प्रश्नों से है कि मतदाता सूचियों में किस तरह मतदाताओं को जोड़ा जा रहा है या हटाया जा रहा है और एसआइआर को किस तरह से लागू किया जा रहा है।

🔴 अब यह उजागर हो रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त शुरू से इसका झूठा ही दावा करते आ रहे थे कि समूची प्रक्रिया पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि पिछले कुछ महीनों से इस समूची व्यवस्था को इस हद तक केंद्रीयकृत कर दिया गया है कि यही धुंधलके में चला गया है कि वास्तव में फैसले ले कौन रहा है। सुप्रीम कोर्ट तक ने प्रौद्योगिकी पर अति-निर्भरता और ‘‘यांत्रिक’’ तरीके से नोटिस जारी किए जाने के मुद्दे उठाए हैं।

🔴 दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दे एसआइआर की प्रक्रिया से आगे तक जाते हैं। इनका संबंध चुनाव आयोग की संवैधानिक ईमानदारी तथा जनतांत्रिक कामकाज से, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से, अति-केंद्रीकरण से और सार्वभौम वयस्क मताधिकार के अधिकार की हिफाजत से है। एक निष्पक्ष संस्था के रूप में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता ही दांव पर लगी हुई है।

🔴 बेईमान चुनाव आयोग से जनता का भरोसा उठ गया है, जिसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। वह अब और अपने पद पर नहीं रह सकते हैं।

🔴 सीपीआइ (एम) पोलिट ब्यूरो ने एसआइआर की प्रक्रिया फौरन रोके जाने की भी मांग की है। भारतीय चुनाव आयोग की ईमानदारी तथा जनतांत्रिक कार्यप्रणाली को बहाल किया जाना चाहिए। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी, जिसके लिए संबंधित कानून को निरस्त करना होगा और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को स्वीकार करते हुए एक नया कानून बनाना होगा, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश से बनी चयन समिति की व्यवस्था हो।
Party of India (Marxist)

एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चर्चा करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर सामूहिक...
30/09/2026

एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चर्चा करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर सामूहिक कार्रवाई की योजना बनाने के लिए इंडिया (INDIA) गठबंधन की नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक हो रही है।
सी पी आई (एम)के महासचिव एम. ए. बेबी और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, इंडिया गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ इस बैठक में भाग ले रहे हैं।

◼️ ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं : सीपीआइ (एम)                              चुनाव आयोग में सुधार हो!🔴 भ...
24/09/2026

◼️ ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं : सीपीआइ (एम)
चुनाव आयोग में सुधार हो!
🔴 भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार को भारतीय चुनाव आयोग में अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया है! पार्टी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था में सुधार किए जाने की भी मांग की है। सीपीआइ (एम) महासचिव, एमए बेबी ने 23 सितंबर को, नई-दिल्ली में एके गोपालन भवन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग के संंबंध में ये मांगें रखीं।

🔴 वह चुनाव आयोग के कामकाज के संबंध में उसी सुबह इंडियन एक्सप्रेस में आयी रिपोर्ट के संदर्भ में प्रेस से बात कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि
मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) के गिर्द इंडियन एक्सप्रेस (23 सितंबर) द्वारा जो विस्फोटक भंडाफोड़ किए गए हैं, उनसे न सिर्फ इस प्रक्रिया के संबंध में बल्कि इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण तरीके से भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआइ) की निष्ठा को ही लेकर सवाल उठते हैं।

🔴 इन रहस्योद्घाटनों ने उन संदेहों तथा चिंताओं को ही और पुख्ता किया है, जिन्हें एसआइआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही लगातार सीपीआइ (एम) द्वारा, अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा और सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा उठाया जाता रहा था।

🔴 खबरें बताती हैं कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने मतदाता सूची में संशोधन तथा एसआइआर की प्रक्रिया से जुड़े अनेक निर्णयों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करायी थीं। कानून यह कहता है कि तीनों चुनाव आयुक्तों की शक्तियां बराबर हैं और उनके बीच कोई मतभेद हो तो, सर्वानुमति से या फिर बहुमत के जरिए ही उसे हल किया जा सकता है। लेकिन, मुख्य चुनाव आयुक्त इस नियम का अनुसरण नहीं कर रहे हैं बल्कि चुनाव आयोग के अपने अन्य सहयोगियों द्वारा उठायी गयी आपत्तियों को अनदेखा कर, अपनी ही राय थोपते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इन मतभेदों का संबंध इस प्रकार के बुनियादी प्रश्नों से है कि मतदाता सूचियों में किस तरह मतदाताओं को जोड़ा जा रहा है या हटाया जा रहा है और एसआइआर को किस तरह से लागू किया जा रहा है।

🔴 अब यह उजागर हो रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त शुरू से इसका झूठा ही दावा करते आ रहे थे कि समूची प्रक्रिया पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि पिछले कुछ महीनों से इस समूची व्यवस्था को इस हद तक केंद्रीयकृत कर दिया गया है कि यही धुंधलके में चला गया है कि वास्तव में फैसले ले कौन रहा है। सुप्रीम कोर्ट तक ने प्रौद्योगिकी पर अति-निर्भरता और ‘‘यांत्रिक’’ तरीके से नोटिस जारी किए जाने के मुद्दे उठाए हैं।

