Arjun Danu

Arjun  Danu Someone Asked me what is UR attitude…… then i simply replied… ” BEING SINGLE IS MY ATTITUDE?

Himalaya
25/05/2025

Himalaya

06/09/2023
25/08/2023

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यह सिस्टम को बायपास कर देगा....
जो कुछ नहीं करता, वह जाहिर तौर पर सहमत होता है।

Some Trips Memory ❤️
15/12/2021

Some Trips Memory ❤️

14/05/2018

ईजा भक्ति में कुछ पंक्तियाँ...

पहाडूँ की देवीक रूप छू ईजा,
गर्मी में छाया जाड़ान में धूप छू ईजा
ईजा छू तो उज्याव छू अन्यार में,
ईजा छू तो हँसी छू परिवार में।।

ईजा छू त झोई भात छू,
ईजा छू त चुड़कानि में स्वाद छू,
ईजा छू त बुराँस में रंग छू,
ईजा छू तो त्यार वारन में उमंग छू।। 🙏🏻🙏🏻

ईजा छू तो हर दु:ख दूर छू,
ईजा घरैकि छत व धूर छू,
ईजा गंगोत्री छू,ईजा यमुनोत्री छू,
ईजा सबैनकै एक राखिनी छत्री छू।। 🙏🏻🙏🏻

ईजा यमुना छु,ईजा गंगा की धार छू,
सच जब तक ईजा छू तब तक परिवार छू,
ईजा सत्यनारायणज्यू की काथ छू,
ईजा छू तो दूर हर व्यथा छू।। 🙏🏻🙏🏻

बँजानी धुराको धारा छू ईजा,
चाँद,सूरज,ध्रुबतारा छू ईजा,
ईजा छू तो म्यार बाट साफ छू,
ईजा छू त मेरि हर गल्ती माफ छू।। 🙏🏻🙏🏻

ईजा तपस्या छू,ईजा भक्ति छू,
सच ईजाक आशीश में भौतै शक्ति छू,
ईजा तूँ छै त खेतों में हरियाली छू,
ईजा तू छै तो साल भर धिनाली छू।। 🙏🏻🙏🏻

घरौक श्रिंगार तू छै ईजा,
खुशी की बहार तू छै ईजा,
ईजा तू छै त काँणा ले फूल छन,
ईजा तू छै तो ढूँगा ले धूल छन।। 🙏🏻🙏🏻

तेरी उमर लम्बी है जा ईजा,
तेरा हाथ म्यार ख्वार में रौ ईजा
ईजा तू छै तो खेतन में हरियाली छू,
ईजा तू छै तो साल भर धिनाली छू।।

सादर ||

14/05/2018
14/03/2016

एक बार नेता जी सुभाषचंद्र बोष जी हिटलर से मिलने जर्मनी गये, तो हिटलर के
आदमियों ने उन्हें बाहर प्रतीक्षा हॉल में
बैठा दिया।
नेताजी उसी दौरान बैठे बैठे किताब पढ़ने
लगे।
थोड़ी देर बाद एक आदमी आया हिटलर
का हम शक्ल बनकर और नेताजी के
साथ बात कर के चला गया। नेता जी ने
कोई भाव व्यक्त नहीं किया, थोड़ी देर
के बाद दूसरा आदमी हिटलर के वेश में
आकर नेताजी से हिटलर बन कर बात
की।नेता जी ने उसको भी कोई भाव नहीं
दिया.... इस तरह एक के बाद एक कई
बार हिटलर के वेश धारण कर के उनके
हमशक्ल आ के खुद को हिटलर बता कर
बात करते रहे लेकिन नेताजी फिर भी बैठे
बैठे किताब पढते रहे हिटलर को मिलने
के लिए ( जबकि आम तौर पर दूसरे लोग
हिटलर के हमशक्ल को मिलते ही, खुद
हिटलर को मिलके आये हैं ऐसे भ्रम में
वापस लौट आते थे).... आखिर में खुद
हिटलर आया और आते ही हिटलर ने
नेताजी के कंधे पर हाथ रखा.... नेताजी
तुरंत बोल उठे.... हिटलर....!!!! ...
हिटलर भी आश्चर्य में पड़ गया इतने
सारे मेरे हमशक्ल आये फिर भी आप मुझे
कैसे पहचान गये... जब की हमारी पहले
कभी कोई मुलाकात नहीं हुई।।
नेताजी ने तब जवाब दिया कि जिसकी
आवाज़ से ग्रेट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
भी कांपते हैं वो सुभाष चंद्र बोस के कंधे
पर हाथ रख ने कि गुस्ताखी इस दुनिया
में सिर्फ हिटलर कर सकता है दुसरा
कोई नहीं और ना ही हिटलर का आदमी भी।
ऐसे महान नेता जी की सच्चाई को कांग्रेस ने आज तक दबाकर रखा था।
जय हिन्द
��जय श्री राम��

14/03/2016

पायल हज़ारो रूपये में आती है पर पैरो में पहनी
जाती है
और.....
बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई
जाती है
इसलिए कीमत मायने नहीं रखती
उसका कृत्य मायने रखता हैंl
एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में
कभी नहीं लड़ते,
और जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को
नहीं पढ़ते....
नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा
मित्र होता है,
मिठी बात करने वाले तो चापुलुस भी होते है।
इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में
कीड़े नहीं पड़े।
और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...
अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर
सभी जाते है......इसीलिये दारू बेचने वाला कही नही
जाता ,
पर दूध बेचने वाले को घर ,
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।और दूघ
वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही
डाला ?
पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला पीते है ।
वाह रे दुनियाँ और दुनियाँ की रीत ।

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