🔴 दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दे एसआइआर की प्रक्रिया से आगे तक जाते हैं। इनका संबंध चुनाव आयोग की संवैधानिक ईमानदारी तथा जनतांत्रिक कामकाज से, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से, अति-केंद्रीकरण से और सार्वभौम वयस्क मताधिकार के अधिकार की हिफाजत से है। एक निष्पक्ष संस्था के रूप में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता ही दांव पर लगी हुई है।

🔴 बेईमान चुनाव आयोग से जनता का भरोसा उठ गया है, जिसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। वह अब और अपने पद पर नहीं रह सकते हैं।

🔴 सीपीआइ (एम) पोलिट ब्यूरो ने एसआइआर की प्रक्रिया फौरन रोके जाने की भी मांग की है। भारतीय चुनाव आयोग की ईमानदारी तथा जनतांत्रिक कार्यप्रणाली को बहाल किया जाना चाहिए। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी, जिसके लिए संबंधित कानून को निरस्त करना होगा और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को स्वीकार करते हुए एक नया कानून बनाना होगा, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश से बनी चयन समिति की व्यवस्था हो।
Party of India (Marxist)

KOZHIKODE yesterday!    ZINDABAD
16/09/2026

KOZHIKODE yesterday! ZINDABAD

13/09/2026

Remembering Comrade Sitaram Yechury on his 2nd death Anniversary✊

13/09/2026

Remembering Comrade Sitaram Yechury on his 2nd death Anniversary✊

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व महासचिव कामरेड सीताराम येचुरी की द्वितीय स्मृति श्रद्धांजलि सभा में "भा...
12/09/2026

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व महासचिव कामरेड सीताराम येचुरी की द्वितीय स्मृति श्रद्धांजलि सभा में "भारत @ 80 जनवाद कहां ?" विषय पर मुख्य अतिथि पार्टी की वरिष्ठ नेता कामरेड वृंदा करात ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहां कि जनता के संघर्षों की आवाज थे कॉमरेड सीताराम येचुरी — विचारों और संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना होगा ।

देहरादून में नगर निगम टाउन हॉल में कॉमरेड सीताराम येचुरी के द्वितीय स्मृति दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सैकड़ों लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

एक ऐसे दौर में, जब लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के सामने लगातार चुनौतियां बढ़ रही हैं, कॉमरेड येचुरी के विचार और उनका राजनीतिक जीवन आज भी जनवादी ताकतों को दिशा देने का काम करते हैं। उन्होंने जीवनभर मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों और वंचित तबकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा संसद और सड़क—दोनों जगह जनता की आवाज को मजबूती से उठाया।

सभा की मुख्य वक्ता वरिष्ठ वामपंथी नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद कॉमरेड वृंदा करात ने येचुरी के संघर्षों और उनके वैचारिक योगदान को याद करते हुए मौजूदा परिस्थितियों में लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष ताकतों की एकजुटता को जरूरी बताया। उन्होंने उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने के सवाल को भी लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए चिंता व्यक्त की।

कार्यक्रम में सीपीआई, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के सवालों पर व्यापक एकजुटता की जरूरत आज पहले से कहीं अधिक है।

कॉमरेड सीताराम येचुरी हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और जनपक्षीय राजनीति की विरासत आज भी जीवित है।

आइए, उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए साम्प्रदायिकता, विभाजन और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को और मजबूत करें।

कार्यक्रम नगर निगम देहरादून के टाउन में आयोजित किया गया। सभा की अध्यक्षता पार्टी केन्द्रीय कमेटी सदस्य कामरेड राजेन्द्र नेगी ने की तथा सभा का संचालन पार्टी राज्य सचिव कामरेड राजेन्द्र पुरोहित ने किया ।
टाउन हाल उपर नीचे खचाखच भरा था हाल छोटा पड़ गया तो लोग गैलरी में घंटों खड़े रहे। सीपीआई वरिष्ठ नेता कामरेड समर भंडारी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. एस एन सचान, पूर्व शिक्षा निदेशक एसपी सेमवाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र अग्रवाल ने भी अपनी पार्टियों की ओर से कामरेड सीताराम येचुरी को श्रद्धांजलि दी।

कामरेड सीताराम येचुरी को लालसलाम !
कामरेड सीताराम येचुरी अमर रहे !!

12/09/2026

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व महासचिव कामरेड सीताराम येचुरी की द्वितीय स्मृति श्रद्धांजलि सभा में "भारत @ 80 जनवाद कहां ?" विषय पर मुख्य अतिथि पार्टी की वरिष्ठ नेता कामरेड वृंदा करात ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम नगर निगम देहरादून के टाउन में आयोजित किया गया। सभा की अध्यक्षता पार्टी केन्द्रीय कमेटी सदस्य कामरेड राजेन्द्र नेगी ने की तथा सभा का संचालन पार्टी राज्य सचिव कामरेड राजेन्द्र पुरोहित ने किया ।
टाउन हाल उपर नीचे खचाखच भरा था हाल छोटा पड़ गया तो लोग गैलरी में घंटों खड़े रहे। सीपीआई वरिष्ठ नेता कामरेड समर भंडारी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. एस एन सचान, पूर्व शिक्षा निदेशक एसपी सेमवाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र अग्रवाल ने भी अपनी पार्टियों की ओर से कामरेड सीताराम येचुरी को श्रद्धांजलि दी।

12/09/2026

कामरेड सीताराम येचुरी जी के द्वितीय स्मृति दिवस पर कामरेड बृंदा करात जी का देहरादून में संबोधन

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